भागलपुर में ‘दाखिल-खारिज’ में खेल करना पड़ा भारी: शाहकुंड CO के वेतन पर रोक; DM ने 24 घंटे में मांगा जवाब

  • डीएम का एक्शन: शाहकुंड अंचलाधिकारी (CO) डॉ. हर्षा कोमल के वेतन भुगतान पर तत्काल प्रभाव से रोक; दाखिल-खारिज में गड़बड़ी और मनमानी का आरोप।
  • नियमों की अनदेखी: बिना पक्षकारों को सुने और आपत्ति का निपटारा किए बिना ही कर दिया म्यूटेशन; बिहार दाखिल-खारिज अधिनियम के उल्लंघन का मामला।
  • 24 घंटे का अल्टीमेटम: डीएम ने पूछा- ‘किन परिस्थितियों में हुआ ऐसा?’; जवाब संतोषजनक नहीं होने तक वेतन रहेगा स्थगित।

द वॉयस ऑफ बिहार (भागलपुर)

​भागलपुर (Bhagalpur) जिला प्रशासन ने काम में लापरवाही और नियमों की अनदेखी करने वाले अधिकारियों पर नकेल कसनी शुरू कर दी है। इसी क्रम में डीएम ने शाहकुंड प्रखंड (Shahkund Block) की अंचलाधिकारी (CO) डॉ. हर्षा कोमल (Dr. Harsha Komal) के वेतन पर तत्काल प्रभाव से रोक लगा दी है।

क्या है पूरा मामला?

​यह कार्रवाई एक दाखिल-खारिज (Mutation) वाद संख्या 166/2024-25 में की गई अनियमितता को लेकर हुई है।

  • शिकायत: मामला सजौर थाना क्षेत्र के दरियापुर रामपुर डीह निवासी अधिवक्ता रजनीकांत मिश्र के दाखिल-खारिज आवेदन से जुड़ा है।
  • आरोप: सीओ पर आरोप है कि उन्होंने इस मामले में संबंधित पक्षों को नोटिस दिए बिना, प्राप्त आपत्ति का निष्पादन किए बिना और सभी हिस्सेदारों (फरिकेन) की सहमति लिए बिना ही दाखिल-खारिज आदेश पारित कर दिया। यह बिहार दाखिल-खारिज अधिनियम, 2011 (Bihar Mutation Act, 2011) के प्रावधानों का सीधा उल्लंघन है।

जवाब नहीं देने पर गिरी गाज

​डीएम ने इस मामले को गंभीरता से लेते हुए सीओ से 24 घंटे के भीतर स्पष्टीकरण मांगा है।

  • अल्टीमेटम: डीएम ने पूछा है कि आखिर किन परिस्थितियों में नियमों को ताक पर रखकर यह आदेश पारित किया गया?
  • लापरवाही: गौरतलब है कि इस मामले में पहले भी स्पष्टीकरण की मांग की गई थी, लेकिन सीओ की ओर से कोई जवाब नहीं दिया गया। इसी के बाद डीएम ने सख्त रुख अपनाते हुए वेतन रोकने का आदेश जारी किया है। जब तक स्पष्टीकरण स्वीकृत नहीं हो जाता, वेतन स्थगित रहेगा।

जमीन विवाद बिहार की बड़ी समस्या है, ऐसे में अधिकारियों की जवाबदेही तय होनी ही चाहिए।

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