द वॉयस ऑफ बिहार | पटना (ब्यूरो)
बिहार सरकार ने अनुसूचित जाति और जनजाति (SC-ST) के कल्याण के लिए अब ‘फाइलों’ से निकलकर ‘फिल्ड’ में उतरने का ब्लूप्रिंट तैयार कर लिया है। पटना में बुधवार को हुई एक हाई-लेवल रिव्यू मीटिंग में एससी-एसटी कल्याण मंत्री लखेंद्र कुमार रौशन ने आयोग के सदस्यों और अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए हैं।
मंत्री ने दो टूक कहा है कि आयोग के सदस्य अब सिर्फ पटना ऑफिस में नहीं बैठेंगे, बल्कि उन्हें सुदूर देहात के उन टोलों (बस्तियों) में जाना होगा जहां आज भी योजनाएं दम तोड़ रही हैं। सबसे बड़ी सख्ती प्राइवेट स्कूलों में एडमिशन को लेकर दिखाई गई है।
खबर के 3 बड़े मायने: मंत्री की बैठक का ‘इनसाइड’
- ग्राउंड रियलिटी चेक: सरकार को शक है कि कागजों में जो ‘सब चंगा सी’ बताया जा रहा है, जमीनी हकीकत उससे अलग है। इसलिए अब आयोग के सदस्य खुद जाकर क्रॉस-चेक करेंगे।
- RTE पर फोकस: शिक्षा का अधिकार (RTE) के तहत गरीब बच्चों का कोटा प्राइवेट स्कूलों में होता है, लेकिन जानकारी के अभाव में सीटें खाली रह जाती हैं। सरकार इसे भरना चाहती है।
- पेंडिंग शिकायतों का निपटारा: आयोग में शिकायतों का अंबार न लगे, इसके लिए जिला स्तर पर जवाबदेही तय की गई है।
1. मिशन ‘टोला’: अधिकारियों को गांव जाने का टास्क
समीक्षा बैठक में मंत्री लखेंद्र रौशन ने निर्देश दिया कि बिहार राज्य एससी-एसटी आयोग के सदस्य अब अनुसूचित जाति एवं जनजाति बहुल टोलों का दौरा करेंगे।
- क्या करना होगा? वहां जाकर देखना होगा कि सरकार की आवास, रोजगार और पेंशन जैसी योजनाएं लोगों को मिल रही हैं या नहीं।
- डेडलाइन: केवल दौरा नहीं, बल्कि समय सीमा के भीतर इसकी ‘क्षेत्रीय निरीक्षण रिपोर्ट’ विभाग को सौंपनी होगी, ताकि लापरवाह अफसरों पर गाज गिराई जा सके।
2. शिक्षा पर अल्टीमेटम: प्राइवेट स्कूलों की मनमानी नहीं चलेगी
बैठक का सबसे अहम एजेंडा शिक्षा रहा। मंत्री ने साफ कहा कि एससी-एसटी बच्चों का हक किसी भी कीमत पर मारा नहीं जाना चाहिए।
- निर्देश: विभाग समीक्षा करे कि RTE (शिक्षा का अधिकार अधिनियम) के तहत प्राइवेट स्कूलों में आरक्षित सीटों पर एससी-एसटी बच्चों का नामांकन हो रहा है या नहीं।
- लक्ष्य: मंत्री ने शत-प्रतिशत (100%) नामांकन सुनिश्चित करने का टारगेट दिया है। अधिकारियों को निर्देश है कि वे पात्र बच्चों को खोजें और उनका एडमिशन कराएं।
3. शिकायतों पर एक्शन: तारीख पर तारीख नहीं मिलेगी
अक्सर आयोग में शिकायत करने के बाद पीड़ितों को लंबा इंतजार करना पड़ता है। मंत्री ने इस सिस्टम को बदलने का आदेश दिया है।
- त्वरित निष्पादन: आयोग के पास जो भी शिकायतें आएंगी, उनका निपटारा फास्ट-ट्रैक मोड में होगा।
- जिला स्तर पर मीटिंग: अब केवल पटना में नहीं, बल्कि जिलों में भी समन्वय बैठकें होंगी ताकि स्थानीय समस्याओं का समाधान वहीं हो सके।
मंत्री का बयान: “अंतिम पायदान तक पहुंचे लाभ”
”हमारा मकसद सिर्फ योजना बनाना नहीं है, बल्कि समाज के अंतिम पायदान पर खड़े व्यक्ति तक उसका लाभ पहुंचाना है। आयोग के सदस्य संवेदनशीलता से काम करें और वंचित वर्ग की आवाज बनें।”
– लखेंद्र कुमार रौशन, मंत्री, एससी-एसटी कल्याण विभाग
द वॉयस ऑफ बिहार व्यू: सही दिशा में उठाया कदम
दलित बस्तियों में आयोग के सदस्यों का जाना एक सकारात्मक पहल है। अक्सर जागरूकता की कमी से गरीब तबका सरकारी योजनाओं से वंचित रह जाता है। अगर मंत्री के निर्देशानुसार प्राइवेट स्कूलों में गरीब बच्चों का दाखिला सुनिश्चित हो पाता है, तो यह एक पीढ़ी को बदलने वाला कदम साबित होगा। चुनौती बस यही है कि यह आदेश फाइलों में न दब जाए, बल्कि जमीन पर इसका असर दिखे।
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