पीरपैंती अमृत भारत स्टेशन पर विकास की ‘ऊंची छलांग’: 12 मीटर चौड़े FOB के लिए 11 गार्डर स्थापित; घंटों थमी रही ट्रेनों की रफ्तार

पीरपैंती/भागलपुर | 23 फरवरी, 2026: प्रधानमंत्री ‘अमृत भारत स्टेशन योजना’ के तहत पीरपैंती स्टेशन के कायाकल्प का काम अब अपने अंतिम चरण की ओर बढ़ रहा है। रविवार को स्टेशन पर यात्रियों की सुविधा के लिए बनाए जा रहे 12 मीटर चौड़े नए फुट ओवर ब्रिज (FOB) के लिए कुल 11 भारी-भरकम गार्डर सफलतापूर्वक चढ़ा दिए गए। हालांकि, इस निर्माण कार्य के लिए लिए गए ‘मेगा ब्लॉक’ के कारण रेल यात्रियों को भारी किल्लत का सामना करना पड़ा।

250 टन की क्रेन से चला ‘ऑपरेशन गार्डर’

​इंजीनियरिंग टीम ने इस जटिल कार्य को बेहद सटीकता के साथ अंजाम दिया।

  • तकनीकी बारीकियां: प्रत्येक गार्डर का वजन करीब 10 टन था। इन्हें ऊंचाई पर स्थापित करने के लिए 250 टन क्षमता वाली विशाल रोड क्रेन मंगवाई गई थी।
  • पिछला रिकॉर्ड: इससे पहले एफओबी-2 के लिए भी 11 गार्डर सफलतापूर्वक चढ़ाए जा चुके हैं, जिससे अब स्टेशन के दोनों छोरों को जोड़ने की प्रक्रिया तेज हो गई है।

मेगा ब्लॉक का असर: रद्द रहीं कई ट्रेनें

​निर्माण कार्य को लेकर सुबह 10:00 बजे से शाम 4:00 बजे तक ट्रेनों का परिचालन पूरी तरह बंद रखा गया, जिससे दिनभर स्टेशन पर अफरा-तफरी का माहौल रहा।

प्रभावित रेल सेवाएं:

  • रद्द ट्रेनें: डाउन लाइन पर धूलियां ट्रेन और साहेबगंज-भागलपुर पैसेंजर (अप और डाउन दोनों) पूरी तरह रद्द रहीं।
  • विलंब: गया पैसेंजर अपने निर्धारित समय से लगभग तीन घंटे की देरी से चली।
  • यात्री परेशान: अचानक ट्रेनें रद्द होने से लंबी दूरी के यात्रियों और दैनिक यात्रियों को स्टेशन पर ही घंटों इंतजार करना पड़ा।

मौके पर डटे रहे आला अधिकारी

​काम की निगरानी के लिए मालदा रेल मंडल के कई वरिष्ठ अधिकारी रविवार को पीरपैंती में ही मौजूद रहे। इनमें मुख्य रूप से शामिल थे:

  • पंकज कुमार: डिप्टी चीफ इंजीनियर।
  • सुधीर कुमार सिंह: सहायक परिचालन प्रबंधक (मालदा)।
  • रणवीर कुमार सिंह: सहायक अभियंता (गति शक्ति)।
  • रणधीर प्रसाद: वरिष्ठ अनुभाग अभियंता।

भविष्य की तस्वीर: लिफ्ट और एस्केलेटर की सौगात

​अधिकारियों ने बताया कि पीरपैंती स्टेशन को विश्वस्तरीय बनाने का काम युद्धस्तर पर जारी है। फुट ओवर ब्रिज के साथ-साथ स्टेशन पर बहुत जल्द लिफ्ट और एस्केलेटर (स्वचालित सीढ़ियां) भी लगाई जाएंगी, जिससे बुजुर्गों और दिव्यांगों को एक प्लेटफॉर्म से दूसरे प्लेटफॉर्म पर जाने में कोई कठिनाई नहीं होगी।

ब्यूरो रिपोर्ट, द वॉयस ऑफ बिहार।

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