
भागलपुर। सिल्क सिटी भागलपुर का मधुसूदनपुर थाना क्षेत्र इन दिनों अपराधियों की गोलियों की तड़तड़ाहट और रसूखदारों की आपसी खींचतान का अखाड़ा बना हुआ है। मामला बाईपास बेलसिरा मोड़ पर स्थित एक बेशकीमती 16 कट्ठा जमीन से जुड़ा है, जहाँ बीते रविवार को करीब 10 राउंड हुई ताबड़तोड़ फायरिंग ने इलाके में दहशत फैला दी थी। इस हाई-प्रोफाइल विवाद में एक तरफ नाथनगर विधायक मिथुन यादव का पक्ष है, तो दूसरी तरफ प्रखंड प्रमुख दुर्गा दयाल के लोग आमने-सामने हैं। शुक्रवार को जब डीएसपी-2 राकेश कुमार दल-बल के साथ घटनास्थल पर जांच करने पहुँचे, तो वहां विधायक की मौजूदगी ने एक नए विवाद को जन्म दे दिया। विरोधी पक्ष ने इसे पुलिसिया अनुसंधान को प्रभावित करने की सोची-समझी कोशिश करार दिया है, जिससे बेलसिरा की इस जमीन पर मची रार अब सड़कों से निकलकर सत्ता और कानून के गलियारों में पहुंच गई है।
रविवार का वो काला दिन: 10 राउंड फायरिंग और खौफ का मंजर
घटना की पृष्ठभूमि बीते रविवार की है, जब बेलसिरा मोड़ पर स्थित इस विवादित भूखंड पर कब्जे और वर्चस्व को लेकर दो गुटों के बीच खूनी संघर्ष की स्थिति पैदा हो गई थी। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, उस दिन दोनों ओर से हथियारों का खुला प्रदर्शन किया गया और करीब 10 राउंड फायरिंग की गई। गोलियों की आवाज से पूरा बाईपास इलाका थर्रा उठा था। जमीन की कीमत करोड़ों में बताई जा रही है, जो इस विवाद की मुख्य जड़ है।
पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए उस वक्त स्थिति को संभाला था और मामले में संलिप्तता के आधार पर एक आरोपी को गिरफ्तार कर जेल भी भेजा था। लेकिन मामला तब और पेचीदा हो गया जब इसमें स्थानीय राजनीतिक दिग्गजों के करीबियों के नाम सामने आने लगे। एक तरफ विधायक के भाई का नाम उछाला जा रहा है, तो दूसरी तरफ प्रमुख के समर्थकों की भूमिका पर सवाल उठ रहे हैं।
डीएसपी की एंट्री और विधायक की मौजूदगी: निष्पक्षता पर उठते सवाल
शुक्रवार को डीएसपी-2 राकेश कुमार जब भारी पुलिस बल के साथ जमीन की पैमाइश और घटना के साक्ष्यों का मिलान करने पहुँचे, तो वहां का नजारा चौंकाने वाला था। जांच टीम के पहुँचने के कुछ ही देर बाद नाथनगर विधायक मिथुन यादव भी अपने समर्थकों और जमीन के कुछ दावेदारों के साथ वहां पहुँच गए। विधायक की मौके पर मौजूदगी ने विरोधी खेमे को तीखी प्रतिक्रिया देने का मौका दे दिया।
प्रखंड प्रमुख दुर्गा दयाल और उनके समर्थकों का आरोप है कि जब पुलिस अपना अनुसंधान (investigation) कर रही हो, तो एक जनप्रतिनिधि का वहां मौजूद रहना जांच को एक तरफा मोड़ने की कोशिश है। प्रमुख पक्ष का कहना है कि विधायक के वहां होने से गवाहों पर दबाव बनता है और पुलिस के अधिकारी भी स्वतंत्र रूप से काम नहीं कर पाते। हालांकि, पुलिस के आला अधिकारी इस मामले में फूंक-फूंक कर कदम रख रहे हैं।
विधायक मिथुन यादव का पक्ष: ‘मैं किसानों और जमीन मालिकों के साथ हूँ’
इस पूरे घटनाक्रम पर विधायक मिथुन यादव ने अपना पक्ष मजबूती से रखा है। उनका कहना है कि वे किसी जांच को प्रभावित करने नहीं, बल्कि सच्चाई को सामने लाने के लिए वहां पहुँचे थे। विधायक के अनुसार, उन्हें सूचना मिली थी कि डीएसपी जांच के लिए आ रहे हैं, इसलिए वे जमीन के वास्तविक मालिक और आसपास के उन किसानों के साथ वहां गए जिनकी जमीनें इस विवाद से प्रभावित हो रही हैं।
मिथुन यादव ने दावा किया कि उन्होंने डीएसपी के समक्ष ही किसानों का बयान दर्ज करवाया है। कई किसानों ने पुलिस को बताया है कि इस मामले में मुख्य अभियुक्त झींगला यादव की जमीन मौके पर है ही नहीं। विधायक का तर्क है कि झींगला यादव और उनके लोग अवैध रूप से किसानों की जमीन हड़पने की कोशिश कर रहे हैं और रविवार की फायरिंग उसी का हिस्सा थी। उन्होंने पुलिस प्रशासन से मांग की कि दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाए, चाहे वे किसी भी पक्ष के हों।
प्रमुख दुर्गा दयाल का प्रहार: ‘अनुसंधान में दखलअंदाजी बर्दाश्त नहीं’
दूसरी ओर, प्रखंड प्रमुख दुर्गा दयाल ने विधायक की भूमिका पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं। उन्होंने कहा कि पुलिस अनुसंधान एक कानूनी प्रक्रिया है और इसमें किसी भी विधायक या राजनीतिक व्यक्ति की दखलअंदाजी गैर-कानूनी है। प्रमुख का आरोप है कि विधायक अपने रसूख का इस्तेमाल कर अपने पक्ष के लोगों को बचाने की कोशिश कर रहे हैं।
दुर्गा दयाल ने एक वायरल वीडियो फुटेज का भी हवाला दिया, जिसमें उनके अनुसार साफ दिख रहा है कि रविवार की घटना में किसने हथियार लहराए और किसने उकसाने का काम किया। उन्होंने कहा कि उन्हें देश के न्यायालय और पुलिस पदाधिकारियों की निष्पक्षता पर पूरा भरोसा है। प्रमुख ने मांग की है कि वायरल वीडियो के आधार पर उन सभी चेहरों की पहचान कर उन्हें गिरफ्तार किया जाए जो उस दिन हथियारों के साथ अखाड़े में मौजूद थे।
डीएसपी राकेश कुमार की दो-टूक: ‘कानून सबके लिए बराबर है’
विवाद और आरोपों के बीच जांच करने पहुँचे डीएसपी-2 राकेश कुमार ने बेहद सधे हुए अंदाज में अपनी बात रखी। उन्होंने स्पष्ट किया कि पुलिस अभी केवल घटनास्थल का भौतिक सत्यापन (Physical Verification) कर रही है। मौके पर जो भी बातें सामने आई हैं, उन्हें डायरी में नोट किया गया है।
डीएसपी ने बताया कि सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे वीडियो फुटेज और सीसीटीवी फुटेज की सत्यता की जांच अभी जारी है। जब तक वैज्ञानिक तरीके से वीडियो के वास्तविक होने की पुष्टि नहीं हो जाती, तब तक किसी के खिलाफ कोई अंतिम राय बनाना जल्दबाजी होगी। उन्होंने एक महत्वपूर्ण संदेश देते हुए कहा कि कानून की नजर में कोई छोटा या बड़ा नहीं है; चाहे वह विधायक का पक्ष हो या प्रमुख का, पुलिस तथ्यों के आधार पर ही आरोप पत्र दाखिल करेगी।
बेशकीमती 16 कट्ठा जमीन: अपराध और रसूख का ‘डेथ ट्रैप’ (विशेष विश्लेषण)
द वॉयस ऑफ बिहार के विशेष विश्लेषण के अनुसार, भागलपुर में जमीनों की बढ़ती कीमतों ने इसे अपराध का नया केंद्र बना दिया है। बाईपास के किनारे स्थित यह 16 कट्ठा जमीन वर्तमान में सोने के अंडे देने वाली मुर्गी जैसी है।
- वर्चस्व की लड़ाई: यहाँ मामला केवल जमीन का नहीं, बल्कि यह साबित करने का भी है कि इलाके में किसका ‘सिक्का’ चलता है। विधायक और प्रमुख के बीच की यह तकरार आने वाले स्थानीय चुनावों की भी आहट दे रही है।
- पुलिस की चुनौती: ऐसे मामलों में पुलिस अक्सर राजनीतिक दबाव में आ जाती है। यदि जांच निष्पक्ष नहीं हुई, तो इलाके में एक बार फिर बड़ी गैंगवार की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता।
- गवाहों की सुरक्षा: विधायक और प्रमुख जैसे शक्तिशाली लोगों के शामिल होने से स्थानीय गवाह बयान देने से कतरा रहे हैं।
समाधान या केवल खानापूर्ति?
एक तटस्थ दृष्टिकोण से देखें तो मधुसूदनपुर की यह घटना बिहार के ‘भूमि विवाद’ की उस बीमारी का हिस्सा है जो अक्सर हिंसक रूप ले लेती है। रविवार को हुई 10 राउंड फायरिंग यह बताने के लिए काफी है कि अपराधियों के मन में पुलिस का खौफ खत्म हो चुका है। विधायक मिथुन यादव का यह कहना कि वे किसानों के साथ हैं, एक पक्ष हो सकता है, लेकिन जांच के समय मौके पर उनकी मौजूदगी ने निष्पक्षता पर जो सवाल खड़े किए हैं, उन्हें नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।
वहीं, प्रमुख दुर्गा दयाल का वायरल वीडियो पर भरोसा करना यह दर्शाता है कि अब तकनीकी साक्ष्य ही इस मामले में असली निर्णायक होंगे। पुलिस को चाहिए कि वह बिना किसी राजनीतिक दबाव के वीडियो की फॉरेंसिक जांच कराए और जो भी लोग फायरिंग में शामिल थे, उन्हें सलाखों के पीछे भेजे।
सच की तलाश में मधुसूदनपुर पुलिस
3 अप्रैल 2026 की यह जांच रिपोर्ट अब भागलपुर पुलिस के वरीय अधिकारियों की टेबल पर है। बेलसिरा मोड़ की इस जमीन पर अब तक जो खून और बारूद का खेल चला है, उसका अंत केवल एक निष्पक्ष जांच से ही संभव है। डीएसपी राकेश कुमार ने जो संयम दिखाया है, वह प्रशंसनीय है, लेकिन जनता की नजरें अब ‘एक्शन’ पर टिकी हैं। क्या वाकई कानून सबके लिए बराबर साबित होगा? क्या विधायक के करीबियों या प्रमुख के लोगों पर कार्रवाई की हिम्मत पुलिस जुटा पाएगी?
द वॉयस ऑफ बिहार की टीम इस पूरी स्थिति पर अपनी पैनी नजर बनाए हुए है। 16 कट्ठा की यह जमीन अब केवल मिट्टी का टुकड़ा नहीं, बल्कि भागलपुर प्रशासन के इकबाल की परीक्षा बन चुकी है। फिलहाल, इलाके में तनावपूर्ण शांति है और पुलिस बल की तैनाती बढ़ा दी गई है।


