पटना में 3 महीने बाद मिलीं राम-जानकी और लक्ष्मण की चोरी हुई अष्टधातु मूर्तियां, गांव में गूंजे जयकारे

पटना, 18 मई 2026: बिहार की राजधानी पटना के मसौढ़ी इलाके से एक ऐसी खबर सामने आई है जिसने पूरे गांव में फिर से खुशी और आस्था का माहौल लौटा दिया है। तीन महीने पहले रामनवमी से ठीक पहले चोरी हुईं भगवान राम, माता जानकी और लक्ष्मण की अष्टधातु मूर्तियां आखिरकार बरामद हो गई हैं। जैसे ही गांव के लोगों को इसकी जानकारी मिली, पूरे इलाके में उत्सव जैसा माहौल बन गया और “जय श्री राम” के नारों से वातावरण गूंज उठा।

यह मामला मसौढ़ी प्रखंड के शाहाबाद पंचायत स्थित छाता गांव के प्रसिद्ध कल्लू ठाकुरबाड़ी राम-जानकी मंदिर से जुड़ा हुआ है। यहां से 16 मार्च 2026 की रात चोरों ने मंदिर के गर्भगृह का ताला तोड़कर तीनों प्राचीन मूर्तियां चोरी कर ली थीं। चोरी की इस घटना के बाद गांव में गहरा दुख और आक्रोश फैल गया था। ग्रामीणों के लिए यह सिर्फ मूर्तियां नहीं बल्कि उनकी आस्था, परंपरा और सांस्कृतिक पहचान का हिस्सा थीं।

जानकारी के अनुसार, सोमवार को लखनौर-बेदौली और शाहाबाद पंचायत की सीमा के पास एक संदिग्ध बाइक सवार युवक तीनों मूर्तियों को लावारिस हालत में छोड़कर फरार हो गया। स्थानीय ग्रामीणों की नजर जब उन मूर्तियों पर पड़ी तो उन्होंने तुरंत उन्हें पहचान लिया। देखते ही देखते वहां लोगों की भीड़ जमा हो गई।

ग्रामीणों ने श्रद्धा और सम्मान के साथ मूर्तियों को वापस गांव लाया। कई लोग भावुक हो गए और उनकी आंखों में खुशी के आंसू नजर आए। गांव की महिलाओं ने पारंपरिक तरीके से आरती उतारी और लोगों ने ढोल-नगाड़ों के साथ जुलूस निकालकर मूर्तियों का स्वागत किया।

मूर्तियों की बरामदगी की खबर फैलते ही पूरे छाता गांव में उत्सव जैसा माहौल बन गया। बच्चे, बुजुर्ग और महिलाएं सभी मंदिर परिसर में जमा हो गए। लंबे समय बाद गांव में फिर से धार्मिक उल्लास लौटता दिखाई दिया। कई ग्रामीणों ने कहा कि ऐसा लग रहा है मानो भगवान खुद वापस अपने घर लौट आए हों।

बताया जाता है कि चोरी हुई तीनों मूर्तियां अष्टधातु से बनी थीं और उनका कुल वजन करीब 45 किलो था। मूर्तियों पर चांदी के मुकुट भी लगे हुए थे। मंदिर कमेटी के अनुसार इन मूर्तियों की उम्र लगभग 100 वर्ष से अधिक बताई जाती है और इनका धार्मिक महत्व अत्यंत विशेष है।

गांव के लोगों का कहना है कि मंदिर से इन मूर्तियों की चोरी के बाद पूरा इलाका शोक में डूब गया था। रामनवमी जैसे महत्वपूर्ण पर्व से पहले हुई इस घटना ने ग्रामीणों की आस्था को गहरी चोट पहुंचाई थी। कई दिनों तक मंदिर में सन्नाटा पसरा रहा और लोग लगातार मूर्तियों की बरामदगी की प्रार्थना कर रहे थे।

मसौढ़ी थानाध्यक्ष विवेक भारती ने बताया कि चोरी की घटना के बाद पुलिस लगातार जांच और छापेमारी कर रही थी। पुलिस टीम विभिन्न संभावित ठिकानों पर दबिश दे रही थी और संदिग्ध लोगों से पूछताछ की जा रही थी। उन्होंने कहा कि पुलिस की लगातार कार्रवाई और दबाव के कारण चोर मूर्तियों को छोड़कर भागने पर मजबूर हो गए।

थानाध्यक्ष ने कहा कि मंदिर कमेटी के सचिव मुनदेव सिंह के बयान पर पहले ही अज्ञात चोरों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज कर ली गई थी। पुलिस अब यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि चोरी की वारदात में कौन-कौन लोग शामिल थे और मूर्तियों को कहां छिपाकर रखा गया था।

पुलिस सूत्रों के अनुसार, मामले की जांच अभी भी जारी है और चोरों की पहचान करने के लिए तकनीकी साक्ष्यों और स्थानीय इनपुट की मदद ली जा रही है। अधिकारियों का कहना है कि जल्द ही इस मामले में कुछ महत्वपूर्ण खुलासे हो सकते हैं।

इधर, मूर्तियों की वापसी के बाद मंदिर कमेटी और पंचायत प्रतिनिधि अब विधिवत पुनः स्थापना की तैयारी में जुट गए हैं। पंचायत मुखिया रवि प्रकाश और मंदिर कमेटी के अध्यक्ष अखिलेश कुमार सिंह ने बताया कि जल्द ही वैदिक रीति-रिवाजों के साथ मूर्तियों की प्राण-प्रतिष्ठा कराई जाएगी।

उन्होंने कहा कि गांव के लोग चाहते हैं कि पूरे धार्मिक विधि-विधान के साथ मंदिर में पूजा-पाठ फिर से शुरू हो। इसके लिए विशेष पूजा और अनुष्ठान की तैयारी की जा रही है। आसपास के गांवों से भी बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं के आने की संभावना जताई जा रही है।

कल्लू ठाकुरबाड़ी मंदिर का इतिहास भी गांव के लोगों के लिए बेहद खास माना जाता है। मंदिर कमेटी के अनुसार इसकी स्थापना वर्ष 1935 में हुई थी और तब से यह मंदिर गांव की धार्मिक आस्था का प्रमुख केंद्र बना हुआ है। यहां हर वर्ष रामनवमी, जन्माष्टमी और अन्य धार्मिक आयोजनों में बड़ी संख्या में लोग शामिल होते हैं।

ग्रामीणों का कहना है कि इन मूर्तियों के साथ उनकी भावनात्मक यादें जुड़ी हुई हैं। कई पीढ़ियों से लोग इन्हीं मूर्तियों की पूजा करते आ रहे हैं। यही वजह है कि चोरी की घटना ने पूरे गांव को झकझोर कर रख दिया था।

विशेषज्ञों का मानना है कि प्राचीन अष्टधातु मूर्तियां चोरी करने वाले गिरोह अक्सर धार्मिक स्थलों को निशाना बनाते हैं, क्योंकि ऐसी मूर्तियों की अंतरराष्ट्रीय बाजार में भारी कीमत मिलती है। हालांकि इस मामले में पुलिस दबाव के कारण चोर अपने मंसूबों में सफल नहीं हो पाए।

फिलहाल गांव में खुशी का माहौल है और लोग इसे आस्था की जीत मान रहे हैं। मंदिर परिसर में लगातार भजन-कीर्तन और पूजा-पाठ का माहौल बना हुआ है। कई ग्रामीणों ने कहा कि उन्हें विश्वास था कि भगवान एक दिन जरूर वापस लौटेंगे।

अब पूरे गांव की नजर जल्द होने वाली प्राण-प्रतिष्ठा और विशेष पूजा कार्यक्रम पर टिकी हुई है। ग्रामीण चाहते हैं कि मंदिर में फिर से वही पुराना धार्मिक वातावरण लौट आए, जो चोरी की घटना के बाद अचानक खत्म हो गया था।

  • ये भी पढ़े..

    पटना हाईकोर्ट सख्त: बेऊर में अतिक्रमण और जलजमाव मामले पर सरकार से मांगी रिपोर्ट, अधिकारियों की कार्यशैली पर उठाए सवाल

    Share Add as a preferred…