​पटना: एग्जीक्यूटिव इंजीनियर राजीव कुमार पर SVU का शिकंजा, तीन ठिकानों पर रेड

पटना। बिहार में भ्रष्टाचार के खिलाफ नीतीश सरकार की ‘जीरो टॉलरेंस’ नीति के तहत शनिवार, 18 अप्रैल 2026 की सुबह एक और बड़ी कार्रवाई सामने आई है। राज्य की विशेष निगरानी इकाई (SVU) ने आय से अधिक संपत्ति अर्जित करने के मामले में नगर विकास और आवास विभाग के कार्यपालक अभियंता (एग्जीक्यूटिव इंजीनियर) राजीव कुमार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। शनिवार की भोर होते ही एसवीयू की अलग-अलग टीमों ने पटना और दानापुर स्थित राजीव कुमार के तीन प्रमुख ठिकानों पर एक साथ दस्तक दी। यह छापेमारी भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम (PC Act) 1988 के तहत दर्ज एक गंभीर मामले के आलोक में की जा रही है। जांच टीम का प्राथमिक अनुमान है कि राजीव कुमार ने अपने पद का दुरुपयोग करते हुए ज्ञात आय के स्रोतों से करीब 1.10 करोड़ रुपये अधिक की अवैध संपत्ति जमा की है। छापेमारी के दौरान एसवीयू के अधिकारी दस्तावेजों, बैंक खातों, निवेश के कागजात और बेनामी संपत्तियों के सबूत खंगालने में जुटे हैं। इस कार्रवाई ने सचिवालय से लेकर इंजीनियरिंग महकमे तक हड़कंप मचा दिया है, क्योंकि जांच की आंच कई अन्य रसूखदारों तक भी पहुँचने की संभावना है।

भ्रष्टाचार की ‘फाइल 15/2026’: एसवीयू की बड़ी कार्रवाई

​विशेष निगरानी इकाई को पिछले लंबे समय से राजीव कुमार की कार्यशैली और उनकी बढ़ती संपत्तियों को लेकर गुप्त सूचनाएं मिल रही थीं। तकनीकी जांच और खुफिया इनपुट के आधार पर एसवीयू ने राजीव कुमार के खिलाफ कांड संख्या 15/2026 दर्ज किया। आधिकारिक सूत्रों के अनुसार, राजीव कुमार नगर विकास और आवास विभाग जैसे महत्वपूर्ण विभाग में तैनात रहे हैं, जहाँ बजट और योजनाओं के क्रियान्वयन में उनकी बड़ी भूमिका रहती थी। जांच में पाया गया कि उनके द्वारा अर्जित की गई संपत्ति उनकी वैध आय के मुकाबले कहीं अधिक है।

​शनिवार की सुबह जैसे ही छापेमारी शुरू हुई, एसवीयू के अधिकारियों ने सबसे पहले राजीव कुमार के आवासीय ठिकानों की घेराबंदी की। टीम में शामिल फॉरेंसिक विशेषज्ञों और चार्टर्ड अकाउंटेंट्स की मदद से निवेश के उन पैटर्न को समझने की कोशिश की जा रही है, जो आमतौर पर काले धन को सफेद करने के लिए इस्तेमाल किए जाते हैं। 1.10 करोड़ रुपये की संपत्ति का यह आंकड़ा केवल प्राथमिक है, विशेषज्ञों का मानना है कि छापेमारी पूरी होने और लॉकरों की तलाशी के बाद यह राशि कई गुना बढ़ सकती है।

पटना के रामनगरी से दानापुर तक मची खलबली

​एसवीयू की टीम ने शनिवार को अपनी रणनीति के तहत तीन स्थानों को केंद्र बनाया। छापेमारी का पहला और मुख्य ठिकाना पटना के पॉश इलाके रामनगरी स्थित सुमित चंद्रम गृह अपार्टमेंट का फ्लैट संख्या B-202 है। यह राजीव कुमार का मुख्य निवास बताया जा रहा है, जहाँ वे अपने परिवार के साथ रहते हैं। यहाँ टीम को कई महत्वपूर्ण दस्तावेज मिले हैं, जिनमें जमीन के डीड, बैंक पासबुक और गहनों के बिल शामिल हैं। टीम के सदस्य घर के कोने-कोने की तलाशी ले रहे हैं ताकि किसी भी प्रकार की डिजिटल या फिजिकल एविडेंस को नष्ट न किया जा सके।

​छापेमारी का दूसरा मोर्चा पटना के पंत भवन स्थित कार्यालय में खोला गया। पंत भवन की छठी मंजिल पर स्थित राजीव कुमार के चैम्बर को एसवीयू ने अपने कब्जे में ले लिया। कार्यालय में रखे सरकारी रजिस्टरों, टेंडर से जुड़ी फाइलों और कंप्यूटरों की हार्ड डिस्क को स्कैन किया जा रहा है। जांच का उद्देश्य यह पता लगाना है कि क्या राजीव कुमार ने किसी विशेष ठेकेदार या कंपनी को लाभ पहुँचाने के बदले रिश्वत के रूप में संपत्ति अर्जित की थी। कार्यपालक अभियंता के कार्यालय में अचानक पहुँची पुलिस टीम को देखकर विभाग के अन्य कर्मचारी और अधिकारी भी स्तब्ध रह गए।

दानापुर के ‘वीनस लैंडमार्क’ में फंसा पेच: सैन्य अधिकारी का कनेक्शन

​छापेमारी का तीसरा और सबसे दिलचस्प पड़ाव दानापुर के खगौल रोड स्थित वीनस लैंडमार्क गोल्ड अपार्टमेंट रहा। यहाँ टीम को सूचना मिली थी कि फ्लैट संख्या 807 राजीव कुमार का है और वहाँ भारी मात्रा में नकदी या कीमती सामान छिपाया जा सकता है। शनिवार सुबह जब एसवीयू की टीम यहाँ पहुँची, तो फ्लैट बंद मिला। स्थानीय पूछताछ और सोसाइटी के रजिस्टर की जांच में एक चौंकाने वाला तथ्य सामने आया।

​एसवीयू टीम के अधिकारियों को पता चला कि इस फ्लैट में वर्तमान में एक सैन्य अधिकारी (Army Officer) किराए पर रहते हैं। छापेमारी के समय सैन्य अधिकारी वहां मौजूद नहीं थे और फ्लैट में ताला लगा हुआ था। एसवीयू के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि वे सैन्य अधिकारी से संपर्क करने की कोशिश कर रहे हैं ताकि फ्लैट को खोलकर तलाशी ली जा सके। पुलिस यह भी जांच रही है कि क्या यह रेंटल एग्रीमेंट केवल कागजी है या वास्तव में वहां कोई रह रहा है। फ्लैट के मालिकाना हक से जुड़े दस्तावेजों को राजीव कुमार के घर से मिले कागजों से मिलान किया जा रहा है। सैन्य अधिकारी का नाम और उनके कार्यकाल की जानकारी भी जुटाई जा रही है ताकि किसी भी प्रकार के कानूनी भ्रम से बचा जा सके।

काली कमाई का जाल: करोड़ों की अचल संपत्ति और निवेश

​राजीव कुमार के खिलाफ एसवीयू की यह कार्रवाई बिहार में सरकारी अधिकारियों के बीच व्याप्त भ्रष्टाचार की जड़ों को उजागर करती है। 1.10 करोड़ रुपये का भ्रष्टाचार उस विभाग के अधिकारी द्वारा किया गया है, जिसकी जिम्मेदारी शहरी विकास और आम नागरिकों को बुनियादी सुविधाएं मुहैया कराने की है। सूत्रों की मानें तो राजीव कुमार ने न केवल पटना और दानापुर में फ्लैट खरीदे हैं, बल्कि बिहार के अन्य जिलों और संभवतः पड़ोसी राज्यों में भी निवेश किया है।

​एसवीयू की टीम को छापेमारी के दौरान कई ऐसी इंश्योरेंस पॉलिसियों और म्यूचुअल फंड्स के प्रमाण मिले हैं, जिनमें हर महीने लाखों रुपये का प्रीमियम जमा किया जा रहा था। इसके अलावा, महंगी गाड़ियों और विलासिता के सामानों की लिस्ट भी तैयार की जा रही है। जांचकर्ता यह भी देख रहे हैं कि क्या राजीव कुमार ने अपने रिश्तेदारों या करीबियों के नाम पर ‘बेनामी’ संपत्तियां तो नहीं खरीदी हैं। अक्सर भ्रष्ट अधिकारी पकड़े जाने के डर से अपनी संपत्ति परिवार के अन्य सदस्यों के नाम दर्ज करा देते हैं, लेकिन एसवीयू की टीम अब पैन कार्ड और आधार लिंक के जरिए ऐसे सभी खातों की निगरानी कर रही है।

भ्रष्टाचार के खिलाफ एसवीयू की बढ़ती सक्रियता

​साल 2026 की शुरुआत से ही बिहार में विशेष निगरानी इकाई और आर्थिक अपराध इकाई (EOU) काफी सक्रिय नजर आ रही हैं। राजीव कुमार पर हुई यह रेड इसी श्रृंखला की एक कड़ी है। एसवीयू के अधिकारियों का कहना है कि वे केवल छोटे प्यादों को ही नहीं, बल्कि सिस्टम में बैठे बड़े मगरमच्छों पर भी प्रहार कर रहे हैं। राजीव कुमार जैसे कार्यपालक अभियंता का पकड़ा जाना विभाग के अन्य भ्रष्ट अधिकारियों के लिए एक कड़ा संदेश है।

​नगर विकास और आवास विभाग में पिछले कुछ समय से टेंडर प्रक्रिया और निर्माण कार्यों की गुणवत्ता को लेकर शिकायतें मिल रही थीं। राजीव कुमार के ठिकानों से मिली डायरियों में कई कोडेड एंट्रीज (Coded Entries) मिली हैं, जिनके बारे में संदेह है कि वे लेन-देन का हिसाब-किताब हैं। इन डायरियों में कुछ अन्य अधिकारियों और बिचौलियों के नाम भी सांकेतिक रूप से लिखे गए हैं। यदि एसवीयू इन कोड्स को डिकोड करने में सफल रहती है, तो आने वाले दिनों में पटना में और भी कई बड़े ठिकानों पर छापेमारी देखने को मिल सकती है।

जांच की अगली कड़ी: पूछताछ और गिरफ्तारी की संभावना

​छापेमारी की प्रक्रिया शनिवार देर शाम तक चलने की संभावना है। फिलहाल राजीव कुमार को उनके घर पर ही नजरबंद (Detain) जैसी स्थिति में रखकर पूछताछ की जा रही है। एसवीयू के अधिकारी उनसे संपत्ति के वैध स्रोतों के बारे में सवाल पूछ रहे हैं, लेकिन सूत्रों के अनुसार वे संतोषजनक जवाब नहीं दे पा रहे हैं। यदि साक्ष्य पुख्ता पाए जाते हैं और बरामद संपत्ति का हिसाब नहीं मिलता है, तो राजीव कुमार की गिरफ्तारी तय मानी जा रही है।

​इस छापेमारी का असर राजीव कुमार के करियर पर भी पड़ेगा। विभागीय नियमों के अनुसार, आय से अधिक संपत्ति के मामले में प्राथमिकी दर्ज होने और 48 घंटे से अधिक हिरासत में रहने पर अधिकारी को निलंबित (Suspend) कर दिया जाता है। नगर विकास विभाग के प्रधान सचिव ने भी इस मामले पर नजर बना रखी है। सरकार की ओर से यह स्पष्ट संकेत है कि विकास की राशि को अपनी जेब में भरने वालों के लिए अब जेल की सलाखें ही अंतिम ठिकाना होंगी।

​दानापुर वाले फ्लैट को लेकर जो पेंच फंसा है, उसे सुलझाने के लिए सेना के संबंधित विंग से भी पत्राचार किया जा सकता है। एसवीयू यह सुनिश्चित करना चाहती है कि जांच की प्रक्रिया पूरी तरह पारदर्शी और कानूनी रूप से मजबूत हो। 18 अप्रैल की यह कार्रवाई पटना में भ्रष्टाचार के विरुद्ध एक बड़े अभियान की आहट है, जिसकी गूँज आने वाले कई दिनों तक सुनाई देगी।

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