पटना: पटना हाईकोर्ट की एकलपीठ ने श्याम जी मिश्रा को दोषी ठहराने और सात वर्ष की सश्रम कारावास की सजा देने वाले सत्र न्यायालय, बक्सर के आदेश को रद्द कर दिया। कोर्ट ने कहा कि उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर दोषसिद्धि को बरकरार रखना न्यायसंगत नहीं होगा। यह फैसला डुमरांव थाना, केस संख्या 27/2012 से संबंधित है।
मामले का संक्षिप्त विवरण
अभियोजन के अनुसार, 22 जनवरी 2012 को कक्षा छह की नाबालिग छात्रा लापता हो गई थी। पिता ने आरोप लगाया कि स्कूल के शिक्षक ने बहला-फुसलाकर उसे अपने साथ रखा और दुष्कर्म किया। पुलिस ने भादवि की धारा 366(ए) और 376 के तहत प्राथमिकी दर्ज की। ट्रायल कोर्ट ने आरोपी को दोषी मानते हुए सात साल की सजा सुनाई थी।
हाईकोर्ट के तर्क
- एफआईआर दर्ज करने में नौ दिन की देरी को कोर्ट ने गंभीर माना और कहा कि अधिकांश अवधि का कोई संतोषजनक स्पष्टीकरण नहीं दिया गया।
- पीड़िता के धारा 164 के बयान और न्यायालय में दिए गए साक्ष्यों में विरोधाभास पाए गए।
- इन कारणों से कोर्ट ने दोषसिद्धि और सजा रद्द कर दी।
निष्कर्ष
हाईकोर्ट का यह फैसला नाबालिगों के खिलाफ अपराधों में साक्ष्यों की सटीकता और एफआईआर की समयबद्धता की अहमियत को रेखांकित करता है।


