
पटना | 20 मार्च 2026: बिहार की राजनीति में इफ्तार पार्टी के बीच एक बड़ा सियासी बयान सामने आया है, जिसने नए समीकरणों को जन्म दे दिया है। केंद्रीय मंत्री और हिन्दुस्तानी आवाम मोर्चा (HAM) के संरक्षक ने संकेत दिया है कि भाजपा नेता भविष्य में बिहार के मुख्यमंत्री बन सकते हैं।
इफ्तार पार्टी बनी सियासी मंच
पटना में आयोजित इफ्तार पार्टी में , उनके बेटे और NDA के कई वरिष्ठ नेता शामिल हुए। इसी दौरान मांझी के बयान ने सियासी गलियारों में हलचल मचा दी।
मांझी ने कहा कि उन्हें ऐसा लगता है कि मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की पसंद के नेता सम्राट चौधरी हो सकते हैं, जिन्हें भविष्य में बड़ी जिम्मेदारी दी जा सकती है।
“नीतीश जो सोचते हैं, वही करते हैं”
मांझी ने अपने बयान में कहा कि नीतीश कुमार एक पारदर्शी नेता हैं और जो उनके मन में होता है, वही वे करते हैं। हालांकि वे अपने फैसलों को सार्वजनिक रूप से पहले नहीं बताते, लेकिन उनके संकेतों को समझा जा सकता है।
उन्होंने कहा कि अगर नीतीश कुमार किसी को आगे बढ़ाने का इशारा कर रहे हैं, तो यह मानना गलत नहीं होगा कि भविष्य में वही नेता अहम भूमिका निभाएगा।
निशांत कुमार को लेकर भी टिप्पणी
इफ्तार में मौजूद निशांत कुमार को लेकर भी मांझी ने सकारात्मक टिप्पणी की। उन्होंने कहा कि निशांत शांत स्वभाव के हैं, सभी का सम्मान करते हैं और राजनीति में आगे बढ़ने के लिए यह गुण बेहद जरूरी है।
मांझी के अनुसार, अगर उन्हें भविष्य में कोई जिम्मेदारी दी जाती है, तो वे उसे अच्छे तरीके से निभा सकते हैं।
इफ्तार की परंपरा पर भी बोले मांझी
मीडिया के सवालों का जवाब देते हुए मांझी ने कहा कि वे पिछले कई वर्षों से इफ्तार पार्टी का आयोजन करते आ रहे हैं और यह एक सामाजिक व धार्मिक परंपरा का हिस्सा है।
उन्होंने कहा कि इस तरह के आयोजनों में सभी दलों के लोग शामिल होते हैं और देश-प्रदेश की सुख-शांति के लिए दुआ करते हैं।
लालू यादव के इफ्तार पर टिप्पणी से बचाव
जब उनसे पूछा गया कि इस बार की ओर से इफ्तार पार्टी क्यों नहीं हुई, तो मांझी ने इस पर सीधा जवाब देने से परहेज किया। उन्होंने कहा कि यह उनका व्यक्तिगत निर्णय है और वे इस पर टिप्पणी नहीं करना चाहते।
क्या बदलेंगे सियासी समीकरण?
मांझी के इस बयान के बाद बिहार की राजनीति में नए कयास लगाए जा रहे हैं। हालांकि अभी तक NDA या भाजपा की ओर से इस पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है।
निष्कर्ष
इफ्तार पार्टी के मंच से आया यह बयान सिर्फ एक राजनीतिक टिप्पणी नहीं, बल्कि आने वाले समय के संभावित बदलावों का संकेत भी माना जा रहा है। अब देखना होगा कि यह चर्चा महज बयानबाजी तक सीमित रहती है या बिहार की राजनीति में कोई बड़ा मोड़ लाती है।


