पटना हाईकोर्ट ने अभ्यर्थी को दी राहत, बीपीएससी का तीन साल का प्रतिबंध आदेश रद्द

70वीं संयुक्त प्रारंभिक परीक्षा में शामिल उम्मीदवार अब आगामी परीक्षा दे सकेगा

पटना, 11 सितंबर।बिहार की पटना हाईकोर्ट ने बीपीएससी (BPSC) की 70वीं संयुक्त प्रारंभिक परीक्षा से जुड़ा बड़ा फैसला सुनाया है। कोर्ट ने आयोग द्वारा लगाए गए तीन साल के प्रतिबंध आदेश को निरस्त कर दिया। इस फैसले से प्रभावित अभ्यर्थी को अब आगामी परीक्षाओं में शामिल होने का अवसर मिलेगा।

क्या है मामला?

याचिकाकर्ता तारकेश्वर पांडेय को बीपीएससी ने 12 दिसंबर 2024 से 12 दिसंबर 2027 तक सभी परीक्षाओं से वंचित कर दिया था।

  • आयोग का यह आदेश 19 फरवरी 2025 को जारी किया गया था।
  • आरोप था कि परीक्षा के दिन प्रश्नपत्र आधे घंटे की देरी से बांटे जाने को लेकर अभ्यर्थी का बयान मीडिया में विवादित रूप से वायरल हुआ।
  • याचिकाकर्ता का कहना था कि उनका बयान संपादित क्लिप के आधार पर गलत ढंग से प्रस्तुत किया गया और आयोग ने बिना उनकी विस्तृत सफाई पर विचार किए कठोर कार्रवाई कर दी।

कोर्ट का फैसला

  • जस्टिस संदीप कुमार की पीठ ने इस आदेश को तर्कहीन और न्याय के सिद्धांतों के विपरीत बताया।
  • कोर्ट ने कहा कि किसी भी दंडात्मक कार्रवाई में कारणों का स्पष्ट उल्लेख जरूरी है।
  • सुप्रीम कोर्ट के फैसलों का हवाला देते हुए अदालत ने कहा कि बीपीएससी का यह कदम न्यायसंगत नहीं है।

राहत अभ्यर्थी को

कोर्ट ने आयोग का आदेश रद्द करते हुए याचिकाकर्ता को आगामी बीपीएससी परीक्षाओं में शामिल होने की अनुमति दे दी।

बीपीएससी और उसका महत्व

बीपीएससी बिहार राज्य का प्रमुख भर्ती आयोग है, जो प्रशासनिक सेवाओं और अन्य सरकारी पदों पर भर्ती के लिए परीक्षाओं का आयोजन करता है। परीक्षा प्रक्रिया में निष्पक्षता और पारदर्शिता बनाए रखना आयोग की जिम्मेदारी है।

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