
पटना। बिहार की ग्रामीण अर्थव्यवस्था और मजदूरों के हितों को लेकर शनिवार, 18 अप्रैल 2026 को एक महत्वपूर्ण कूटनीतिक और प्रशासनिक हलचल देखी गई। केंद्र सरकार द्वारा शुरू किए जा रहे ‘विकसित भारत-गारंटी फॉर रोजगार एंड आजीविका मिशन ग्रामीण’ (वीबी-जी राम जी) के क्रियान्वयन को लेकर आयोजित उच्चस्तरीय बैठक में बिहार ने अपनी सशक्त उपस्थिति दर्ज कराई। केंद्रीय कृषि एवं ग्रामीण विकास मंत्री शिवराज सिंह चौहान की अध्यक्षता में वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग (वीसी) के माध्यम से आयोजित इस बैठक में बिहार के उप मुख्यमंत्री सह ग्रामीण विकास विभाग के प्रभारी मंत्री विजय चौधरी ने राज्य के श्रमिकों की दयनीय आर्थिक स्थिति और मनरेगा (MGNREGA) की विसंगतियों को पुरजोर तरीके से उठाया। विजय चौधरी ने केंद्र सरकार के सामने एक बड़ा प्रस्ताव रखते हुए मांग की कि बिहार में मनरेगा के तहत मिलने वाली मजदूरी और राज्य सरकार द्वारा कृषि कार्यों के लिए तय न्यूनतम मजदूरी के बीच के भारी अंतर को तुरंत समाप्त किया जाए। वर्तमान में बिहार में कृषि मजदूरी 413 रुपये है, जबकि मनरेगा में यह केवल 255 रुपये है। इस विसंगति को दूर करना न केवल सामाजिक न्याय बल्कि ग्रामीण विकास के लिए भी अनिवार्य हो गया है।
मजदूरी का गणित: ₹413 बनाम ₹255 का संघर्ष
बैठक के दौरान विजय चौधरी ने आंकड़ों के साथ अपनी बात रखी। उन्होंने बताया कि बिहार जैसे राज्य में जहाँ आबादी का बड़ा हिस्सा श्रम पर निर्भर है, वहां मजदूरी की दरों में इतना बड़ा अंतर पलायन और असंतोष का कारण बनता है। राज्य सरकार ने कृषि कार्यों के लिए जो न्यूनतम मजदूरी 413 रुपये निर्धारित की है, वह वैज्ञानिक आकलन और महंगाई को ध्यान में रखकर तय की गई है। इसके उलट, मनरेगा में मजदूरों को मिलने वाले 255 रुपये उनकी दैनिक आवश्यकताओं को पूरा करने में नाकाफी साबित हो रहे हैं।
विजय चौधरी ने केंद्र सरकार से अपील की कि मनरेगा की मजदूरी को भी राज्य की न्यूनतम मजदूरी दर के बराबर लाया जाए। उन्होंने तर्क दिया कि जब काम की प्रकृति कठिन है और श्रमिक वही है, तो दो अलग-अलग सरकारी मानकों पर भुगतान करना तर्कसंगत नहीं है। इस अंतर को पाटने से न केवल मनरेगा में श्रमिकों की रुचि बढ़ेगी, बल्कि ग्रामीण क्षेत्रों में आजीविका के स्तर में भी बड़ा सुधार आएगा। उन्होंने केंद्र को याद दिलाया कि बिहार जैसे श्रम प्रधान राज्य में विकास की नींव तभी मजबूत होगी जब श्रमिक को उसकी मेहनत का वाजिब हक मिलेगा।
नॉरमेटिव एलोकेशन और पारदर्शिता: बिहार की विशेष मांग
’वीबी-जी राम जी’ योजना के क्रियान्वयन पर चर्चा करते हुए विजय चौधरी ने निधि आवंटन (Fund Allocation) के फार्मूले पर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि बिहार एक गरीब राज्य है, जिसकी परिस्थितियाँ अन्य विकसित राज्यों से भिन्न हैं। यहाँ की जनसंख्या, जनसंख्या घनत्व और प्रति व्यक्ति आय को ध्यान में रखते हुए विशेष आवंटन किया जाना चाहिए। विजय चौधरी ने मांग की कि केंद्र सरकार ‘नॉरमेटिव एलोकेशन’ (Normative Allocation) की व्यवस्था लागू करे, जो पूरी तरह से पारदर्शी हो।
उन्होंने स्पष्ट किया कि संसाधनों का वितरण केवल औपचारिकताओं पर नहीं, बल्कि राज्य की वास्तविक निर्धनता और आवश्यकताओं के आधार पर होना चाहिए। बिहार में भूमिहीन मजदूरों की संख्या और ग्रामीण गरीबी का स्तर देखते हुए यहाँ अधिक निवेश की आवश्यकता है। उन्होंने केंद्र से आग्रह किया कि नई योजना के तहत बिहार को प्राथमिकता दी जाए ताकि ‘विकसित भारत’ के सपने में बिहार पीछे न छूट जाए। उन्होंने यह भी सुझाव दिया कि आवंटन की प्रक्रिया में राज्यों की सक्रिय भागीदारी सुनिश्चित की जाए ताकि स्थानीय स्तर पर योजनाएं अधिक प्रभावी हो सकें।
बकाया भुगतान और एसएनए स्पर्श माड्यूल की चुनौतियां
बैठक में लंबित भुगतानों का मुद्दा भी छाया रहा। विजय चौधरी ने केंद्रीय मंत्री को अवगत कराया कि सामग्री मद (Material Head) में बकाया राशि न मिलने से कई विकास कार्य बीच में ही लटके हुए हैं। उन्होंने मांग की कि सामग्री मद की बकाया राशि शीघ्र उपलब्ध कराई जाए ताकि पूर्ण हो चुकी योजनाओं का भुगतान किया जा सके और नई योजनाओं को गति मिले। साथ ही, उन्होंने मनरेगा के लंबित मजदूरी भुगतान को ‘पूर्व की व्यवस्था’ के तहत ही मान्य रखने की अपील की, ताकि तकनीकी पेचीदगियों के कारण मजदूरों का पैसा न फंसे।
उन्होंने एसएनए स्पर्श (SNA Sparsh) माड्यूल को ‘वीबी-जी राम जी’ योजना के साथ लागू करने की चर्चा करते हुए कहा कि इसे इस तरह से डिजाइन किया जाए कि जमीनी स्तर पर भुगतान की प्रक्रिया बाधित न हो। विजय चौधरी ने यह भी प्रस्ताव दिया कि बिहार की विशिष्ट भौगोलिक और सामाजिक स्थिति को देखते हुए राज्य सरकार को कुछ ‘अनुमेय कार्यों’ (Permissible Works) को स्वयं चयनित करने की आजादी मिलनी चाहिए। इससे राज्य अपनी स्थानीय जरूरतों के अनुसार विकास मॉडल तैयार कर सकेगा।
केंद्र का जवाब: ₹17,444 करोड़ की राशि और कड़े निर्देश
बिहार की मांगों और सुझावों को सुनने के बाद केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने सकारात्मक रुख दिखाया। उन्होंने घोषणा की कि केंद्र सरकार ने देश भर के राज्यों के लिए 17 हजार 444 करोड़ रुपये की राशि निर्धारित की है, जो जल्द ही जारी कर दी जाएगी। इस राशि में पिछले वर्ष के कार्यों का बकाया भी शामिल है, जिससे बिहार जैसे राज्यों को बड़ी राहत मिलने की उम्मीद है।
शिवराज सिंह चौहान ने राज्यों को निर्देश दिया कि वे नई ‘वीबी-जी राम जी’ योजना के तहत नए जॉब कार्ड बनाने की प्रक्रिया में तेजी लाएं। उन्होंने विशेष रूप से जोर दिया कि मजदूरों की बकाया मजदूरी का भुगतान सर्वोच्च प्राथमिकता पर होना चाहिए। केंद्र सरकार का लक्ष्य है कि ग्रामीण भारत में रोजगार की गारंटी के साथ-साथ आजीविका के स्थायी साधन विकसित किए जाएं। केंद्रीय मंत्री ने यह भी स्पष्ट किया कि फंड के उपयोग में जीरो टॉलरेंस की नीति अपनाई जाएगी और सेफ्टी व क्वालिटी मानकों का कड़ाई से पालन करना होगा।
बिहार की भूमिका: अग्रणी रहने का संकल्प
बैठक के अंत में विजय चौधरी ने केंद्रीय मंत्री को आश्वस्त किया कि बिहार सरकार मनरेगा की शेष योजनाओं को पूर्ण करने और नई ‘वीबी-जी राम जी’ योजना के समयबद्ध क्रियान्वयन में अग्रणी भूमिका निभाएगी। उन्होंने कहा कि बिहार का ग्रामीण विकास विभाग पूरी तत्परता के साथ केंद्र के दिशा-निर्देशों का पालन कर रहा है। राज्य में तकनीकी निगरानी बढ़ा दी गई है और एआई (AI) आधारित रियल टाइम मॉनिटरिंग के माध्यम से गड़बड़ियों को रोका जा रहा है।
विजय चौधरी ने कहा कि बिहार सरकार का मुख्य ध्येय ग्रामीण जीवन को सुगम बनाना और मजदूरों को उनके घर के पास ही रोजगार उपलब्ध कराना है। उन्होंने उम्मीद जताई कि केंद्र सरकार बिहार के न्यूनतम मजदूरी वाले प्रस्ताव पर सहानुभूतिपूर्वक विचार करेगी। 18 अप्रैल की यह बैठक बिहार के लाखों मनरेगा मजदूरों के लिए एक नई उम्मीद लेकर आई है। यदि मजदूरी दर में बढ़ोतरी होती है, तो यह बिहार के ग्रामीण क्षेत्रों में एक बड़ी आर्थिक क्रांति की तरह होगा। फिलहाल, राज्य और केंद्र के बीच का यह प्रशासनिक तालमेल विकास की नई पटकथा लिखता नजर आ रहा है।


