
लोकसभा में महिला आरक्षण बिल को लेकर राजनीतिक तापमान लगातार बढ़ता जा रहा है। एक तरफ भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) कांग्रेस और विपक्ष पर महिला विरोधी होने का आरोप लगा रही है, वहीं विपक्ष का कहना है कि सत्ताधारी दल इस बिल के जरिए राजनीतिक लाभ लेने की कोशिश कर रहा है।
राजद नेता तेजस्वी यादव ने इस मुद्दे पर बड़ा बयान देते हुए कहा कि उनकी पार्टी महिलाओं को 33 प्रतिशत नहीं बल्कि 50 प्रतिशत आरक्षण देने की पक्षधर है। उन्होंने स्पष्ट किया कि महिला आरक्षण का वे विरोध नहीं कर रहे, बल्कि इसे और व्यापक और न्यायसंगत बनाने की मांग कर रहे हैं।
पटना में मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी की प्रेस वार्ता पर प्रतिक्रिया देते हुए तेजस्वी यादव ने तीखा हमला बोला और कहा कि मुख्यमंत्री बनने के बावजूद उन्हें इस बिल की पूरी समझ नहीं है। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार महिला आरक्षण के नाम पर राजनीतिक रणनीति के तहत काम कर रही है।
तेजस्वी यादव ने यह भी सवाल उठाया कि यदि महिला आरक्षण बिल तीन साल पहले ही पारित हो चुका था तो उसे राष्ट्रपति की मंजूरी क्यों नहीं मिली और इसे लंबे समय तक लंबित क्यों रखा गया। उन्होंने कहा कि राज्य की नीतियों में दिल्ली का प्रभाव बढ़ता जा रहा है और फैसले वहीं से नियंत्रित हो रहे हैं।
उन्होंने आगे कहा कि उनकी पार्टी ने हमेशा महिलाओं को अधिक टिकट देकर राजनीतिक भागीदारी बढ़ाने का प्रयास किया है। साथ ही उन्होंने यह मांग भी रखी कि महिला आरक्षण के भीतर ओबीसी और ग्रामीण महिलाओं के लिए अलग से आरक्षण का प्रावधान होना चाहिए, ताकि हर वर्ग की महिलाओं को समान अवसर मिल सके।
तेजस्वी यादव ने दावा किया कि आगामी फ्लोर टेस्ट केवल एक औपचारिक प्रक्रिया है क्योंकि सरकार के पास पहले से ही पर्याप्त संख्या बल मौजूद है।


