बिहार की सियासत में तेजस्वी का बड़ा हमला: “गुजरात से रिमोट पर चलेगी सरकार, नीतीश ने घुटने टेककर स्वीकार की विदाई”

पटना। बिहार की राजनीति में मचे घमासान और सत्ता के शीर्ष पर हो रहे बदलावों के बीच नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव ने रविवार, 12 अप्रैल 2026 को भाजपा और नीतीश कुमार पर तीखा प्रहार किया है। पटना के बापू सभागार में आयोजित ‘पान समाज’ के एक विशाल कार्यक्रम में बोलते हुए तेजस्वी यादव ने बिहार की भावी सरकार के स्वरूप को ‘रिमोट कंट्रोल’ वाली सरकार करार दिया। उन्होंने आरोप लगाया कि मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने भाजपा के सामने पूरी तरह समर्पण कर दिया है और इसी का नतीजा है कि उन्हें सक्रिय राजनीति से किनारे कर दिल्ली (राज्यसभा) भेज दिया गया है। तेजस्वी ने साफ शब्दों में कहा कि अब बिहार की बागडोर पटना के बजाय गुजरात से संचालित होगी। इंडियन इन्क्लूसिव पार्टी द्वारा आयोजित इस कार्यक्रम में तेजस्वी यादव ने न केवल नीतीश कुमार की ‘विदाई’ पर चुटकी ली, बल्कि शिक्षा विभाग में हुए एक कथित बड़े घोटाले का खुलासा कर प्रशासनिक अमले में भी खलबली मचा दी है।

नीतीश की ‘विदाई’ और भाजपा का रिमोट कंट्रोल

​तेजस्वी यादव ने अपने संबोधन की शुरुआत नीतीश कुमार के राजनीतिक भविष्य पर चोट करते हुए की। उन्होंने कहा कि जो व्यक्ति पिछले 20 वर्षों से बिहार की सत्ता का केंद्र बना हुआ था, भाजपा ने उन्हें बड़ी ही चतुराई से ‘बर्बाद’ कर दिया है। तेजस्वी के अनुसार, नीतीश कुमार ने भाजपा के आगे घुटने टेक दिए, जिसके बाद उन्हें राज्यसभा का रास्ता दिखा दिया गया। उन्होंने कहा कि यह नीतीश कुमार की विदाई है और अब जनता दल यूनाइटेड (जदयू) का भविष्य पूरी तरह अंधेरे में डूब गया है।

​नेता प्रतिपक्ष ने दावा किया कि बिहार में अब जो भी सरकार बनेगी, उसके फैसले स्थानीय परिस्थितियों के आधार पर नहीं, बल्कि गुजरात से आने वाले ‘रिमोट कंट्रोल’ निर्देशों के आधार पर लिए जाएंगे। उन्होंने जनता को आगाह किया कि बिहार की अस्मिता अब खतरे में है क्योंकि यहाँ की सत्ता का स्वाभिमान दिल्ली और गुजरात के हाथों गिरवी रख दिया गया है। तेजस्वी ने तंज कसते हुए कहा कि जिस नीतीश कुमार को भाजपा ने खत्म करने की कसम खाई थी, आज उन्हीं के कंधे पर चढ़कर भाजपा बिहार पर कब्जा करने की कोशिश कर रही है।

160 करोड़ का ‘म्यूजिक घोटाला’: बिना शिक्षक के स्कूलों में ढोलक-झाल

​तेजस्वी यादव ने राज्य की शिक्षा व्यवस्था और एनडीए सरकार की कार्यप्रणाली पर गंभीर आरोप लगाते हुए एक नए घोटाले की ओर इशारा किया। उन्होंने बताया कि बिहार के 76 हजार स्कूलों में संगीत शिक्षकों की बहाली नहीं की गई है, लेकिन इसके बावजूद सरकार ने स्कूलों में 160 करोड़ रुपये के हारमोनियम, तबला, ढोलक और झाल (मंजीरे) भेज दिए हैं। तेजस्वी ने सवाल उठाया कि जब स्कूलों में सिखाने वाला गुरु ही नहीं है, तो इन करोड़ों रुपये के वाद्ययंत्रों का क्या होगा?

​उन्होंने इसे एक सुनियोजित भ्रष्टाचार बताते हुए कहा कि युवाओं के भविष्य से खिलवाड़ किया जा रहा है। तेजस्वी ने याद दिलाया कि जब वे सरकार में थे, तब 5 लाख शिक्षकों की रिकॉर्ड बहाली की गई थी। लेकिन आज स्थिति यह है कि टीआरई-4 (TRE-4) के अभ्यर्थी सड़कों पर उतरकर लाठियां खा रहे हैं और सरकार उनकी सुध लेने को तैयार नहीं है। तेजस्वी ने आरोप लगाया कि एनडीए सरकार युवाओं को रोजगार देने के बजाय केवल कागजी आंकड़ों और खरीद-फरोख्त के घोटालों में मस्त है।

मशीन का रिजल्ट और धन का खेला: चुनाव परिणामों पर सवाल

​पूर्व के विधानसभा चुनाव परिणामों को लेकर तेजस्वी यादव ने एक बार फिर अपनी नाराजगी और संदेह जाहिर किया। उन्होंने कहा कि पिछली बार जो रिजल्ट आया, वह जनता का असली जनादेश नहीं बल्कि ‘मशीन का रिजल्ट’ था। तेजस्वी के अनुसार, एनडीए ने तंत्र-मंत्र लगाकर मशीन (EVM) और धनबल का ऐसा खेल रचा कि जनता की इच्छा धरी की धरी रह गई।

​उन्होंने सरकार पर वोट खरीदने का आरोप लगाते हुए कहा कि चुनाव के वक्त तो 10-10 हजार रुपये बांटकर वोट ले लिए गए, लेकिन अब वही सरकार जरूरतमंदों को दो लाख रुपये की आर्थिक मदद देने में आनाकानी कर रही है। तेजस्वी ने दावा किया कि उनके पास आज भी 35 समर्पित विधायक हैं जो किसी भी बड़ी चुनौती का सामना करने के लिए काफी हैं। उन्होंने कहा कि किसी को उठाने के लिए केवल चार लोगों की जरूरत होती है, और राजद के पास तो लाखों कार्यकर्ताओं की फौज है। नेता प्रतिपक्ष ने एनडीए पर उनकी (महागठबंधन की) योजनाओं और विजन को चोरी करने का भी आरोप लगाया।

लालू का संकल्प और तेजस्वी का संघर्ष

​भाजपा के साथ जारी राजनीतिक लड़ाई पर तेजस्वी ने अपने पिता लालू प्रसाद यादव की विरासत को याद किया। उन्होंने कहा कि लालू यादव ने कभी सांप्रदायिक ताकतों के आगे सर नहीं झुकाया और आज भी वे पूरी मजबूती के साथ भाजपा से लड़ रहे हैं। तेजस्वी ने दहाड़ते हुए कहा कि लालू का बेटा कभी पीछे नहीं हटेगा और न ही भाजपा की ‘आरक्षणखोर’ नीतियों के आगे झुकेगा।

​तेजस्वी ने कहा कि भाजपा कभी भी पिछड़ों और दलितों को उनका हक और अधिकार नहीं देगी। उन्होंने पान समाज के लोगों से अपील की कि वे अपने अधिकारों के लिए सजग रहें। तेजस्वी ने वादा किया कि महागठबंधन ही पान समाज को मुख्यधारा में लाने के लिए आरक्षण सुनिश्चित कर सकता है। उन्होंने कहा कि नरेंद्र मोदी देश में ‘अच्छे दिन’ लाने का वादा कर सत्ता में आए थे, लेकिन वे विफल रहे। अब बिहार में ‘अच्छे दिन’ लाने की जिम्मेदारी राजद और उसके सहयोगियों की है, जो सबको साथ लेकर चलेंगे।

चिराग पासवान और एनडीए की आंतरिक टूट

​अपने भाषण के दौरान तेजस्वी यादव ने लोक जनशक्ति पार्टी (रामविलास) के नेता चिराग पासवान पर भी तंज कसा। उन्होंने कहा कि चिराग पासवान खुद को प्रधानमंत्री का ‘हनुमान’ बताते हैं, लेकिन उसी भाजपा ने उनसे उनका सरकारी बंगला तक छीन लिया। तेजस्वी ने कहा कि भाजपा की नीति ‘फूट डालो और राज करो’ की है। उन्होंने पहले चाचा और भतीजे (पशुपति पारस और चिराग) को लड़वाकर पार्टी तोड़ दी, और अब जब जरूरत पड़ी तो फिर से मिला लिया। तेजस्वी ने कहा कि चिराग पासवान और उनके जैसे अन्य सहयोगियों को यह समझ नहीं आ रहा है कि भाजपा उन्हें केवल इस्तेमाल कर रही है और समय आने पर उन्हें भी दरकिनार कर दिया जाएगा।

बेरोजगारी और युवाओं का बढ़ता आक्रोश

​राज्य में बढ़ती बेरोजगारी को लेकर तेजस्वी यादव ने सरकार को घेरा। उन्होंने कहा कि एनडीए सरकार की प्राथमिकता में युवाओं का भविष्य नहीं है। टीआरई-4 के अभ्यर्थियों के आंदोलन का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि सड़कों पर न्याय की मांग कर रहे युवाओं की आवाज को दबाया जा रहा है। तेजस्वी ने आरोप लगाया कि शिक्षा विभाग में संगीत के उपकरणों की खरीद में हुआ 160 करोड़ का घोटाला इस बात का प्रमाण है कि सरकारी खजाने की लूट मची हुई है और विकास केवल विज्ञापनों तक सीमित रह गया है।

बिहार के भविष्य के लिए नया मोर्चा

​सहसा विधायक आई पी गुप्ता की इंडियन इन्क्लूसिव पार्टी द्वारा आयोजित इस कार्यक्रम के जरिए तेजस्वी यादव ने यह साफ कर दिया है कि वे आने वाले समय में भाजपा और नीतीश कुमार के नए गठबंधन के खिलाफ एक बड़ा आंदोलन छेड़ने वाले हैं। उन्होंने पान समाज को हक दिलाने का भरोसा दिलाकर अपने ‘A-Z’ (सबको साथ लेकर चलने) वाले राजनीतिक समीकरण को और मजबूत करने की कोशिश की है।

​तेजस्वी यादव का यह बयान कि “नीतीश कुमार झुक गए, लेकिन लालू का बेटा नहीं झुकेगा”, बिहार की भावी राजनीति की दिशा तय करने वाला है। जहाँ एक तरफ नीतीश कुमार की विदाई और भाजपा के बढ़ते प्रभाव की चर्चा है, वहीं तेजस्वी यादव ने भ्रष्टाचार और रोजगार के मुद्दों को उछालकर एनडीए की घेराबंदी तेज कर दी है। अब देखना यह होगा कि भाजपा और नीतीश कुमार की जोड़ी तेजस्वी के इन तीखे हमलों और ‘म्यूजिक घोटाले’ के आरोपों का क्या जवाब देती है।

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