बिहार की राजनीति में नए मुख्यमंत्री को लेकर चर्चाएं तेज हो गई हैं। इसी बीच राजधानी में आयोजित एक इफ्तार पार्टी ने सियासी माहौल को और गरमा दिया। इस कार्यक्रम में केंद्रीय मंत्री ने उपमुख्यमंत्री का साफा पहनाकर स्वागत किया और बड़ा बयान देते हुए कहा कि बिहार का अगला मुख्यमंत्री भारतीय जनता पार्टी से होना चाहिए।
इफ्तार पार्टी में दिखी NDA की एकजुटता
लोक जनशक्ति पार्टी (राम विलास) द्वारा आयोजित इस इफ्तार पार्टी में मुख्यमंत्री , जदयू नेता समेत कई बड़े नेता मौजूद रहे। कार्यक्रम में नेताओं के बीच मेल-मिलाप और राजनीतिक बातचीत ने आगामी सत्ता समीकरणों के संकेत दिए।
“मैं सीएम की रेस में नहीं हूं” — चिराग पासवान
सीएम पद को लेकर चल रही चर्चाओं के बीच चिराग पासवान ने खुद को इस दौड़ से अलग बताया। उन्होंने कहा कि केंद्र में उन्हें जो जिम्मेदारी मिली है, वही उनकी प्राथमिकता है।
उन्होंने साफ कहा कि वे अपने कार्यकर्ताओं की भावनाओं का सम्मान करते हैं, लेकिन फिलहाल उनका फोकस केंद्र सरकार में अपनी भूमिका निभाने पर है।
बीजेपी से ही होगा अगला मुख्यमंत्री?
चिराग पासवान ने स्पष्ट संकेत दिया कि बिहार में अगला मुख्यमंत्री बीजेपी से होना चाहिए। हालांकि उन्होंने यह भी कहा कि इस पर अंतिम निर्णय गठबंधन स्तर पर लिया जाएगा और जल्द ही नाम का औपचारिक ऐलान हो सकता है।
उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री के नाम पर काफी हद तक सहमति बन चुकी है और अब केवल औपचारिकताएं बाकी हैं।
नीतीश कुमार के लिए दी शुभकामनाएं
चिराग पासवान ने मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के संभावित केंद्रीय राजनीति में जाने को लेकर उन्हें शुभकामनाएं दीं। उन्होंने कहा कि नीतीश कुमार एक नई पारी की शुरुआत कर रहे हैं और यह उनके राजनीतिक सफर का नया अध्याय होगा।
विपक्ष पर भी साधा निशाना
राज्यसभा चुनाव के नतीजों का जिक्र करते हुए चिराग पासवान ने विपक्षी महागठबंधन पर भी हमला बोला। उन्होंने कहा कि चुनाव के दौरान विपक्ष में बिखराव साफ दिखा, जहां कई विधायक मतदान में शामिल नहीं हुए।
उनके मुताबिक, जो खुद एकजुट नहीं हैं, वे दूसरों पर सवाल नहीं उठा सकते।
जल्द हो सकता है बड़े फैसले का ऐलान
बिहार की सियासत इस समय निर्णायक मोड़ पर खड़ी है। नए मुख्यमंत्री को लेकर अटकलें तेज हैं और एनडीए के भीतर मंथन जारी है।
ऐसे में चिराग पासवान के बयान को एक बड़े राजनीतिक संकेत के रूप में देखा जा रहा है। अब सबकी नजर इस बात पर टिकी है कि आखिर बिहार की कमान किसके हाथों में सौंपी जाती है।


