बिहार की सियासत में हलचल: उपेंद्र कुशवाहा के भोज से दूरी और BJP से मुलाकात ने बढ़ाई सियासी अटकलें

पटना:बिहार की राजनीति से जुड़ी एक अहम खबर सामने आ रही है, जिसने सियासी गलियारों में हलचल बढ़ा दी है। राष्ट्रीय लोक मोर्चा (रालोमो) के अध्यक्ष और राज्यसभा सांसद उपेंद्र कुशवाहा द्वारा आयोजित लिट्टी-चोखा भोज में पार्टी के तीन विधायकों की गैरहाजिरी अब चर्चा का बड़ा विषय बन गई है। इस घटनाक्रम को पार्टी के भीतर संभावित टूट से जोड़कर देखा जा रहा है।

भोज से नदारद रहे तीन विधायक

सूत्रों के अनुसार, बुधवार को उपेंद्र कुशवाहा ने पटना स्थित अपने सरकारी आवास पर पारंपरिक लिट्टी-चोखा भोज का आयोजन किया था। इस भोज में पार्टी के कई नेताओं और समर्थकों को आमंत्रित किया गया था, लेकिन रालोमो के तीन विधायक—माधव आनंद, रामेश्वर महतो और आलोक सिंह—इस कार्यक्रम में शामिल नहीं हुए।

इन विधायकों की अनुपस्थिति ने सियासी चर्चाओं को और तेज कर दिया, क्योंकि उसी दौरान इनके दिल्ली में होने की खबर सामने आई।

दिल्ली में BJP नेता से मुलाकात

जानकारी के मुताबिक, भोज में शामिल न होने वाले तीनों विधायक दिल्ली पहुंचे, जहां उन्होंने भाजपा के राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष नितिन नवीन से मुलाकात की। इस मुलाकात के बाद राजनीतिक गलियारों में कई तरह के कयास लगाए जा रहे हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि विधायकों की यह मुलाकात केवल शिष्टाचार नहीं, बल्कि इसके पीछे कोई बड़ा राजनीतिक संदेश छिपा हो सकता है।

पार्टी में बढ़ती नाराजगी की चर्चा

सूत्रों का कहना है कि रालोमो के भीतर असंतोष की स्थिति काफी समय से बनी हुई है। खासतौर पर तब से, जब उपेंद्र कुशवाहा ने अपने बेटे दीपक प्रकाश को मंत्री बनाए जाने का फैसला लिया।
बताया जा रहा है कि दीपक प्रकाश न तो विधानसभा के सदस्य हैं और न ही विधान परिषद के, इसके बावजूद उन्हें मंत्री बनाए जाने से पार्टी के कई नेताओं और विधायकों में नाराजगी है।

टूट की ओर बढ़ रही है रालोमो?

राजनीतिक जानकारों का मानना है कि विधायकों की भोज से दूरी और भाजपा नेताओं से मुलाकात, दोनों घटनाएं आपस में जुड़ी हो सकती हैं। इसे रालोमो के भीतर चल रहे असंतोष और संभावित टूट के संकेत के रूप में देखा जा रहा है।
हालांकि, इस पूरे मामले पर अभी तक उपेंद्र कुशवाहा या संबंधित विधायकों की ओर से कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है।

आगे की राजनीति पर नजर

अब सबकी नजर इस बात पर टिकी है कि आने वाले दिनों में रालोमो की सियासत किस दिशा में जाती है। क्या यह केवल अंदरूनी नाराजगी है या फिर बिहार की राजनीति में कोई बड़ा फेरबदल होने वाला है—यह आने वाला वक्त ही बताएगा।

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