पारस अस्पताल हत्याकांड पर सियासत गरम, पप्पू यादव ने राष्ट्रपति शासन की मांग की

पटना, 17 जुलाई 2025 | राजधानी पटना में दिनदहाड़े हुए पारस अस्पताल गोलीकांड ने राज्य की कानून व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। गुरुवार सुबह बेऊर जेल से पैरोल पर बाहर आए कुख्यात अपराधी चंदन मिश्रा की गोली मारकर हत्या कर दी गई। घटना के बाद राजनीतिक हलकों में उबाल आ गया है।


घटनास्थल पहुंचे पप्पू यादव, पुलिस ने अंदर जाने से रोका

पूर्णिया से निर्दलीय सांसद पप्पू यादव घटनास्थल पर पहुंचे, लेकिन पुलिस ने उन्हें अस्पताल के भीतर जाने से रोक दिया। इससे नाराज़ होकर उन्होंने राज्य सरकार और प्रशासन पर तीखा हमला बोला। पत्रकारों से बातचीत में पप्पू यादव ने कहा:

“मैं राज्यपाल से बिहार में राष्ट्रपति शासन लगाने का अनुरोध करूंगा। यहाँ न डॉक्टर सुरक्षित हैं, न नर्स, न आम आदमी। पूरी व्यवस्था अपराधियों और माफियाओं के कब्जे में है।”


जातीय आधार पर एनकाउंटर का आरोप

पप्पू यादव ने बिहार पुलिस पर जातिगत भेदभाव के आरोप लगाते हुए कहा कि:

“बिहार पुलिस जाति देखकर फर्जी मुठभेड़ करती है। असली अपराधियों को सत्ता के संरक्षण में बचाया जाता है। आज जो मारे गए हैं, वह भी एक गैंगवार का हिस्सा था, लेकिन सवाल ये है कि अपराधी अस्पताल में घुसकर हत्या कैसे कर लेते हैं?”


मुख्यमंत्री पर निशाना, भाजपा पर शासन चलाने का आरोप

उन्होंने मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए कहा:

“बिहार में अब नीतीश कुमार की नहीं, भाजपा की सरकार चल रही है। नीतीश जी अब शासन नहीं संभाल पा रहे हैं। माफिया, अपराधी और तस्कर पूरे राज्य को बंधक बना चुके हैं।”


क्या है पूरा मामला

गुरुवार की सुबह पटना के पॉश इलाके शास्त्री नगर स्थित पारस अस्पताल में पांच हथियारबंद बदमाशों ने इलाजरत कैदी चंदन मिश्रा को कमरा नंबर 209 में घुसकर गोली मार दी। चंदन मिश्रा बक्सर का निवासी और हत्या समेत कई संगीन मामलों का आरोपी था। जेल में बंद रहने के दौरान तबीयत खराब होने पर उसे पैरोल पर छोड़ा गया था। पुलिस को शक है कि यह गैंगवार का नतीजा है।

पटना एसएसपी कार्तिकेय के शर्मा ने कहा कि पुलिस सीसीटीवी फुटेज खंगाल रही है और शूटरों की पहचान की जा रही है।


पारस अस्पताल में सुरक्षा पर उठे सवाल

इतनी सख्त सुरक्षा के बीच एक निजी अस्पताल में अपराधियों का इस तरह दाखिल होकर फायरिंग करना पटना की कानून व्यवस्था पर गहरा प्रश्नचिह्न लगाता है।
इससे पहले भी राजधानी में व्यवसायी गोपाल खेमका, वकील जितेंद्र मेहता और स्कूल संचालक की हत्याएं हो चुकी हैं।


राजनीतिक प्रतिक्रिया तेज होने के आसार

इस घटना के बाद राजनीतिक दलों की प्रतिक्रियाएं लगातार सामने आ रही हैं। विपक्ष ने इसे नीतीश सरकार की विफलता बताया है और जल्द ही विधानसभा में इस मुद्दे पर हंगामा होने की संभावना जताई जा रही है।


 

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