नई दिल्ली: मिडिल ईस्ट में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव और वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति पर पड़ने वाले संभावित असर के बीच केंद्र सरकार ने गैस वितरण व्यवस्था को लेकर बड़ा फैसला लिया है। पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय ने निर्देश जारी करते हुए कहा है कि जिन उपभोक्ताओं के घरों में पाइप्ड नेचुरल गैस (PNG) कनेक्शन उपलब्ध है, वे अब घरेलू एलपीजी (LPG) सिलेंडर नहीं रख सकेंगे। ऐसे उपभोक्ताओं को अपना एलपीजी कनेक्शन सरेंडर करना होगा।
सरकार का कहना है कि इस कदम का उद्देश्य गैस वितरण प्रणाली को अधिक संतुलित और पारदर्शी बनाना है, ताकि जरूरतमंद उपभोक्ताओं तक एलपीजी की आपूर्ति प्रभावित न हो।
दोनों कनेक्शन साथ रखने पर लगेगी रोक
पेट्रोलियम मंत्रालय के मुताबिक कई शहरों में ऐसे मामले सामने आए हैं, जहां लोगों के घरों में पहले से पाइप्ड गैस कनेक्शन होने के बावजूद वे एलपीजी सिलेंडर का उपयोग कर रहे हैं। इससे गैस वितरण व्यवस्था पर अतिरिक्त दबाव पड़ता है और जरूरतमंद उपभोक्ताओं तक सिलेंडर की आपूर्ति प्रभावित होती है।
इसी को ध्यान में रखते हुए सरकार ने स्पष्ट किया है कि जिन घरों में PNG कनेक्शन सक्रिय है, वहां एलपीजी कनेक्शन जारी नहीं रखा जाएगा। ऐसे उपभोक्ताओं को जल्द से जल्द अपना एलपीजी कनेक्शन सरेंडर करना होगा। यदि कोई उपभोक्ता ऐसा नहीं करता है, तो भविष्य में उसे सिलेंडर की रिफिल सेवा नहीं दी जाएगी।
मिडिल ईस्ट तनाव का असर
विशेषज्ञों के अनुसार मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव, खासकर ईरान और इजरायल के बीच हालात बिगड़ने की आशंका का असर वैश्विक ऊर्जा बाजार पर पड़ सकता है। होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) के जरिए बड़ी मात्रा में तेल और गैस की आपूर्ति होती है। यदि वहां किसी तरह का व्यवधान आता है, तो अंतरराष्ट्रीय बाजार में ऊर्जा आपूर्ति प्रभावित हो सकती है।
भारत अपनी घरेलू जरूरतों का बड़ा हिस्सा आयातित एलपीजी से पूरा करता है। ऐसे में सरकार पहले से ही एहतियाती कदम उठा रही है, ताकि देश में गैस की उपलब्धता प्रभावित न हो।
कुछ शहरों में बढ़ी मांग
हाल के दिनों में दिल्ली, मुंबई समेत कुछ बड़े शहरों में गैस सिलेंडर की मांग बढ़ने और लंबी कतारों की खबरें सामने आई हैं। वहीं कई छोटे होटल और रेस्टोरेंट भी गैस आपूर्ति में देरी की शिकायत कर रहे हैं।
हालांकि सरकार का कहना है कि फिलहाल घरेलू उपभोक्ताओं के लिए पर्याप्त गैस उपलब्ध है और घबराने की कोई जरूरत नहीं है।
सरकार ने बढ़ाई निगरानी
पेट्रोलियम मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने भरोसा दिलाया है कि सरकार स्थिति पर लगातार नजर बनाए हुए है। उन्होंने बताया कि देश में उपलब्ध गैस स्टॉक की नियमित निगरानी की जा रही है और जरूरत पड़ने पर वैकल्पिक स्रोतों से आयात बढ़ाने की तैयारी भी की जा रही है।
मंत्री के अनुसार फिलहाल उद्योगों को भी लगभग 70 से 80 प्रतिशत गैस की आपूर्ति दी जा रही है, जबकि घरेलू उपभोक्ताओं की जरूरतों को पूरी तरह सुरक्षित रखा गया है।
गैस आपूर्ति सुधारने के लिए कई कदम
सरकार ने संभावित संकट से निपटने के लिए कई महत्वपूर्ण कदम उठाए हैं। इनमें रिफाइनरियों में एलपीजी उत्पादन बढ़ाना, गैस बुकिंग और वितरण प्रणाली को मजबूत करना और कालाबाजारी तथा जमाखोरी के खिलाफ सख्त कार्रवाई शामिल है।
इसके अलावा ‘प्राकृतिक गैस आपूर्ति विनियमन आदेश 2026’ लागू किया गया है, जिससे गैस कंपनियों और रिफाइनरियों के बीच बेहतर समन्वय सुनिश्चित किया जा सके।
वैकल्पिक आपूर्ति पर भी काम
सरकार एलएनजी आयात बढ़ाने के लिए अल्जीरिया और ऑस्ट्रेलिया जैसे देशों के साथ बातचीत कर रही है। साथ ही गैस आपूर्ति की निगरानी के लिए तीन सदस्यीय मॉनिटरिंग पैनल भी बनाया गया है, जो देशभर में गैस की उपलब्धता और वितरण की स्थिति पर लगातार नजर रखेगा।
ग्रामीण और गरीब परिवारों की जरूरतों को देखते हुए सार्वजनिक वितरण प्रणाली (PDS) के तहत केरोसिन की आपूर्ति भी बढ़ाने की बात कही गई है। साथ ही कोयला और बायोमास जैसे वैकल्पिक ईंधन के उपयोग को बढ़ावा देने की योजना पर भी काम किया जा रहा है।
सरकार ने लोगों से अपील की है कि अफवाहों पर ध्यान न दें और जरूरत से ज्यादा गैस सिलेंडर खरीदकर जमाखोरी करने से बचें, ताकि सभी उपभोक्ताओं तक गैस की आपूर्ति सुचारु रूप से जारी रह सके।


