पटना: बांका एक्सप्रेस में कथावाचक पर गुंडागर्दी का आरोप; सीट विवाद में यात्री को पीटा और छीनी सोने की चेन

  • ​राजेंद्र नगर टर्मिनल पर राजेंद्र नगर-बांका एक्सप्रेस में सीट कब्जे को लेकर हुआ खूनी विवाद; खुद को कथावाचक बताने वाले व्यक्ति पर मारपीट और लूट का आरोप।
  • ​वैशाली के यात्री अंजनी सिंह ने बांका के कथावाचक अवधेश आचार्य महाराज के खिलाफ राजेंद्र नगर जीआरपी में दर्ज कराई प्राथमिकी।
  • ​टीटीई के हस्तक्षेप के बाद भी नहीं माना आरोपी; ट्रेन खुलते ही यात्री को नीचे पटक कर पीटा और गले से सोने की चेन उड़ा ली।
  • ​घटना 27 मार्च की है, लेकिन पीड़ित ने हिम्मत जुटाकर 6 अप्रैल को दर्ज कराया मामला; पुलिस सीसीटीवी और एस्कॉर्ट पार्टी से ले रही जानकारी।
  • ​धार्मिक चोले में छिपे इस कथित गुंडागर्दी ने रेल यात्रियों की सुरक्षा और ट्रेन के भीतर कानून-व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

पटना।

धर्म की आड़ में दुस्साहस: जब कथावाचक बना ‘लुटेरा’

रेलवे स्टेशन और ट्रेनों के भीतर यात्रियों के बीच सीट को लेकर होने वाली कहासुनी कोई नई बात नहीं है, लेकिन जब कोई खुद को समाज का मार्गदर्शक और आध्यात्मिक गुरु यानी ‘कथावाचक’ कहे और फिर हिंसक वारदात को अंजाम दे, तो यह हैरान करने वाला होता है। पटना के राजेंद्र नगर टर्मिनल पर एक ऐसी ही सनसनीखेज घटना सामने आई है, जहाँ राजेंद्र नगर-बांका एक्सप्रेस में एक यात्री को महज इसलिए लहूलुहान कर दिया गया क्योंकि उसने अपनी आवंटित सीट पर बैठने की कोशिश की थी। यह विवाद इतना बढ़ गया कि आरोपी ने न केवल मारपीट की, बल्कि यात्री के गले से सोने की चेन भी छीन ली। इस घटना ने एक बार फिर यह साबित कर दिया है कि अपराधी किसी भी चोले में हो सकते हैं और रेल यात्रा के दौरान सर्तकता कितनी आवश्यक है।

पीड़ित की आपबीती: वैशाली से बांका तक का वह खौफनाक सफर

इस पूरी वारदात के केंद्र में अंजनी सिंह हैं, जो मूल रूप से वैशाली जिले के वीरपुर के रहने वाले हैं। अंजनी सिंह बांका के बौंसी स्थित एक शैक्षणिक संस्थान में कार्यरत हैं और अपनी ड्यूटी पर जाने के लिए नियमित रूप से ट्रेन का सहारा लेते हैं। 27 मार्च की शाम को वे बांका जाने के लिए अपने बेटे के साथ राजेंद्र नगर टर्मिनल पहुँचे थे। उनके पास राजेंद्र नगर-बांका एक्सप्रेस के बोगी संख्या बी-4 में आरक्षित टिकट था। खुशी-खुशी अपने सफर की शुरुआत करने वाले अंजनी सिंह को इस बात का जरा भी अंदाजा नहीं था कि अगले कुछ मिनट उनके जीवन के सबसे तनावपूर्ण क्षणों में से एक होने वाले हैं।

सीट पर कब्जे का विवाद और टीटीई की बेअसर मध्यस्थता

अंजनी सिंह जब अपनी निर्धारित सीट पर पहुँचे, तो उन्होंने देखा कि वहां पहले से ही एक व्यक्ति कब्जा जमाए बैठा है। जब उन्होंने विनम्रतापूर्वक अपनी सीट खाली करने का अनुरोध किया, तो सामने बैठा व्यक्ति आगबबूला हो गया। उसने सीट छोड़ने के बजाय अंजनी सिंह को धमकाना शुरू कर दिया। विवाद बढ़ता देख आसपास के यात्री जमा हो गए और ट्रेन में ड्यूटी पर तैनात टीटीई (TTE) भी मौके पर पहुँचे। टीटीई ने दोनों पक्षों को समझाने की कोशिश की और अंततः नियमों का हवाला देते हुए अंजनी सिंह को उनकी सीट पर बैठा दिया। उस समय ऐसा लगा कि मामला शांत हो गया है और आरोपी ने अपनी हार स्वीकार कर ली है। लेकिन वह शांति केवल एक बड़े तूफान की आहट थी।

ट्रेन खुलते ही शुरू हुआ हमला: पसीने की जगह बहा खून

जैसे ही ट्रेन ने राजेंद्र नगर टर्मिनल से रफ्तार पकड़ी और स्टेशन के प्लेटफार्म से बाहर निकली, वैसे ही आरोपी व्यक्ति अपनी सीट से उठा और अचानक अंजनी सिंह पर हमला बोल दिया। वह व्यक्ति इतना क्रोधित था कि उसने आव देखा न ताव और अंजनी सिंह को उनकी सीट से खींचकर नीचे पटक दिया। बोगी के भीतर ही लात-घूंसों की बरसात होने लगी। आरोपी ने अंजनी सिंह को बुरी तरह पीटा और इसी छीना-झपटी के दौरान उसने पीड़ित के गले में मौजूद सोने की चेन तोड़ ली और उसे अपने पास रख लिया। शोर-शराबा सुनकर बोगी में हड़कंप मच गया। हैरानी की बात यह है कि वारदात को अंजाम देने के बाद वह व्यक्ति डरा नहीं, बल्कि फिर से उसी ठसक के साथ अपनी सीट पर जाकर बैठ गया और हंगामा जारी रखा।

एस्कॉर्ट पार्टी की लापरवाही: केवल डांट-डपट कर छोड़ा

पीड़ित अंजनी सिंह ने बताया कि हमले के बाद उन्होंने शोर मचाया तो ट्रेन की एस्कॉर्ट पार्टी (जीआरपी जवान) वहां पहुँची। लेकिन सुरक्षाकर्मियों का व्यवहार भी संतोषजनक नहीं रहा। आरोप है कि पुलिस कर्मियों ने मामले की गंभीरता को समझने और आरोपी को हिरासत में लेने के बजाय उसे केवल डांट-डपट कर छोड़ दिया। उस समय आरोपी ने अपनी पहचान बांका निवासी कथावाचक अवधेश आचार्य महाराज के रूप में दी थी। पुलिस की इस ढुलमुल कार्यशैली की वजह से पीड़ित को उस समय न्याय नहीं मिल सका और उसे डरे हुए माहौल में ही अपनी यात्रा पूरी करनी पड़ी।

देर से दर्ज हुई प्राथमिकी: डर और न्याय के बीच का संघर्ष

घटना 27 मार्च की थी, लेकिन अंजनी सिंह इतने डरे हुए थे या शायद उन्हें लगा कि मामला उलझ जाएगा, इसलिए उन्होंने तुरंत केस दर्ज नहीं कराया। लेकिन अन्याय के विरुद्ध अपनी आवाज बुलंद करते हुए उन्होंने 6 अप्रैल को राजेंद्र नगर जीआरपी (रेल थाना) में लिखित शिकायत दर्ज कराई। पुलिस ने इस मामले को गंभीरता से लेते हुए कथावाचक अवधेश आचार्य महाराज के खिलाफ नामजद प्राथमिकी दर्ज कर ली है। जीआरपी अब उन जवानों से भी पूछताछ कर रही है जो उस रात ट्रेन में एस्कॉर्ट ड्यूटी पर तैनात थे। सवाल यह भी उठ रहा है कि अगर ट्रेन में पुलिस मौजूद थी, तो चेन छीनने और मारपीट करने वाले को मौके पर ही गिरफ्तार क्यों नहीं किया गया?

कथावाचक का दोहरा चेहरा: प्रवचन या प्रहार?

इस मामले का सबसे दुखद पहलू आरोपी का पेशा है। समाज में कथावाचकों को सम्मान की दृष्टि से देखा जाता है, क्योंकि वे शांति, संतोष और नैतिकता का पाठ पढ़ाते हैं। लेकिन अवधेश आचार्य महाराज पर लगे इन आरोपों ने इस छवि को गहरा धक्का पहुँचाया है। एक आरक्षित सीट के लिए किसी की जान जोखिम में डालना और लूटपाट करना किसी भी सभ्य समाज के लिए स्वीकार्य नहीं है। यदि आरोपी वास्तव में एक धार्मिक व्यक्तित्व है, तो उसका यह आचरण उसकी दी गई शिक्षाओं के बिल्कुल विपरीत है। पुलिस अब इस बात की भी जांच कर रही है कि क्या वह व्यक्ति वास्तव में कोई प्रतिष्ठित कथावाचक है या केवल पहचान छिपाने के लिए इस नाम का उपयोग कर रहा था।

रेलवे सुरक्षा पर फिर उठे सवाल

राजेंद्र नगर-बांका एक्सप्रेस जैसी महत्वपूर्ण ट्रेनों में भी अगर यात्री अपनी आरक्षित सीटों पर सुरक्षित नहीं हैं, तो यह रेलवे प्रशासन की बड़ी विफलता है। सीट के विवादों का हिंसक मोड़ लेना और चेन स्नेचिंग जैसी घटनाएं यह दर्शाती हैं कि बोगियों के भीतर असामाजिक तत्वों का मनोबल बढ़ा हुआ है। यात्रियों की मांग है कि ट्रेनों में एस्कॉर्ट पार्टी की संख्या बढ़ाई जाए और विवाद की स्थिति में त्वरित और कड़ी कानूनी कार्रवाई की जाए। अंजनी सिंह के साथ हुई इस घटना ने उन हजारों यात्रियों के मन में असुरक्षा का भाव भर दिया है जो रात के समय सफर करते हैं।

पुलिस की जांच और न्याय की उम्मीद

फिलहाल, राजेंद्र नगर जीआरपी ने मामले की जांच तेज कर दी है। पुलिस उस रात के टीटीई और गवाहों के बयान दर्ज कर रही है। सीसीटीवी फुटेज को भी खंगाला जा रहा है ताकि घटना की सत्यता की पुष्टि की जा सके। अवधेश आचार्य महाराज की गिरफ्तारी के लिए बांका पुलिस से भी संपर्क साधा जा सकता है। अंजनी सिंह को उम्मीद है कि कानून अपना काम करेगा और उनके साथ हुए इस अपमान और आर्थिक नुकसान की भरपाई होगी। ‘द वॉयस ऑफ बिहार’ इस खबर पर अपनी पैनी नजर बनाए हुए है और प्रशासन से यह अपील करता है कि ट्रेनों में गुंडागर्दी करने वाले चाहे किसी भी ओहदे या चोले में हों, उन्हें बख्शा न जाए।

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