बिहार में VIDEO पर सियासी संग्राम: FIR की मांग, पुलिस जांच शुरू, AI एंगल भी चर्चा में

पटना/आरा: बिहार की राजनीति में एक कथित वीडियो को लेकर नया विवाद गहरा गया है। केंद्रीय मंत्री के सलाहकार दानिश रिजवान से जुड़े इस मामले ने अब कानूनी मोड़ ले लिया है। वीडियो के वायरल होते ही सत्ता पक्ष और विपक्ष आमने-सामने आ गए हैं, और आरोप-प्रत्यारोप का दौर तेज हो गया है।

तेजस्वी यादव और मल्लिकार्जुन खरगे के खिलाफ FIR की मांग

दानिश रिजवान ने राजद नेता और कांग्रेस अध्यक्ष के खिलाफ भोजपुर जिले के साइबर थाने में FIR दर्ज करने के लिए आवेदन दिया है।

बताया जा रहा है कि विवाद की शुरुआत तब हुई जब राष्ट्रीय जनता दल (RJD) के आधिकारिक X (पूर्व ट्विटर) अकाउंट से एक वीडियो साझा किया गया। इस वीडियो में दानिश रिजवान कथित रूप से हवाई फायरिंग करते नजर आ रहे हैं। वीडियो के साथ RJD ने बिहार की कानून-व्यवस्था पर सवाल उठाते हुए NDA सरकार को निशाने पर लिया।

दानिश रिजवान का दावा— “वीडियो फर्जी, AI से छेड़छाड़”

वीडियो वायरल होने के बाद दानिश रिजवान ने इसे पूरी तरह फर्जी बताया है। उनका कहना है कि यह उनका कई साल पुराना वीडियो है, जिसे आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) की मदद से एडिट कर भ्रामक तरीके से पेश किया गया है।

उन्होंने आरोप लगाया कि यह एक सुनियोजित साजिश है, जिसका मकसद उनकी छवि को नुकसान पहुंचाना है। रिजवान ने दोषियों की पहचान कर सख्त कार्रवाई की मांग की है।

पुलिस एक्शन में— SDPO को सौंपी गई जांच

मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस ने जांच शुरू कर दी है। इस पूरे प्रकरण की जांच आरा सदर के SDPO को सौंपी गई है।

पुलिस यह पता लगाने में जुटी है कि—

  • वीडियो असली है या एडिटेड
  • अगर एडिटेड है, तो किसने और कैसे तैयार किया
  • सोशल मीडिया पर इसे वायरल करने के पीछे क्या मकसद था

साइबर विशेषज्ञों की भी मदद ली जा सकती है, ताकि वीडियो की तकनीकी जांच की जा सके।

राजनीतिक बयानबाजी तेज

इस मुद्दे को लेकर बिहार की राजनीति गरमा गई है। विपक्ष जहां इसे कानून-व्यवस्था से जोड़कर सरकार पर हमला कर रहा है, वहीं सत्ता पक्ष इसे साजिश और फर्जीवाड़ा करार दे रहा है।

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि सोशल मीडिया और AI तकनीक के बढ़ते उपयोग के बीच ऐसे मामलों में सच्चाई तक पहुंचना बड़ी चुनौती बनती जा रही है।

AI और फेक कंटेंट— बढ़ती चुनौती

यह मामला एक बार फिर इस बात की ओर इशारा करता है कि डिजिटल दौर में वीडियो और तस्वीरों की प्रामाणिकता पर सवाल खड़े हो सकते हैं। AI आधारित एडिटिंग टूल्स के जरिए किसी भी कंटेंट को बदलना अब पहले से कहीं ज्यादा आसान हो गया है, जिससे राजनीतिक और सामाजिक विवाद तेजी से बढ़ सकते हैं।

फिलहाल, सभी की नजर पुलिस जांच पर टिकी है। जांच रिपोर्ट आने के बाद ही साफ हो पाएगा कि वीडियो असली है या साजिश का हिस्सा।

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