
- 4 थानों की पुलिस ने घेरा: पाटलिपुत्र के अपार्टमेंट में देर शाम पहुंची पुलिस; लैपटॉप-मोबाइल खंगाला, तबीयत बिगड़ने पर निजी अस्पताल में भर्ती
- POCSO एक्ट में केस दर्ज: SSP बोले- सोशल मीडिया पर फैला रहे थे झूठ; नीट छात्रा की मौत और डीएनए टेस्ट पर की थी टिप्पणी
- वारंट पर विवाद: 13 फरवरी को कार्रवाई, पर वारंट पर लिखी थी ’23 फरवरी’; पुलिस ने बताया मानवीय भूल
द वॉयस ऑफ बिहार (पटना)
पटना में शुक्रवार की देर शाम पुलिस महकमे में हड़कंप मच गया। चित्रगुप्त नगर थाने में दर्ज एक मामले में कार्रवाई करते हुए पटना पुलिस की टीम ने पूर्व आईपीएस अधिकारी अमिताभ दास (Former IPS Amitabh Das) के पाटलिपुत्र कॉलोनी स्थित आवास पर छापेमारी की। डीएसपी (लॉ एंड ऑर्डर-2) के नेतृत्व में चार थानों की पुलिस ने उनके फ्लैट को घेर लिया।
छापेमारी के दौरान बिगड़ी तबीयत
पुलिस टीम स्काइन अपार्टमेंट (Skine Apartment) के सेकेंड फ्लोर स्थित उनके फ्लैट पर तलाशी ले रही थी और लैपटॉप-मोबाइल की जांच कर रही थी, तभी अचानक अमिताभ दास की तबीयत बिगड़ गई। आनन-फानन में पुलिस उन्हें पाटलिपुत्र गोलंबर स्थित एक निजी अस्पताल ले गई, जहां उनका इलाज चल रहा है।
क्या है पूरा मामला?
एसएसपी (SSP) कार्तिकेय के. शर्मा ने बताया कि यह कार्रवाई नीट (NEET) की तैयारी कर रही एक छात्रा की संदिग्ध मौत और पॉक्सो एक्ट (POCSO Act) से जुड़े मामले में की गई है।
- आरोप: आरोप है कि पूर्व आईपीएस ने सोशल मीडिया (यूट्यूब, फेसबुक, एक्स) पर इस संवेदनशील मामले और डीएनए टेस्ट को लेकर गंभीर, भ्रामक और उत्तेजक बयान प्रसारित किए।
- कानूनी पेंच: पुलिस का कहना है कि इससे जांच प्रभावित होने और पीड़िता की पहचान उजागर होने का खतरा था, जो पॉक्सो एक्ट की धारा 22(1) के तहत अपराध है।
वारंट की तारीख पर बवाल
छापेमारी के दौरान एक बड़ी तकनीकी चूक भी चर्चा का विषय बनी रही।
- तारीख में गड़बड़ी: प्राथमिकी 13 फरवरी को दर्ज हुई थी, लेकिन पुलिस जो तलाशी वारंट लेकर पहुंची थी, उस पर तिथि 23 फरवरी 2026 अंकित थी (जबकि हस्ताक्षर के पास 13 फरवरी लिखा था)। इसे पुलिस की जल्दबाजी या मानवीय भूल (Typographical Error) माना जा रहा है, लेकिन मौके पर मौजूद लोगों के बीच यह चर्चा का विषय बना रहा।


