पटना मेट्रो के ‘प्रायोरिटी कॉरिडोर’ पर बढ़ा कदम! खेमनीचक से मलाही पकड़ी तक हाई-लेवल चेकिंग; अब बस कुछ ही दूर है सफर

HIGHLIGHTS:

  • बड़ी खबर: मेट्रो रेल के उप-मुख्य सेवा सचिव सुधीर कुमार ने किया प्राथमिकता कॉरिडोर का गहन निरीक्षण।
  • तैयारियां: खेमनीचक से मलाही पकड़ी के बीच सुरक्षा और तकनीकी इंतजामों को परखा गया।
  • रफ़्तार: एस्केलेटर, लिफ्ट और प्लेटफॉर्म स्तर की जांच पूरी; जल्द दौड़ेगी सपनों की मेट्रो।

पटना | 11 मार्च, 2026: राजधानी पटना में मेट्रो का सपना अब हकीकत के बेहद करीब है। मेट्रो रेल को आधुनिक शहरी परिवहन के विकल्प के तौर पर पेश करने की दिशा में मंगलवार को एक बड़ा कदम उठाया गया। मेट्रो रेल कॉरपोरेशन के उप-मुख्य सेवा सचिव सुधीर कुमार ने प्राथमिकता कॉरिडोर के अंतर्गत आने वाले मलाही पकड़ी से खेमनीचक खंड का विस्तृत निरीक्षण किया। इस दौरान उन्होंने परिचालन शुरू करने से पहले की तैयारियों का जायजा लिया और स्पष्ट किया कि सुरक्षा के साथ कोई समझौता नहीं किया जाएगा।

प्लेटफॉर्म से लेकर बिजली तक… हर ‘सिस्टम’ की हुई पड़ताल

​अधिकारियों की टीम ने सुरक्षा और विश्वसनीयता के उच्चतम मानकों को सुनिश्चित करने के लिए कॉरिडोर के हर तकनीकी पहलू को बारीकी से परखा। निरीक्षण के दौरान इन महत्वपूर्ण बिंदुओं पर फोकस रहा:

  • टेक्निकल रूम: यूपीएस (UPS) कक्ष, एएसएस (ASS) कक्ष और एससीआर (SCR) कक्ष की कार्यप्रणाली की जांच की गई।
  • यात्री सुविधाएं: प्लेटफॉर्म स्तर पर यात्रियों की सुविधा, लिफ्ट और एस्केलेटर के सुचारू संचालन को सुनिश्चित किया गया।
  • ऊंचाई और फिटिंग: ओएचई (OHE) की ऊंचाई माप की समीक्षा की गई और ईएंडएम (Electrical and Mechanical) प्रणालियों के तकनीकी प्रतिष्ठानों की सावधानीपूर्वक जांच हुई।

परिचालन के लक्ष्य के करीब पटना मेट्रो

​बता दें कि पटना मेट्रो का यह खंड शहर के यातायात के दबाव को कम करने में गेम-चेंजर साबित होगा। उप-मुख्य सेवा सचिव द्वारा किए गए इस निरीक्षण ने मेट्रो को परिचालन के लक्ष्य के एक कदम और करीब ला दिया है। सुरक्षा और तकनीकी जांच के हर सफल चरण के साथ अब वह दिन दूर नहीं, जब पटनावासी ट्रैफिक जाम को छोड़कर मेट्रो की रफ़्तार का आनंद लेंगे।

VOB का नजरिया: पटना की नई लाइफलाइन के लिए ‘लिटमस टेस्ट’!

​पटना मेट्रो का मलाही पकड़ी-खेमनीचक खंड न केवल एक कॉरिडोर है, बल्कि राजधानी की नई ‘लाइफलाइन’ बनने जा रहा है। जिस तरह से हाई-लेवल अधिकारी खुद प्लेटफॉर्म और टेक्निकल रूम्स की बारीकी से जांच कर रहे हैं, उससे साफ है कि प्रशासन मेट्रो को पूरी तरह सुरक्षित और ‘फुल-प्रूफ’ बनाकर ही जनता को सौंपना चाहता है। यह निरीक्षण पटना के विकास की रफ़्तार पर मुहर लगाता है। अब सबकी नजरें इस बात पर टिकी हैं कि इस कॉरिडोर पर मेट्रो का पहला ‘ट्रायल रन’ कब होगा।

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