
मुख्य बिंदु:
- पीड़ित: जयमंगल देव, विभागाध्यक्ष (मनोविज्ञान), कॉलेज ऑफ कॉमर्स, पटना।
- अजीबोगरीब मामला: कार के रजिस्ट्रेशन नंबर पर हेलमेट नहीं पहनने के उल्लंघन का आरोप।
- जुर्माना राशि: ₹1,000 का ऑनलाइन चालान जारी, 14 दिनों के भीतर जमा करने का नोटिस।
- तकनीकी चूक: स्मार्ट सिटी के ‘इंटीग्रेटेड कंट्रोल एंड कमांड सेंटर’ के ऑटोमेटेड सिस्टम पर उठे सवाल।
- घटनास्थल: दिनकर गोलंबर चौराहा, पटना (9 अप्रैल की घटना)।
- पुलिस का पक्ष: मामले की जांच जारी, तकनीकी त्रुटि सुधारने का दिया आश्वासन।
पटना। बिहार की राजधानी पटना इन दिनों अपनी ‘स्मार्ट’ ट्रैफिक व्यवस्था के लिए चर्चा में है, लेकिन यह चर्चा सुविधाओं से ज्यादा तकनीकी खामियों और अजीबोगरीब चालानों को लेकर हो रही है। ताजा मामला पटना ट्रैफिक पुलिस की कार्यप्रणाली पर न केवल सवालिया निशान लगाता है, बल्कि यह भी दर्शाता है कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और ऑटोमेटेड कैमरे कभी-कभी हास्यास्पद गलतियां भी कर सकते हैं। कल्पना कीजिए, आप अपनी चार पहिया कार में सुरक्षित जा रहे हों और अचानक आपके मोबाइल पर मैसेज आए कि आपने हेलमेट नहीं पहना है, इसलिए आप पर एक हजार रुपये का जुर्माना लगाया गया है। सुनने में यह किसी मजाक जैसा लग सकता है, लेकिन पटना के एक प्रतिष्ठित प्रोफेसर के साथ यह हकीकत में हुआ है। इस घटना ने एक बार फिर पटना स्मार्ट सिटी के गांधी मैदान स्थित ‘इंटीग्रेटेड कंट्रोल एंड कमांड सेंटर’ (ICCC) की कार्यकुशलता और वहां तैनात पुलिस कर्मियों की निगरानी पर बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं।
प्रोफेसर की कार और ‘अदृश्य’ हेलमेट का जुर्माना
पटना के मशहूर कॉलेज ऑफ कॉमर्स में मनोविज्ञान विभाग के विभागाध्यक्ष जयमंगल देव गुरुवार को उस समय हैरत में पड़ गए जब उन्हें ट्रैफिक पुलिस की ओर से एक डिजिटल चालान प्राप्त हुआ। चालान की रसीद देखते ही उनकी परेशानी और बढ़ गई। रसीद में साफ तौर पर लिखा था कि 9 अप्रैल को पटना के दिनकर गोलंबर चौराहे के पास उन्होंने यातायात नियमों का उल्लंघन किया है। उल्लंघन का प्रकार था— ‘हेलमेट नहीं पहनना’।
हैरानी की बात यह है कि जयमंगल देव के पास कोई मोटरसाइकिल या स्कूटी है ही नहीं। वे अपनी कार से ही कॉलेज जाते हैं और घर में भी कोई दोपहिया वाहन पंजीकृत नहीं है। उनकी कार का रजिस्ट्रेशन नंबर चालान की रसीद पर दर्ज था, लेकिन जुर्म वह था जो केवल दोपहिया वाहन चालकों पर लागू होता है। इस एक हजार रुपये के जुर्माने ने प्रोफेसर को मानसिक रूप से परेशान कर दिया है। उनका कहना है कि वे कानून का पालन करने वाले नागरिक हैं और कार चलाते समय सीटबेल्ट का हमेशा उपयोग करते हैं, लेकिन कार के नंबर पर हेलमेट का चालान कटना समझ से परे है।
सिस्टम की ‘स्मार्टनेस’ पर उठते सवाल
ऑनलाइन जेनरेटेड चालान रसीद में एक और विरोधाभास देखने को मिला। एक तरफ जहाँ ‘वाहन के प्रकार’ (Vehicle Category) वाले कॉलम में ‘लाइट मोटर व्हीकल’ (LMV यानी कार) दर्ज किया गया है, वहीं दूसरी तरफ उल्लंघन की श्रेणी में ‘हेलमेट’ का जिक्र है। तकनीकी रूप से यह संभव ही नहीं है कि कोई कार चालक कार के भीतर हेलमेट पहनकर चले या उस पर यह नियम लागू हो।
जब जयमंगल देव ने रसीद के साथ अटैच की गई फोटो देखी, तो मामला और भी उलझ गया। चालान के साक्ष्य के रूप में जो तस्वीर भेजी गई है, उसमें एक मोटरसाइकिल पर दो लोग सवार दिख रहे हैं, जिनमें से एक ने हेलमेट नहीं पहना है। उस मोटरसाइकिल का नंबर प्लेट साफ नहीं है या फिर कैमरे के ऑटोमेटेड सॉफ्टवेयर ने किसी गड़बड़ी के कारण उस बाइक के नंबर को प्रोफेसर की कार के नंबर से ‘मैच’ कर दिया। यह सीधे तौर पर डेटा एंट्री या सॉफ्टवेयर की ‘ऑप्टिकल कैरेक्टर रिकग्निशन’ (OCR) तकनीक की विफलता है।
पटना में तकनीकी लापरवाही का यह पहला मामला नहीं
पटना ट्रैफिक पुलिस और स्मार्ट सिटी कैमरों की यह लापरवाही कोई पहली घटना नहीं है। इससे पहले भी कई बार कार चालकों को हेलमेट नहीं पहनने या ट्रैक्टर चालकों को सीटबेल्ट नहीं लगाने के जुर्माने भेजे जा चुके हैं। गांधी मैदान स्थित कमांड सेंटर से शहर भर की ट्रैफिक गतिविधियों पर पैनी नजर रखी जाती है। यहाँ लगे हाई-डेफिनिशन कैमरे स्वचालित रूप से नियम तोड़ने वालों की फोटो खींचते हैं और सिस्टम खुद-ब-खुद चालान जेनरेट कर देता है।
लेकिन, नियम यह है कि किसी भी चालान को अंतिम रूप से भेजने से पहले वहां तैनात यातायात पुलिस के कर्मियों को उसे ‘वेरीफाई’ (सत्यापित) करना होता है। प्रोफेसर जयमंगल देव के मामले में ऐसा लगता है कि किसी भी स्तर पर मानव निरीक्षण (Human Oversight) नहीं किया गया। अगर किसी पुलिसकर्मी ने उस फोटो और वाहन के प्रकार को एक बार भी देखा होता, तो यह साफ हो जाता कि फोटो में बाइक है और नंबर कार का चढ़ाया जा रहा है।

प्रोफेसर की चिंता: “कार से चालान, तो जवाबदेह कौन?”
प्रोफेसर जयमंगल देव का कहना है कि वे अपनी कार को लेकर चिंतित हैं। 14 दिनों के भीतर जुर्माना जमा करने का नोटिस मिला है। यदि वे जुर्माना जमा नहीं करते हैं, तो वाहन का फिटनेस, इंश्योरेंस या री-सेल वैल्यू प्रभावित हो सकती है। वे सवाल उठाते हैं कि जिस बाइक की गलती की सजा उन्हें दी जा रही है, वह बाइक किसकी है, उन्हें नहीं पता। क्या पटना की सड़कों पर फर्जी नंबर प्लेट वाली बाइक घूम रही हैं या फिर ट्रैफिक पुलिस का सॉफ्टवेयर इतना कमजोर है कि वह कार और बाइक के नंबरों में अंतर नहीं कर पा रहा है?
विभागाध्यक्ष के नाते समाज में उनकी एक प्रतिष्ठा है, और इस तरह के ‘गलत’ चालान से उन्हें बेवजह की कागजी कार्रवाई और भागदौड़ करनी पड़ रही है। उन्होंने मांग की है कि ट्रैफिक पुलिस इस सिस्टम को दुरुस्त करे ताकि आम जनता को बेगुनाह होते हुए भी सरकारी दफ्तरों के चक्कर न काटने पड़ें।
यातायात पुलिस का पक्ष और जांच का आश्वासन
इस मामले के तूल पकड़ने के बाद पटना यातायात पुलिस के आला अधिकारियों ने सफाई दी है। अधिकारियों का कहना है कि यह एक तकनीकी त्रुटि (Technical Glitch) हो सकती है। उन्होंने स्वीकार किया कि कभी-कभी तेज रफ्तार या नंबर प्लेट पर गंदगी होने के कारण कैमरा गलत नंबर रीड कर लेता है। यातायात विभाग ने आश्वासन दिया है कि जयमंगल देव के मामले की गहन जांच कराई जा रही है।
यह जांच की जा रही है कि कमांड सेंटर में उस समय किस शिफ्ट के कर्मी तैनात थे और बिना फोटो मिलान किए चालान कैसे अप्रूव हो गया। अधिकारियों ने यह भी कहा कि अगर चालान गलत पाया जाता है, तो उसे तुरंत निरस्त (Cancel) कर दिया जाएगा और वाहन स्वामी को कोई जुर्माना नहीं देना होगा। हालांकि, यह स्पष्ट नहीं किया गया कि भविष्य में ऐसी गलतियों को रोकने के लिए सिस्टम में क्या सुधार किए जा रहे हैं।
निष्कर्ष: सुशासन के दौर में तकनीक की चुनौती
पटना की ‘स्मार्ट’ ट्रैफिक व्यवस्था का उद्देश्य सड़कों पर अनुशासन लाना है, लेकिन अगर यह व्यवस्था नागरिकों के लिए परेशानी का सबब बनने लगे, तो इसकी सफलता पर प्रश्नचिह्न लग जाता है। प्रोफेसर जयमंगल देव की यह दास्तां हजारों उन वाहन स्वामियों का प्रतिनिधित्व करती है जो आए दिन तकनीकी गड़बड़ियों के शिकार होते हैं।
जरूरत इस बात की है कि कमांड सेंटर में तैनात कर्मियों को अधिक संवेदनशील बनाया जाए और ऑटोमेटेड चालान सिस्टम में ‘डबल वेरिफिकेशन’ की व्यवस्था लागू हो। केवल कैमरों के भरोसे ट्रैफिक सुधारने की कोशिश तब तक अधूरी है, जब तक उनमें मानवीय तर्क और संवेदनशीलता का समावेश न हो। फिलहाल, पटना पुलिस को इस ‘अनोखे’ चालान का समाधान जल्द से जल्द निकालना चाहिए ताकि एक सम्मानित शिक्षक को अपनी कार के नंबर पर हेलमेट का जुर्माना न भरना पड़े।


