पटना-पूर्णिया एक्सप्रेसवे को लेकर फैली भ्रम की स्थिति पर सरकार का स्पष्टीकरण, समस्तीपुर में नहीं बदला गया संरेखण

पटना: बिहार की महत्वाकांक्षी पटना-पूर्णिया एक्सप्रेसवे परियोजना को लेकर हाल के दिनों में सामने आई कुछ मीडिया रिपोर्टों पर पथ निर्माण विभाग ने विस्तृत स्पष्टीकरण जारी किया है। विभाग ने स्पष्ट किया है कि समस्तीपुर जिले में एक्सप्रेसवे के संरेखण (अलाइनमेंट) में किसी प्रकार का बदलाव नहीं किया गया है और भूमि अधिग्रहण की पूरी प्रक्रिया मूल रूप से स्वीकृत मार्ग के अनुसार ही संचालित की जा रही है।

विभाग का कहना है कि कुछ समाचार माध्यमों और डिजिटल प्लेटफॉर्म पर प्रकाशित रिपोर्टों में यह दावा किया गया था कि समस्तीपुर जिले के एक हिस्से में एक्सप्रेसवे के मार्ग को बदला गया है। विभाग ने इन दावों को पूरी तरह निराधार, भ्रामक और तथ्यों से परे बताया है। अधिकारियों के अनुसार परियोजना का संरेखण पहले से स्वीकृत तकनीकी मानकों और विस्तृत अध्ययन के आधार पर तय किया गया था, जिसमें अब तक कोई संशोधन नहीं किया गया है।

बिहार की सबसे महत्वपूर्ण सड़क परियोजनाओं में शामिल है एक्सप्रेसवे

पटना-पूर्णिया एक्सप्रेसवे को बिहार की सबसे बड़ी और रणनीतिक सड़क परियोजनाओं में से एक माना जा रहा है। इस परियोजना का उद्देश्य राजधानी पटना को सीमांचल क्षेत्र से अत्याधुनिक सड़क नेटवर्क के माध्यम से जोड़ना है।

एक्सप्रेसवे बनने के बाद यात्रा समय में उल्लेखनीय कमी आने की संभावना है। इसके साथ ही व्यापार, उद्योग, कृषि उत्पादों के परिवहन और क्षेत्रीय विकास को भी नई गति मिलने की उम्मीद है।

सरकार का मानना है कि यह परियोजना उत्तर और पूर्वी बिहार के आर्थिक विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी तथा राज्य की कनेक्टिविटी को राष्ट्रीय स्तर पर और मजबूत बनाएगी।

समस्तीपुर में नहीं बदला गया मार्ग

पथ निर्माण विभाग के सचिव पंकज कुमार पाल ने स्पष्ट किया है कि परियोजना के किलोमीटर 48+000 से किलोमीटर 53+000 के बीच किसी भी प्रकार का बदलाव या विचलन नहीं किया गया है।

उन्होंने कहा कि भूमि अधिग्रहण की वर्तमान प्रक्रिया पूरी तरह उसी मार्ग के अनुसार चल रही है जिसे पहले स्वीकृति मिली थी। विभाग के अनुसार हाल में जारी अधिसूचनाएं भी उसी मूल संरेखण पर आधारित हैं जिसे पहले तकनीकी स्वीकृति प्राप्त हो चुकी है।

अधिकारियों ने कहा कि परियोजना से जुड़ी सभी प्रक्रियाएं वैधानिक नियमों और निर्धारित मानकों के अनुरूप संचालित की जा रही हैं।

विशेषज्ञ समिति ने किया था अंतिम चयन

विभाग के अनुसार एक्सप्रेसवे का संरेखण किसी एक अधिकारी या संस्था द्वारा तय नहीं किया गया था, बल्कि इसके लिए विस्तृत तकनीकी अध्ययन और बहुस्तरीय समीक्षा प्रक्रिया अपनाई गई थी।

मार्ग निर्धारण से पहले सामाजिक, आर्थिक और तकनीकी पहलुओं का विस्तृत विश्लेषण किया गया। इसके बाद विशेषज्ञों की एक उच्चस्तरीय समिति ने उपलब्ध विकल्पों का मूल्यांकन कर सर्वोत्तम मार्ग का चयन किया।

इस समिति में सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारी, राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI) के शीर्ष प्रतिनिधि तथा तकनीकी विशेषज्ञ शामिल थे। विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (DPR) और व्यवहार्यता अध्ययन की समीक्षा के बाद जनवरी 2025 में इस संरेखण को अंतिम मंजूरी दी गई थी।

भूमि अधिग्रहण भी उसी स्वीकृत मार्ग पर आधारित

पथ निर्माण विभाग ने कहा है कि वर्तमान में जिन गांवों और भूखंडों के लिए भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया चल रही है, वे सभी पहले से स्वीकृत संरेखण के अंतर्गत आते हैं।

अधिकारियों के अनुसार भूमि अधिग्रहण से संबंधित सभी अधिसूचनाएं कानूनी प्रक्रिया के तहत जारी की गई हैं। हाल ही में जारी 3A अधिसूचना भी उसी मार्ग पर आधारित है जिसे 2025 में स्वीकृति मिली थी।

इसलिए यह कहना कि हाल में किसी प्रभाव या दबाव के कारण मार्ग बदला गया है, पूरी तरह गलत और तथ्यों से परे है।

कॉलेज भवन को नुकसान पहुंचने की आशंका खारिज

कुछ रिपोर्टों में यह भी दावा किया गया था कि एक्सप्रेसवे के कारण एक शैक्षणिक संस्थान प्रभावित होगा। विभाग ने इस संबंध में भी स्थिति स्पष्ट की है।

अधिकारियों के अनुसार संबंधित कॉलेज का मुख्य भवन पूरी तरह सुरक्षित है और परियोजना के कारण उसे कोई नुकसान नहीं पहुंचेगा।

विभाग का कहना है कि केवल कुछ खाली भूमि का हिस्सा अधिग्रहण की प्रक्रिया में शामिल है, जबकि शैक्षणिक गतिविधियों और भवन संरचना पर इसका कोई प्रतिकूल प्रभाव नहीं पड़ेगा।

इस स्पष्टीकरण के बाद स्थानीय स्तर पर उत्पन्न कई आशंकाओं को दूर करने का प्रयास किया गया है।

कम से कम विस्थापन को प्राथमिकता

पथ निर्माण विभाग का कहना है कि एक्सप्रेसवे का मार्ग तय करते समय सबसे महत्वपूर्ण उद्देश्यों में से एक मानवीय विस्थापन को न्यूनतम रखना था।

प्रारंभिक अध्ययन और मैपिंग के दौरान कई वैकल्पिक मार्गों का परीक्षण किया गया था। इसके बाद जिस संरेखण को अंतिम रूप दिया गया, उसमें अपेक्षाकृत कम संख्या में घरों और व्यावसायिक ढांचों पर प्रभाव पड़ रहा है।

अधिकारियों के अनुसार वर्तमान मार्ग से लगभग 65 आवासीय और व्यावसायिक संरचनाएं प्रभावित होती हैं, जबकि कुछ वैकल्पिक प्रस्तावों को अपनाने पर यह संख्या 200 से अधिक हो सकती थी।

इसका अर्थ है कि वर्तमान संरेखण से बड़ी संख्या में लोगों को विस्थापन से बचाया गया है।

तकनीकी और सामाजिक संतुलन का परिणाम है मौजूदा मार्ग

विशेषज्ञों का मानना है कि किसी भी बड़े एक्सप्रेसवे या राजमार्ग परियोजना में मार्ग निर्धारण एक जटिल प्रक्रिया होती है।

इसमें भूमि की उपलब्धता, पर्यावरणीय प्रभाव, जनसंख्या घनत्व, लागत, भविष्य की यातायात आवश्यकताएं और सामाजिक प्रभाव जैसे अनेक कारकों का मूल्यांकन किया जाता है।

पथ निर्माण विभाग का कहना है कि पटना-पूर्णिया एक्सप्रेसवे का वर्तमान संरेखण भी इन्हीं सभी पहलुओं को ध्यान में रखकर तैयार किया गया है।

बिहार के विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा एक्सप्रेसवे

सरकार का मानना है कि पटना-पूर्णिया एक्सप्रेसवे राज्य के आर्थिक विकास के लिए गेम चेंजर साबित हो सकता है।

इसके माध्यम से सीमांचल, मिथिलांचल और उत्तर बिहार के कई हिस्सों को राजधानी और अन्य प्रमुख क्षेत्रों से बेहतर कनेक्टिविटी मिलेगी। यात्रा समय कम होने से व्यापारिक गतिविधियां बढ़ेंगी और निवेश के नए अवसर पैदा होंगे।

इसके अलावा कृषि उत्पादों के परिवहन, औद्योगिक विकास और पर्यटन क्षेत्र को भी लाभ मिलने की उम्मीद है।

अफवाहों से बचने की अपील

पथ निर्माण विभाग ने आम जनता, किसानों और अन्य हितधारकों से अपील की है कि वे परियोजना से संबंधित अपुष्ट खबरों और अफवाहों पर ध्यान न दें।

विभाग ने कहा है कि राष्ट्रीय महत्व की इस परियोजना को पूरी पारदर्शिता, तकनीकी मानकों और कानूनी प्रक्रियाओं के अनुरूप आगे बढ़ाया जा रहा है।

अधिकारियों ने भरोसा दिलाया कि परियोजना के प्रत्येक चरण में जनहित, पारदर्शिता और जवाबदेही को प्राथमिकता दी जाएगी।

समयबद्ध तरीके से पूरा होगा निर्माण कार्य

विभाग का लक्ष्य है कि पटना-पूर्णिया एक्सप्रेसवे परियोजना को निर्धारित समयसीमा के भीतर पूरा किया जाए ताकि बिहार के लोगों को जल्द से जल्द इसका लाभ मिल सके।

सरकार का मानना है कि यह एक्सप्रेसवे केवल एक सड़क परियोजना नहीं बल्कि बिहार के विकास, निवेश और क्षेत्रीय संतुलन को नई दिशा देने वाली आधारभूत संरचना परियोजना है। ऐसे में इसके बारे में फैलाई जा रही भ्रामक सूचनाओं के बजाय आधिकारिक तथ्यों पर भरोसा करना आवश्यक है।

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