पटना में ‘पोस्टर वार’ से सियासी उबाल! राजद का भाजपा पर तीखा प्रहार— “कोई ऐसा सगा नहीं, जिसे भाजपा ने ठगा नहीं”; सीएम की कुर्सी और ‘अजगर’ वाली तस्वीर वायरल

HIGHLIGHTS:

  • नया मोड: सीएम नीतीश कुमार के राज्यसभा नामांकन के बाद बिहार की राजनीति में मची हलचल।
  • अजगर वाला पोस्टर: राजद कार्यालय के बाहर लगा विवादित पोस्टर; भाजपा को बताया ‘सहयोगियों को निगलने वाला अजगर’।
  • तीखा स्लोगन: “कोई ऐसा सगा नहीं, जिसको भाजपा ने ठगा नहीं”— राजद का सीधा हमला।
  • संकेत: पोस्टर में सीएम की कुर्सी से राज्यसभा की ओर जाता ‘तीर’ बना चर्चा का विषय।

नीतीश के ‘दिल्ली’ जाने पर राजद का तंज: “अजगर ने दिखाया रंग!”

पटना: बिहार की सियासत में इन दिनों ‘राजभवन’ से लेकर ‘राज्यसभा’ तक की दूरी सबसे ज्यादा चर्चा में है। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के राज्यसभा के लिए नामांकन दाखिल करते ही विपक्ष को हमला करने का बड़ा मौका मिल गया है। शनिवार को राजधानी पटना की सड़कों पर एक ऐसे पोस्टर ने सबका ध्यान खींचा, जिसने एनडीए के अंदरूनी तालमेल पर सवालिया निशान लगा दिए हैं। राष्ट्रीय जनता दल (राजद) ने भाजपा को एक ‘अजगर’ के रूप में दिखाकर यह संदेश देने की कोशिश की है कि भाजपा अपने सहयोगियों को धीरे-धीरे निगल जाती है।

[पोस्टर का ‘पॉलिटिकल डिकोडिंग’: क्या कहती है ये तस्वीर?]

​राजद के इस पोस्टर में प्रतीकों के जरिए एक पूरी कहानी कहने की कोशिश की गई है:

प्रतीक (Symbol)

राजद का सियासी अर्थ (Meaning)

विशाल अजगर

भाजपा, जो अपने सहयोगियों को ‘ठगने’ और ‘निगलने’ के लिए जानी जाती है।

सीएम की कुर्सी

वह पद जिसे भाजपा ने (राजद के अनुसार) सुरक्षित नहीं रहने दिया।

राज्यसभा की ओर तीर

नीतीश कुमार का ‘एग्जिट’— बिहार की सक्रिय राजनीति से दिल्ली की ओर रवानगी।

मुख्य स्लोगन

“कोई ऐसा सगा नहीं, जिसको भाजपा ने ठगा नहीं।”

“भाजपा की नीति केवल सत्ता का गणित”— एजाज अहमद

​राजद के प्रदेश प्रवक्ता एजाज अहमद ने इस पोस्टर का बचाव करते हुए भाजपा पर हमला बोला। उन्होंने कहा:

​”यह पोस्टर केवल एक चित्र नहीं, बल्कि भाजपा की कार्यशैली की हकीकत है। भाजपा अपने सहयोगियों का इस्तेमाल ‘टिश्यू पेपर’ की तरह करती है। नीतीश जी को राज्यसभा भेजना भाजपा की उसी ‘अजगर वाली नीति’ का हिस्सा है, जहाँ वह अपने सहयोगियों के वजूद को ही मिटा देती है।”

नामांकन के बाद क्यों बढ़ी हलचल?

​राजनीतिक गलियारों में चर्चा है कि नीतीश कुमार का राज्यसभा जाना बिहार में ‘नेतृत्व परिवर्तन’ की ओर बड़ा कदम है। राजद इसी को मुद्दा बनाकर जनता के बीच यह संदेश दे रही है कि भाजपा ने नीतीश कुमार को बिहार की राजनीति से ‘साइडलाइन’ कर दिया है। जहाँ जेडीयू इसे ‘रणनीतिक कदम’ बता रही है, वहीं राजद इसे ‘भाजपा की ठगी’ का नाम दे रही है।

VOB का नजरिया: ‘अजगर’ और ‘कुर्सी’ की जंग में जनता कहाँ?

बिहार की राजनीति में रूपकों और उपमाओं का पुराना नाता रहा है। कभी ‘पलटू राम’ तो कभी ‘अजगर’— राजद ने इस बार भाजपा की छवि को ‘भक्षक’ के रूप में पेश करने की कोशिश की है। नीतीश कुमार का राज्यसभा जाना वाकई उनकी अपनी इच्छा है या भाजपा का ‘चेक-मेट’, यह तो भविष्य बताएगा। लेकिन इस पोस्टर ने यह साफ कर दिया है कि 2026 के विधानसभा चुनावों (अगर समय पर हुए) की बिसात अभी से बिछनी शुरू हो गई है। ‘अजगर’ के इस वार का पलटवार भाजपा किस अंदाज में करती है, यह देखना दिलचस्प होगा।

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