
पुलिस मुख्यालय में आयोजित कार्यशाला में अधिकारियों को दिए निर्देश, 2025 में मानव तस्करी व बाल श्रम से जुड़े 506 मामले दर्ज
पटना: मानव तस्करी, अनैतिक देह व्यापार और बाल श्रम जैसे गंभीर अपराधों से जुड़े मामलों में पुलिसकर्मियों को अधिक संवेदनशीलता के साथ कार्रवाई करने की आवश्यकता है। यह बात बिहार के पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) विनय कुमार ने पुलिस मुख्यालय स्थित सरदार पटेल भवन में आयोजित एक कार्यशाला को संबोधित करते हुए कही।
यह कार्यशाला पुलिस मुख्यालय के कमजोर वर्ग प्रभाग के अंतर्गत मानव व्यापार निरोध इकाई (AHTU) द्वारा आयोजित की गई थी। इसका उद्देश्य पुलिस अधिकारियों और कर्मियों को मानव तस्करी से जुड़े मामलों की गंभीरता और उनसे निपटने के तरीकों के बारे में जागरूक करना था।
गुमशुदा बच्चों के मामलों में तुरंत कार्रवाई जरूरी
कार्यशाला का उद्घाटन करते हुए डीजीपी ने कहा कि यदि कोई बच्चा गायब हो जाता है और लंबे समय तक उसका पता नहीं चल पाता है, तो ऐसे मामलों की जांच और भी जटिल हो जाती है। उन्होंने पुलिस अधिकारियों से कहा कि गुमशुदा बच्चों के मामलों को अत्यंत संवेदनशीलता के साथ लिया जाए और जल्द से जल्द उनकी तलाश की जाए।
उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि ऐसे मामलों को इस तरह समझना चाहिए जैसे किसी का अपना बच्चा गायब हो गया हो। उसी संवेदनशीलता और तत्परता के साथ पुलिस को कार्रवाई करनी चाहिए।
2025 में दर्ज हुए 506 मामले
डीजीपी ने बताया कि वर्ष 2025 के दौरान राज्य में मानव तस्करी, अनैतिक देह व्यापार और बाल श्रम से जुड़े कुल 506 मामले दर्ज किए गए। इन मामलों में कार्रवाई करते हुए 1487 पीड़ितों को शोषण से मुक्त कराया गया और 437 मानव तस्करों को गिरफ्तार किया गया।
उन्होंने कहा कि यह आंकड़े बताते हैं कि ऐसे मामलों में लगातार कार्रवाई की जा रही है, लेकिन पुलिस को और अधिक सक्रियता और संवेदनशीलता के साथ काम करने की जरूरत है।
सभी जिलों और हवाई अड्डों में गठित है इकाई
डीजीपी ने बताया कि मानव तस्करी से जुड़े मामलों से प्रभावी ढंग से निपटने के लिए राज्य के सभी 44 जिलों, जिनमें रेलवे जिले भी शामिल हैं, में जिलास्तरीय मानव व्यापार निरोध इकाई (DL-AHTU) का गठन किया गया है।
इसके अलावा पटना, गया और दरभंगा के तीन हवाई अड्डों पर भी ऐसी इकाइयां बनाई गई हैं। पूर्णिया हवाई अड्डे पर भी इस इकाई के गठन की प्रक्रिया जारी है।
उन्होंने कहा कि इन इकाइयों में पर्याप्त मानव संसाधन उपलब्ध हैं और इन्हें प्रभावी तरीके से काम करने की जरूरत है।
मानक कार्य प्रणाली और दिशा-निर्देश जारी
डीजीपी ने बताया कि मानव तस्करी से जुड़े मामलों में जिला पुलिस के मार्गदर्शन के लिए दो मानक कार्य प्रणाली (SOP) तय की गई हैं। इसके साथ ही मानव व्यापार निरोध इकाई के प्रभारी अधिकारियों के कर्तव्यों और जिम्मेदारियों को भी स्पष्ट किया गया है।
लापता और गुमशुदा बच्चों के मामलों के समाधान के लिए भी विस्तृत दिशा-निर्देश जारी किए गए हैं, जिनका पालन करते हुए मामलों का जल्द से जल्द निपटारा करने पर जोर दिया गया है।
‘ऑपरेशन नया सवेरा 2.0’ चलाया जाएगा
कार्यशाला के दौरान डीजीपी ने यह भी घोषणा की कि मानव तस्करी और बाल श्रम के खिलाफ राज्यभर में 1 अप्रैल से 20 अप्रैल तक “ऑपरेशन नया सवेरा 2.0” चलाया जाएगा।
इस अभियान के तहत विभिन्न एजेंसियों के समन्वय से मानव तस्करी और अनैतिक देह व्यापार के खिलाफ विशेष कार्रवाई की जाएगी।
विशेषज्ञों ने भी साझा किए अनुभव
कार्यशाला में मुख्य वक्ता के रूप में राष्ट्रीय आपदा प्रतिक्रिया बल (NDRF) के सेवानिवृत्त महानिदेशक डॉ. पी.एम. नायर ने मानव तस्करी और बंधुआ मजदूरी से जुड़े विभिन्न पहलुओं पर विस्तार से जानकारी दी।
इस अवसर पर एडीजी (कमजोर वर्ग) डॉ. अमित कुमार जैन समेत कई वरिष्ठ पुलिस अधिकारी भी मौजूद रहे। अधिकारियों ने इस बात पर जोर दिया कि मानव तस्करी जैसे अपराधों के उन्मूलन के लिए पुलिस, प्रशासन और अन्य एजेंसियों को मिलकर काम करना होगा।


