सीआईडी की पहल पर बदलेगा अनुसंधान का चेहरा, एफएसएल वैन की संख्या भी बढ़ेगी
पटना, 24 जुलाई।भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) के लागू होने के बाद पुलिस अनुसंधान पद्धतियों में बड़ा बदलाव लाया जा रहा है। अब पुलिस अधिकारी अपराध अनुसंधान के नई विधियों और डिजिटल तकनीकों में दक्ष बनाए जा रहे हैं। सीआईडी द्वारा संचालित विशेष प्रशिक्षण केंद्रों में अब तक 3,137 पुलिस अधिकारियों को प्रशिक्षण दिया जा चुका है।
सीआईडी की पहल, 174 बैच को मिल चुका है प्रशिक्षण
एडीजी (सीआईडी) पारसनाथ ने गुरुवार को सरदार पटेल भवन स्थित पुलिस मुख्यालय में प्रेस वार्ता में बताया कि:
- अब तक 174 बैच में 3,137 अधिकारी प्रशिक्षण प्राप्त कर चुके हैं।
- 8 से 21 जुलाई के बीच 350 पदाधिकारियों को प्रशिक्षित किया गया, जिनमें डीएसपी, इंस्पेक्टर और दारोगा स्तर के अधिकारी शामिल हैं।
- प्रशिक्षण में वीडियोग्राफी, फोटोग्राफी, मोबाइल व लैपटॉप से डेटा रिकवरी, और सीसीटीवी विश्लेषण जैसी तकनीकों को शामिल किया गया है।
- प्रशिक्षण सामग्रियों को समय-समय पर अपग्रेड किया जा रहा है।
प्रशिक्षण में शामिल होंगे राष्ट्रीय एजेंसियों के विशेषज्ञ
डीआईजी (सीआईडी) जयंतकांत ने जानकारी दी कि:
- प्रशिक्षण में सीबीआई, एनआईए और I4C जैसी राष्ट्रीय एजेंसियों के विशेषज्ञों को भी आमंत्रित किया जा रहा है।
- नए प्रावधान के अनुसार, ई-साक्ष्य ऐप पर हर केस से जुड़े डिजिटल साक्ष्य अपलोड करना अनिवार्य कर दिया गया है, जिससे साक्ष्य में छेड़छाड़ असंभव हो जाए।
एफएसएल वैन की संख्या होगी दोगुनी, नया रोस्टर भेजा गया
एडीजी पारसनाथ ने बताया कि फॉरेंसिक साइंस लैब (एफएसएल) को और अधिक सशक्त बनाने के लिए कई कदम उठाए जा रहे हैं:
- वर्तमान में 17 एफएसएल मोबाइल वैन हैं।
- जल्द ही 34 नई मोबाइल वैन की खरीद की जाएगी। इसके लिए सैंपल टेस्ट किया जा चुका है।
- इससे घटनास्थल पर ही साक्ष्य संग्रहण और विश्लेषण की सुविधा उपलब्ध हो सकेगी।
191 पदों पर अस्थायी बहाली की तैयारी
- राजगीर में क्षेत्रीय एफएसएल लैब शुरू हो चुका है।
- पूर्णिया में नया लैब निर्माण कार्य लगभग पूर्ण है।
- सभी एफएसएल के लिए 191 पदों पर अस्थायी बहाली की प्रक्रिया जल्द शुरू होगी।
- गृह विभाग को नया रोस्टर और नियमावली भेज दी गई है।
- सहायक निदेशक और वरीय सहायक वैज्ञानिक के पदों पर भर्ती की जाएगी।
- बहाली प्रक्रिया में पारदर्शिता के लिए एक विशेष मोबाइल एप भी तैयार किया जा रहा है।
भारतीय न्याय संहिता के नए प्रावधानों को ज़मीन पर लागू करने की दिशा में बिहार पुलिस तेजी से कदम बढ़ा रही है। अनुसंधान की गुणवत्ता में सुधार, तकनीकी दक्षता और डिजिटल पारदर्शिता के ये प्रयास भविष्य में पुलिसिंग को अधिक वैज्ञानिक और विश्वसनीय बनाएंगे।

