गया (बिहार), 10 जुलाई 2025:बिहार की राजनीति में एक बार फिर ‘भूरा बाल साफ करो’ नारे को लेकर विवाद खड़ा हो गया है। गया जिले के अतरी विधानसभा क्षेत्र में आयोजित एक सभा में यह नारा लगाया गया, जिसका वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है। वीडियो में दावा किया गया है कि नारा आरजेडी विधायक रंजीत यादव की मौजूदगी में लगाया गया।
सभा के दौरान विवादित नारा, विधायक की मौजूदगी में हुआ प्रदर्शन
जानकारी के अनुसार, मंगलवार को अतरी विधानसभा के सीढ़ पंचायत स्थित शिवाला मैदान में पंचायत भवन निर्माण स्थल को लेकर आरजेडी विधायक रंजीत यादव के नेतृत्व में धरना आयोजित किया गया था। इसी दौरान सहोड़ा पंचायत की मुखिया फोटो देवी के पति मुनारिक यादव ने भाषण में पूर्व मुख्यमंत्री लालू प्रसाद यादव का हवाला देते हुए “भूरा बाल साफ करो” का नारा दोहराया।
नारे का उच्चारण करते हुए मुनारिक यादव ने कहा:
“शुरुआत में हमारे लालू जी कहते थे ‘भूरा बाल साफ करो’, अब वही समय आ गया है।”
सभा में मौजूद लोगों ने इस नारे पर तालियां भी बजाईं और किसी ने तत्काल विरोध नहीं जताया।
क्या है ‘भूरा बाल साफ करो’ नारे का अर्थ?
यह नारा 1990 के दशक में चर्चित हुआ था। राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार,
‘भूरा बाल’ का अर्थ है:
- भू – भूमिहार
- रा – राजपूत
- बा – ब्राह्मण
- ल – लाला (कायस्थ)
इस नारे को सवर्ण विरोधी राजनीति का प्रतीक माना गया, हालांकि लालू प्रसाद यादव हमेशा इस नारे से इनकार करते रहे हैं और दावा करते हैं कि यह राजनीतिक विरोधियों और कुछ मीडिया संस्थानों द्वारा गढ़ा गया आरोप है।
विधायक का स्पष्टीकरण: बयान की निंदा, राजद से नहीं जुड़ा व्यक्ति
वीडियो के वायरल होने के बाद विधायक रंजीत यादव ने अपना पल्ला झाड़ते हुए कहा:
“जिस व्यक्ति ने यह नारा लगाया है, उसका राजद से कोई संबंध नहीं है। हम इस बयान की निंदा करते हैं। राष्ट्रीय जनता दल सभी जाति और धर्म के लोगों की पार्टी है।”
राजनीतिक असर: तेजस्वी यादव की ए-टू-जेड नीति को झटका?
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि जब तेजस्वी यादव ‘A to Z’ की समावेशी राजनीति की बात कर रहे हैं, तब ऐसे नारे पार्टी की छवि को नुकसान पहुंचा सकते हैं।
इस विवाद के कारण बिहार विधानसभा चुनाव से पहले आरजेडी और तेजस्वी यादव को राजनीतिक दबाव का सामना करना पड़ सकता है।
नोट: यह खबर एक सार्वजनिक सभा में दिए गए भाषण और वायरल वीडियो के आधार पर तैयार की गई है। इसमें प्रयुक्त शब्द वक्ताओं के हैं, समाचार संस्था का इनसे सहमत होना आवश्यक नहीं।


