आरा कोर्ट में पेश हुए पवन सिंह, पत्नी ज्योति सिंह अनुपस्थित; तलाक मामले में अगली तारीख तय

भोजपुरी फिल्म इंडस्ट्री के ‘पावर स्टार’ Pawan Singh बुधवार को अपनी पत्नी Jyoti Singh से जुड़े तलाक मामले की सुनवाई के लिए आरा सिविल कोर्ट स्थित कुटुंब न्यायालय पहुंचे। कड़ी सुरक्षा व्यवस्था के बीच पहुंचे अभिनेता ने न्यायाधीश के समक्ष अपना पक्ष रखा और करीब 40 मिनट तक अदालत परिसर में मौजूद रहे।

हालांकि, पिछली सुनवाई की तरह इस बार भी दोनों पक्ष आमने-सामने नहीं आ सके। सुनवाई के दौरान ज्योति सिंह अदालत में उपस्थित नहीं रहीं। कोर्ट परिसर से बाहर निकलते समय पवन सिंह ने मीडिया से दूरी बनाए रखी और बिना कोई बयान दिए हाथ जोड़कर वहां से रवाना हो गए।

सुनवाई से पहले मंदिर में पूजा

अदालत की कार्यवाही से पहले पवन सिंह ने महुली गांव स्थित Hanumangarhi Temple Mahuli में दर्शन कर बजरंगबली का आशीर्वाद लिया। उल्लेखनीय है कि पिछली सुनवाई में जहां ज्योति सिंह कोर्ट पहुंची थीं, वहीं पवन सिंह ने स्वास्थ्य कारणों का हवाला देते हुए अनुपस्थिति जताई थी। इस बार स्थिति उलट रही।

कोर्ट का सख्त रुख

पति-पत्नी के बार-बार एक साथ कोर्ट में उपस्थित न होने पर न्यायालय ने नाराजगी जताई है। अब अगली सुनवाई में दोनों पक्षों को अनिवार्य रूप से एक साथ पेश होने का निर्देश दिया गया है।

गुजारा भत्ता पर बड़ा दावा

ज्योति सिंह के अधिवक्ता Vishnudhar Pandey ने मीडिया से बातचीत में बताया कि समझौते की शर्तें स्पष्ट हैं। उनके अनुसार, यदि पवन सिंह अपनी पत्नी के साथ नहीं रहना चाहते हैं, तो उन्हें ₹10 करोड़ की गुजारा भत्ता राशि और एक मकान देना होगा। साथ ही, अंतिम फैसला आने तक ज्योति सिंह के मासिक खर्च का वहन भी पवन सिंह को करना होगा।

लंबे समय से विवाद में है रिश्ता

पवन सिंह और ज्योति सिंह की शादी 6 मार्च 2018 को उत्तर प्रदेश के बलिया में धूमधाम से हुई थी। लेकिन शादी के कुछ ही महीनों बाद दोनों के रिश्तों में दरार आ गई और मामला कोर्ट तक पहुंच गया। ज्योति सिंह पहले भी पवन सिंह पर कई गंभीर आरोप लगा चुकी हैं, जिसके चलते यह हाई-प्रोफाइल मामला लगातार चर्चा में बना हुआ है।

आगे क्या?

फिलहाल, इस केस की अगली सुनवाई पर सभी की नजरें टिकी हैं। देखना होगा कि क्या अगली तारीख पर दोनों पक्ष एक साथ कोर्ट में पेश होते हैं या फिर सुनवाई टलती रहती है। यदि समझौता नहीं होता है, तो आने वाले समय में भरण-पोषण को लेकर कानूनी लड़ाई और तेज हो सकती है।


 

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