प्राणपुर में सड़क नहीं, दर्द का सफर; मरीज को चारपाई पर ढोने की तस्वीर ने खोली सिस्टम की पोल

कटिहार जिले के प्राणपुर प्रखंड से सामने आई एक तस्वीर ने बिहार की ग्रामीण स्वास्थ्य व्यवस्था और सड़क निर्माण के दावों पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। कहूनिया पंचायत के वार्ड संख्या-12 में एक बीमार व्यक्ति को अस्पताल पहुंचाने के लिए ग्रामीणों को चारपाई का सहारा लेना पड़ा। गांव तक सड़क नहीं होने के कारण एम्बुलेंस बीच रास्ते में ही रुक गई और परिजनों ने मरीज को कंधे पर उठाकर मुख्य सड़क तक पहुंचाया। यह घटना केवल एक परिवार की परेशानी नहीं, बल्कि उस बदहाल व्यवस्था की कहानी है जिसमें आज भी हजारों ग्रामीण मूलभूत सुविधाओं से वंचित हैं।

जानकारी के अनुसार गांव निवासी मो. रॉबी की तबीयत अचानक बिगड़ गई थी। परिवार ने तत्काल एम्बुलेंस सेवा से संपर्क किया, लेकिन गांव की सड़क इतनी खराब थी कि वाहन वहां तक पहुंच ही नहीं सका। कच्चे रास्ते, कीचड़ और गड्ढों से भरे मार्ग के कारण मरीज को घर से निकालकर चारपाई पर लिटाया गया और कई ग्रामीणों ने मिलकर उसे मुख्य सड़क तक पहुंचाया। वहां से आगे इलाज के लिए वाहन की व्यवस्था की गई।

इस घटना का वीडियो और तस्वीरें सामने आने के बाद इलाके में लोगों का गुस्सा बढ़ गया है। ग्रामीणों का कहना है कि बरसों से सड़क निर्माण की मांग की जा रही है, लेकिन हर बार केवल आश्वासन ही मिला। चुनाव के समय नेता गांव में पहुंचकर विकास के बड़े-बड़े वादे करते हैं, लेकिन मतदान खत्म होते ही गांव की समस्याएं फिर अंधेरे में चली जाती हैं।

ग्रामीणों ने स्थानीय विधायक निशा सिंह और सरकार से सीधे सवाल पूछे हैं। लोगों का कहना है कि केवाला, कहूनिया और सहजा पंचायतों के साथ आखिर ऐसा भेदभाव क्यों किया जा रहा है। जब सरकार गांव-गांव तक विकास पहुंचाने का दावा करती है, तो फिर इन इलाकों के लोग आज भी बुनियादी सुविधाओं के लिए संघर्ष क्यों कर रहे हैं।

गांव के लोगों का कहना है कि चिकनी टोला से बिसारे मुख्य सड़क तक जाने वाला रास्ता दशकों से कच्चा पड़ा हुआ है। बरसात के मौसम में यह रास्ता दलदल में बदल जाता है। कई जगहों पर इतना कीचड़ हो जाता है कि पैदल चलना तक मुश्किल हो जाता है। बाइक और छोटे वाहन फंस जाते हैं, जबकि एम्बुलेंस जैसी आपातकालीन सेवाएं गांव तक पहुंच ही नहीं पातीं।

स्थानीय लोगों का आरोप है कि आदिवासी टोला, झरना टोला और गुणी टोला जैसे इलाकों को विकास योजनाओं में नजरअंदाज किया गया है। ग्रामीणों का कहना है कि आज भी यहां के लोग वैसी जिंदगी जीने को मजबूर हैं जैसी दशकों पहले हुआ करती थी। सड़क, स्वास्थ्य, शिक्षा और परिवहन जैसी सुविधाएं आज भी सपना बनी हुई हैं।

इस बदहाली का असर केवल स्वास्थ्य सेवाओं तक सीमित नहीं है। गांव की सामाजिक स्थिति भी इससे प्रभावित हो रही है। ग्रामीणों ने बताया कि खराब सड़क के कारण यहां रिश्ते आने बंद हो गए हैं। कई परिवारों में बेटियां शादी की उम्र पार कर चुकी हैं, लेकिन लोग गांव की हालत देखकर रिश्ता करने से पीछे हट जाते हैं।

ग्रामीणों के अनुसार जब कोई परिवार लड़की देखने आता है तो गांव तक पहुंचने में ही परेशान हो जाता है। बरसात के दिनों में हालात इतने खराब हो जाते हैं कि लोग बीच रास्ते से ही लौट जाते हैं। कई लोगों ने बताया कि रास्ते की दुर्दशा देखकर बारात लाने से भी लोग डरते हैं। इससे गांव के परिवारों में निराशा और चिंता बढ़ती जा रही है।

स्थानीय लोगों का कहना है कि यह स्थिति अब केवल परेशानी नहीं बल्कि सामाजिक अभिशाप बन चुकी है। खराब सड़क के कारण बच्चों की पढ़ाई भी प्रभावित होती है। स्कूल और कॉलेज जाने वाले छात्रों को रोजाना कीचड़ और गड्ढों से होकर गुजरना पड़ता है। कई बार बारिश के दौरान छात्र स्कूल नहीं पहुंच पाते।

ग्रामीणों और स्थानीय मुखिया प्रत्याशी मो. एजाज ने प्रशासन पर गंभीर आरोप लगाए हैं। उनका कहना है कि आजादी के बाद से अब तक गांव को पक्की सड़क नहीं मिल पाई। उन्होंने कहा कि सरकार विकास के नाम पर केवल विज्ञापन और दावे कर रही है, जबकि जमीन पर हालात बेहद खराब हैं।

मो. एजाज ने कहा कि जब गर्भवती महिलाओं, बुजुर्गों और गंभीर मरीजों को चारपाई पर ढोकर अस्पताल पहुंचाना पड़े, तब यह किसी एक विभाग की नहीं बल्कि पूरे सिस्टम की विफलता मानी जानी चाहिए। उन्होंने मांग की कि गांव तक जल्द से जल्द पक्की सड़क बनाई जाए ताकि लोगों को बुनियादी सुविधाओं के लिए संघर्ष न करना पड़े।

घटना के बाद सोशल मीडिया पर भी लोगों ने सरकार और प्रशासन की कार्यशैली पर सवाल उठाए। कई लोगों ने लिखा कि डिजिटल इंडिया और आधुनिक बिहार की बात करने वाली सरकार को पहले गांवों की बुनियादी जरूरतों पर ध्यान देना चाहिए। लोगों ने कहा कि जब तक गांवों तक सड़क और स्वास्थ्य सेवाएं नहीं पहुंचेंगी, तब तक विकास के दावे अधूरे रहेंगे।

विशेषज्ञों का मानना है कि ग्रामीण क्षेत्रों में सड़क केवल परिवहन का साधन नहीं होती, बल्कि स्वास्थ्य, शिक्षा और रोजगार से जुड़ी जीवनरेखा होती है। अगर सड़क बेहतर हो तो एम्बुलेंस समय पर पहुंच सकती है, बच्चे नियमित स्कूल जा सकते हैं और किसानों को बाजार तक पहुंचने में आसानी होती है। लेकिन जब सड़क ही नहीं होगी तो विकास की बाकी योजनाएं भी प्रभावित होंगी।

कटिहार के प्राणपुर से आई यह तस्वीर सरकार और प्रशासन के लिए चेतावनी की तरह देखी जा रही है। यह घटना बता रही है कि ग्रामीण इलाकों में अब भी कई ऐसी समस्याएं मौजूद हैं जिन्हें केवल भाषण और घोषणाओं से दूर नहीं किया जा सकता।

फिलहाल गांव के लोगों की मांग साफ है। उन्हें अब केवल आश्वासन नहीं बल्कि जमीन पर काम चाहिए। ग्रामीण चाहते हैं कि जल्द सड़क निर्माण हो, स्वास्थ्य सेवाएं मजबूत हों और ऐसा सिस्टम बने जिसमें किसी मरीज को इलाज के लिए चारपाई पर ढोना न पड़े।

लोगों का कहना है कि अगर हालात नहीं बदले तो आने वाले समय में जनता जवाब मांगने के लिए मजबूर होगी। क्योंकि अब गांव के लोग विज्ञापनों वाला विकास नहीं, बल्कि अपने जीवन में वास्तविक बदलाव देखना चाहते हैं।

  • ये भी पढ़े..

    आज का राशिफल और पंचांग: 3 जुलाई 2026 का दिन किन राशियों के लिए रहेगा शुभ, जानें सभी 12 राशियों का विस्तृत भविष्यफल

    Share Add as a preferred…

    श्रावणी मेला 2026 की तैयारियों की उच्चस्तरीय समीक्षा, समयबद्ध और गुणवत्तापूर्ण कार्य सुनिश्चित करने का निर्देश

    Share Add as a preferred…