जहानाबाद में प्रशांत किशोर का हमला: “दिल्ली के नुमाइंदे बनेंगे बिहार के CM, गुजरात से चलेगी सरकार”

जहानाबाद, 14 मार्च 2026 — जन सुराज अभियान के सूत्रधार प्रशांत किशोर ने शनिवार को जहानाबाद में आयोजित एक मीडिया ब्रीफिंग के दौरान बिहार की राजनीति को लेकर मुख्यमंत्री नीतीश कुमार पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि बिहार की वर्तमान राजनीतिक स्थिति इस ओर संकेत कर रही है कि आने वाले समय में राज्य की सरकार दिल्ली और गुजरात से नियंत्रित होगी, जबकि बिहार की जनता की भूमिका सीमित कर दी जाएगी।

प्रशांत किशोर ने कहा कि जिस तरह की राजनीतिक परिस्थितियां बन रही हैं, उससे साफ संकेत मिलता है कि मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के राज्यसभा जाने की चर्चा तेज हो रही है। उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि यदि ऐसा होता है तो बिहार में ऐसा मुख्यमंत्री बैठाया जाएगा जो दिल्ली में बैठे नेताओं का प्रतिनिधि होगा, और राज्य की सरकार का संचालन गुजरात के लोग दिल्ली में बैठकर करेंगे।

उन्होंने आगे कहा कि यह स्थिति बिहार की लोकतांत्रिक भावना के खिलाफ है। उनके मुताबिक, बिहार की जनता ने जिस उम्मीद के साथ सरकार चुनी थी, वह पूरी तरह टूट चुकी है और राज्य की राजनीति अब पूरी तरह सत्ता के समीकरणों और प्रबंधन के भरोसे चल रही है।

प्रशांत किशोर ने यह भी दावा किया कि मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के पास भले ही विधानसभा में 202 विधायकों का समर्थन बताया जा रहा हो, लेकिन यह वास्तविक जनसमर्थन का प्रतिबिंब नहीं है। उन्होंने कहा कि यह बहुमत जनता की इच्छा से नहीं बल्कि सत्ता के प्रभाव, धनबल और विभिन्न संस्थागत प्रक्रियाओं के जरिए मैनेज किया गया बहुमत है।

उन्होंने आरोप लगाया कि बिहार में राजनीतिक दल जनता के मुद्दों से दूर होते जा रहे हैं और केवल सत्ता बचाने तथा राजनीतिक समीकरण बनाने में लगे हुए हैं। उन्होंने कहा कि राज्य में बेरोजगारी, शिक्षा, स्वास्थ्य और पलायन जैसे गंभीर मुद्दों पर सरकार की प्राथमिकता कम होती जा रही है।

मीडिया से बातचीत के दौरान प्रशांत किशोर ने यह भी कहा कि बिहार की राजनीति को नई दिशा देने के लिए जन सुराज अभियान लगातार लोगों के बीच जाकर संवाद कर रहा है। उनका दावा है कि आने वाले समय में बिहार की जनता पारंपरिक राजनीतिक दलों के विकल्प के रूप में नई राजनीतिक सोच को स्वीकार करेगी।

प्रशांत किशोर के इस बयान के बाद राज्य की राजनीति में नई बहस छिड़ने की संभावना है, क्योंकि उन्होंने सीधे तौर पर सत्ता के शीर्ष नेतृत्व और उसके राजनीतिक ढांचे पर सवाल खड़े किए हैं। फिलहाल उनके इस बयान को लेकर सियासी हलकों में चर्चाएं तेज हो गई हैं।

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