HIGHLIGHTS: 1 अप्रैल से लागू होगी नई दर, उपभोक्ताओं की बल्ले-बल्ले
- बड़ी जीत: बिजली कंपनी के 35 पैसे प्रति यूनिट बढ़ोतरी के प्रस्ताव को आयोग ने लगातार दूसरे साल ठुकराया।
- स्लैब का खेल: अब शहरी, ग्रामीण और व्यावसायिक श्रेणियों में 2 के बजाय सिर्फ 1 स्लैब होगा; ज्यादा खपत वालों को मिलेगी सस्ती बिजली।
- स्मार्ट मीटर फायदा: स्मार्ट मीटर उपभोक्ताओं को पहले की तरह 25 पैसे प्रति यूनिट की छूट जारी रहेगी।
- तारीख नोट करें: नई दरें 1 अप्रैल 2026 से प्रभावी होंगी, जो मार्च 2027 तक लागू रहेंगी।
पटना | 19 मार्च, 2026
भीषण गर्मी की दस्तक से पहले बिहार के करोड़ों बिजली उपभोक्ताओं के लिए राहत भरी खबर आई है। पटना स्थित बिहार विद्युत विनियामक आयोग ने साफ कर दिया है कि इस साल जनता पर महंगाई का ‘करंट’ नहीं लगेगा। आयोग के अध्यक्ष आमिर सुबहानी की बेंच ने बिजली कंपनियों की उस याचिका को सिरे से खारिज कर दिया, जिसमें दरों में वृद्धि की मांग की गई थी।
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श्रेणी |
पुराना स्लैब (Slabs) |
नया स्लैब (Slab) |
असर (Impact) |
|---|---|---|---|
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शहरी घरेलू |
02 स्लैब |
01 स्लैब |
ज्यादा यूनिट खर्च करने पर भी न्यूनतम दर लगेगी। |
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ग्रामीण घरेलू |
02 स्लैब |
01 स्लैब |
बिल में गिरावट की संभावना। |
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व्यावसायिक |
02 स्लैब |
01 स्लैब |
छोटे और बड़े कारोबारियों को बड़ी राहत। |
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स्मार्ट मीटर |
25 पैसे छूट |
यथावत |
डिजिटल पेमेंट पर अतिरिक्त लाभ मिलता रहेगा। |
आयोग का ‘आम जनता’ वाला फैसला
बुधवार को आयोग के अध्यक्ष आमिर सुबहानी, सदस्य अरुण कुमार सिन्हा और परशुराम सिंह यादव ने कंपनी की याचिका पर ऐतिहासिक फैसला सुनाया:
- प्रस्ताव खारिज: कंपनी ने सभी श्रेणियों में 35 पैसे की बढ़ोतरी मांगी थी, जिसे आयोग ने जनहित में स्वीकार नहीं किया।
- स्लैब यूनिफिकेशन: अब शहरी और ग्रामीण क्षेत्रों में बिजली दर का केवल एक ही स्लैब होगा। इससे बिलिंग की प्रक्रिया पारदर्शी होगी और उपभोक्ताओं को कम भुगतान करना होगा।
- निरंतरता: ऑनलाइन भुगतान और समय पर बिल जमा करने पर मिलने वाली छूट पहले की तरह ही मिलती रहेगी।
VOB का नजरिया: क्या यह ‘चुनावी’ राहत है या सुशासन का असर?
लगातार दूसरे साल बिजली की दरें न बढ़ना बिहार सरकार और विनियामक आयोग की संवेदनशीलता को दर्शाता है। एक तरफ जहाँ पड़ोसी राज्यों में बिजली महंगी हो रही है, वहीं बिहार में ‘स्लैब’ कम करके बिल घटाने की कोशिश सराहनीय है। ‘द वॉयस ऑफ बिहार’ का मानना है कि स्मार्ट मीटर के बढ़ते दायरे और बिजली चोरी में कमी आने की वजह से ही आयोग यह फैसला ले पाया है। अब उपभोक्ताओं की जिम्मेदारी है कि वे बिजली बचाएं और समय पर बिल चुकाएं ताकि यह ‘राहत’ भविष्य में भी जारी रहे।


