
नई दिल्ली में आयोजित ‘नारी शक्ति वंदन’ सम्मेलन के दौरान प्रधानमंत्री ने देश में महिला सशक्तिकरण को लेकर एक ऐतिहासिक पहल का संकेत दिया। उन्होंने कहा कि भारत 21वीं सदी के सबसे महत्वपूर्ण निर्णयों में से एक लेने जा रहा है, जो पूरी तरह नारी शक्ति को समर्पित होगा।
प्रधानमंत्री ने स्पष्ट किया कि 16, 17 और 18 अप्रैल को संसद में होने वाली विशेष चर्चा देश के लोकतांत्रिक इतिहास में एक नया अध्याय जोड़ सकती है।
महिलाओं की भागीदारी से मजबूत होगा लोकतंत्र
प्रधानमंत्री ने कहा कि दशकों से महिलाओं को संसद और विधानसभाओं में उचित प्रतिनिधित्व देने की मांग उठती रही है। अब वह समय आ गया है जब इस लंबे इंतजार को खत्म किया जाएगा।
उन्होंने जोर देकर कहा कि महिलाओं की भागीदारी बढ़ने से न केवल लोकतंत्र मजबूत होगा, बल्कि निर्णय प्रक्रिया में संवेदनशीलता और संतुलन भी आएगा।
‘नारी शक्ति वंदन अधिनियम’ को बताया ऐतिहासिक कदम
प्रधानमंत्री ने 2023 में पारित ‘नारी शक्ति वंदन अधिनियम’ का जिक्र करते हुए कहा कि यह महिलाओं को राजनीतिक रूप से सशक्त बनाने की दिशा में बड़ा कदम है।
उन्होंने कहा कि अब इसे प्रभावी रूप से लागू करने के लिए संसद में व्यापक चर्चा की जाएगी, ताकि महिलाओं को वास्तविक प्रतिनिधित्व मिल सके।
40 साल के इंतजार का अंत
उन्होंने कहा कि महिला आरक्षण को लेकर करीब चार दशकों से चर्चा चल रही है और इसमें सभी राजनीतिक दलों का योगदान रहा है।
प्रधानमंत्री ने उम्मीद जताई कि इस बार भी सभी दल मिलकर इस ऐतिहासिक निर्णय को आगे बढ़ाएंगे और संसद की गरिमा को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाएंगे।
पंचायती राज में महिलाओं की सफलता का उदाहरण
प्रधानमंत्री ने बताया कि देश में 14 लाख से अधिक महिलाएं पंचायती राज संस्थाओं में सक्रिय भूमिका निभा रही हैं।
कई राज्यों में उनकी भागीदारी 50 प्रतिशत तक पहुंच चुकी है, जो इस बात का प्रमाण है कि महिलाएं नेतृत्व करने में पूरी तरह सक्षम हैं।
महिला नेतृत्व से बदली विकास की दिशा
उन्होंने कहा कि जहां-जहां महिलाओं की भागीदारी बढ़ी है, वहां विकास कार्यों में संवेदनशीलता और गुणवत्ता भी बढ़ी है।
पानी, शिक्षा, स्वास्थ्य और पोषण जैसे क्षेत्रों में महिलाओं के नेतृत्व ने बेहतर परिणाम दिए हैं।
सरकार की योजनाओं का किया उल्लेख
प्रधानमंत्री ने अपने संबोधन में महिलाओं के लिए चलाई जा रही विभिन्न योजनाओं का भी जिक्र किया, जैसे:
- बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ
- उज्ज्वला योजना
- जन धन योजना
- मातृ वंदना योजना
- आयुष्मान भारत
उन्होंने कहा कि इन योजनाओं के जरिए महिलाओं के जीवन के हर चरण को ध्यान में रखते हुए काम किया गया है।
आर्थिक सशक्तिकरण पर जोर
प्रधानमंत्री ने कहा कि महिलाओं की आर्थिक भागीदारी बढ़ाना बेहद जरूरी है।
उन्होंने बताया कि करोड़ों महिलाओं को बैंकिंग सिस्टम से जोड़ा गया है और स्वयं सहायता समूहों के माध्यम से लाखों महिलाएं आत्मनिर्भर बन रही हैं।
सरकार का लक्ष्य ग्रामीण क्षेत्रों में ‘लखपति दीदी’ जैसे अभियान के जरिए महिलाओं को आर्थिक रूप से मजबूत बनाना है।
महिला सुरक्षा को लेकर भी उठाए कदम
उन्होंने महिला सुरक्षा को लेकर किए गए कानूनी सुधारों का भी उल्लेख किया।
तेज न्याय प्रक्रिया, फास्ट ट्रैक कोर्ट और ई-एफआईआर जैसी सुविधाओं को महिलाओं के लिए महत्वपूर्ण कदम बताया गया।
महिलाओं से की खास अपील
प्रधानमंत्री ने देश की महिलाओं से अपील की कि वे इस प्रक्रिया में सक्रिय भूमिका निभाएं और अपने जनप्रतिनिधियों से संवाद करें।
उन्होंने कहा कि यह केवल कानून का विषय नहीं, बल्कि देश के भविष्य को आकार देने का अवसर है।
प्रधानमंत्री का यह संबोधन साफ संकेत देता है कि आने वाले दिन देश के राजनीतिक इतिहास के लिए बेहद अहम होने वाले हैं।
‘नारी शक्ति वंदन’ के जरिए महिलाओं को निर्णय प्रक्रिया में अधिक भागीदारी देने की दिशा में बड़ा कदम उठाया जा सकता है, जो भारत के लोकतंत्र को नई मजबूती देगा।


