पटना NEET छात्रा मौत मामला: मनीष रंजन की जमानत अर्जी खारिज; कोर्ट ने जांच टीम को फटकारा— “सबूतों से छेड़छाड़ हुई तो अधिकारियों पर ही दर्ज होगा केस”

पटना | 27 फरवरी, 2026: राजधानी पटना के बहुचर्चित NEET छात्रा मौत मामले में आरोपी मनीष रंजन को फिलहाल जेल की सलाखों के पीछे ही रहना होगा। शुक्रवार को स्थानीय अदालत ने मनीष रंजन की जमानत याचिका पर सुनवाई करते हुए उसे राहत देने से साफ इनकार कर दिया। करीब एक घंटे तक चली तीखी बहस के बाद अदालत ने न केवल जमानत अर्जी खारिज की, बल्कि मामले की जांच कर रही टीम की कार्यप्रणाली पर भी गंभीर सवाल खड़े किए हैं।

कोर्ट रूम में एक घंटे की मैराथन बहस

जमानत याचिका पर सुनवाई के दौरान कोर्ट रूम का माहौल काफी गरमाया रहा। बचाव पक्ष ने मनीष रंजन को निर्दोष बताते हुए जमानत की गुहार लगाई, लेकिन अभियोजन पक्ष (Prosecutors) ने इसका पुरजोर विरोध किया। अभियोजन ने दलील दी कि मामला बेहद संवेदनशील है और आरोपी के बाहर आने से जांच प्रभावित हो सकती है। दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद अदालत ने अब इस मामले की अगली सुनवाई के लिए 28 फरवरी की तारीख तय की है।

अदालत के कड़े तेवर: जांच अधिकारियों को अल्टीमेटम

इस सुनवाई की सबसे बड़ी बात न्यायाधीश की तल्ख टिप्पणी रही। जांच की प्रगति और अब तक जुटाए गए साक्ष्यों पर असंतोष जाहिर करते हुए कोर्ट ने पूछा, “आखिर अहम सबूतों के साथ छेड़छाड़ कैसे हुई?” अदालत ने जांच अधिकारियों को चेतावनी देते हुए यहाँ तक कह दिया कि यदि जांच में किसी भी प्रकार की लापरवाही या साक्ष्यों को मिटाने की पुष्टि होती है, तो संबंधित अधिकारियों के विरुद्ध ही मुकदमा दर्ज करने का आदेश दिया जा सकता है।

पीड़िता के वकील का दावा: “लापरवाही के साथ हुई जांच”

सुनवाई के बाद मीडिया से बात करते हुए पीड़िता पक्ष के वकील ने बड़ा दावा किया। उन्होंने आरोप लगाया कि जांच एजेंसी ने सबूतों को सही तरीके से संकलित नहीं किया और कई महत्वपूर्ण दस्तावेज संदिग्ध परिस्थितियों में गायब या बदले हुए पाए गए हैं। वकील ने कहा कि अदालत ने इन बिंदुओं को गंभीरता से लिया है और इसीलिए जांच एजेंसी से जवाब तलब किया गया है।

28 फरवरी पर टिकीं सबकी नजरें

मनीष रंजन की जमानत याचिका खारिज होने से उसकी मुश्किलें बढ़ गई हैं, वहीं पुलिस और जांच टीम पर भी दबाव बढ़ गया है। कल यानी 28 फरवरी को होने वाली अगली सुनवाई में यह स्पष्ट होगा कि जांच टीम कोर्ट के कड़े सवालों का क्या जवाब देती है। क्या पुलिस नए साक्ष्य पेश कर पाएगी या अधिकारियों पर गाज गिरेगी, यह कल साफ हो जाएगा।

ब्यूरो रिपोर्ट, द वॉयस ऑफ बिहार (VOB)।

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