भागलपुर, 20 जुलाई 2025: बिहार की राजनीति में शुक्रवार को उस समय नया सियासी तूफान उठ खड़ा हुआ जब राष्ट्रीय जनता दल (राजद) के आधिकारिक सोशल मीडिया पेज से भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) और जनता दल यूनाइटेड (जदयू) को लेकर एक विवादित पोस्ट साझा किया गया। पोस्ट में एनडीए को लेकर भ्रामक दावा किया गया था, जिससे सियासी हलकों में खलबली मच गई।
हालांकि विवाद बढ़ता देख राजद ने कुछ ही देर में वह पोस्ट डिलीट कर दिया, लेकिन तब तक मामला सोशल मीडिया और राजनीतिक गलियारों में सुर्खियों में आ चुका था।
प्रेम कुमार का तीखा पलटवार
इस मुद्दे पर बिहार सरकार के सहकारिता मंत्री एवं भाजपा के वरिष्ठ नेता प्रेम कुमार ने भागलपुर सर्किट हाउस में मीडिया से बात करते हुए राजद पर जमकर निशाना साधा। उन्होंने कहा:
“राजद अब पूरी तरह बौखला चुका है। उन्हें न तो अपने नेतृत्व पर भरोसा है और न ही जनता के समर्थन पर। इसलिए सोशल मीडिया के जरिए सस्ती राजनीति कर भ्रम फैलाने की कोशिश कर रहे हैं।”
प्रेम कुमार ने स्पष्ट किया कि 2025 के विधानसभा चुनाव में मुख्यमंत्री पद का चेहरा नीतीश कुमार ही होंगे। उन्होंने दावा किया कि एनडीए पूरी तरह एकजुट है और आगामी चुनाव में मजबूती के साथ मैदान में उतरेगा।
एनडीए में फूट की अफवाह फैलाने का आरोप
भाजपा नेता ने यह भी आरोप लगाया कि राजद जानबूझकर एनडीए में फूट की अफवाह फैला रहा है, जबकि जमीनी सच्चाई यह है कि भाजपा-जदयू-हम और अन्य घटक दल संपूर्ण एकता के साथ जनता के हितों के लिए काम कर रहे हैं।
“जनता ने एनडीए पर भरोसा जताया है और हम उसे कायम रखेंगे। राजद केवल सोशल मीडिया पोस्टों से राजनीति करना चाह रहा है, जबकि जनता विकास चाहती है,” प्रेम कुमार ने कहा।
क्या था राजद का विवादित पोस्ट?
राजद द्वारा साझा किए गए पोस्ट में यह संकेत देने की कोशिश की गई थी कि एनडीए में मुख्यमंत्री पद को लेकर मतभेद हैं, और जदयू के भीतर भी नेतृत्व को लेकर असंतोष है। पोस्ट में ग्राफिक्स के ज़रिए नीतीश कुमार की छवि को कमजोर दिखाने की कोशिश की गई थी।
यह पोस्ट जैसे ही वायरल हुआ, भाजपा और जदयू दोनों की तरफ से विरोध शुरू हो गया। जदयू के प्रवक्ता नीरज कुमार ने भी इसे “अराजनीतिक और बचकाना प्रयास” करार दिया।
राजद की चुप्पी और विपक्षी रणनीति
राजद की ओर से फिलहाल कोई आधिकारिक बयान नहीं आया है। हालांकि सूत्रों के मुताबिक, पार्टी ने इस पोस्ट को “वॉलंटियर की गलती” बताते हुए आंतरिक स्तर पर समीक्षा शुरू कर दी है।
राजनीतिक जानकारों का मानना है कि राजद एनडीए के भीतर नेतृत्व को लेकर मतभेद की कहानी गढ़कर आगामी चुनाव में विपक्ष को धार देना चाह रही है, लेकिन इससे सत्तारूढ़ गठबंधन को और अधिक संबल मिल सकता है।
बिहार की राजनीति में सोशल मीडिया अब केवल प्रचार का माध्यम नहीं, बल्कि राजनीतिक हमलों का बड़ा हथियार बन चुका है। राजद के एक पोस्ट ने जहां भाजपा और जदयू को एक सुर में बोलने का मौका दिया, वहीं विपक्ष की रणनीति और आंतरिक दिशा को लेकर भी कई सवाल खड़े कर दिए हैं। फिलहाल एक बात तो तय है – 2025 की राह में अब हर पोस्ट, हर बयान, और हर तस्वीर मायने रखेगी।


