बेतिया | जन सुराज अभियान के तहत पश्चिम चंपारण पहुंचे प्रशांत किशोर ने मंगलवार (10 फरवरी 2026) को मझौलिया चीनी मिल और प्रशासन की कार्यशैली पर जमकर क्लास लगाई। इसके साथ ही उन्होंने अपनी याचिका खारिज होने पर न्यायपालिका की टिप्पणी को ‘अन्यायपूर्ण’ बताया।
1. चीनी मिल का गंदा पानी बना ‘काल’, प्रशासन बेखबर
प्रशांत किशोर ने मझौलिया में स्थानीय लोगों से मुलाकात की, जहां ग्रामीणों ने उन्हें अपना दर्द बताया।
- बीमारी का घर: PK ने कहा कि मझौलिया चीनी मिल का दूषित और केमिकल युक्त पानी खुले में छोड़ा जा रहा है। इससे आसपास के गांवों में गंभीर बीमारियां फैल रही हैं।
- लापरवाही: उन्होंने कहा, “लोग बीमार पड़ रहे हैं, लेकिन प्रशासन के कान पर जूं नहीं रेंग रही। कोई सुनने को तैयार नहीं है। यह विकास नहीं, विनाश है।”
2. कोर्ट पर बड़ा बयान: “हारा हुआ प्रत्याशी क्या इंसान नहीं?”
जन सुराज की याचिका खारिज होने पर प्रशांत किशोर ने एक बड़ा और विवादास्पद बयान दिया है। उन्होंने जजों की सोच पर सवाल खड़े किए।
- तंज: PK ने कहा, “न्यायालय का काम पीड़ित की बात सुनना है। लेकिन नये भारत में न्यायाधीश कह रहे हैं कि आप चुनाव हार गए हैं, इसलिए कोर्ट मत आइए।”
- सवाल: उन्होंने पूछा कि क्या चुनाव हारने से किसी के साथ हुए अन्याय के खिलाफ बोलने का हक खत्म हो जाता है? उन्होंने इस रवैये को न्याय की मूल भावना के खिलाफ बताया।
मायने:
प्रशांत किशोर का यह बयान बताता है कि वे अब आर-पार की लड़ाई के मूड में हैं। एक तरफ वे स्थानीय मुद्दों (चीनी मिल) को उठाकर जनता से जुड़ रहे हैं, तो दूसरी तरफ संवैधानिक संस्थाओं के फैसलों पर भी बेबाक राय रख रहे हैं।


