​पटना में जज की पत्नी से साइबर ठगी: बिजली बिल के नाम पर उड़ाए 55 हजार

पटना। बिहार की राजधानी में साइबर अपराधियों के हौसले इतने बुलंद हो चुके हैं कि अब न्यायपालिका से जुड़े परिवारों को भी निशाना बनाने में उन्हें कोई हिचक नहीं हो रही है। पटना के सुरक्षित और वीआईपी इलाकों में गिने जाने वाले क्षेत्रों में अब डिजिटल सेंधमारी का खतरा बढ़ गया है। ताजा मामला पटना सिविल कोर्ट के एक जज के परिवार से जुड़ा है, जहाँ साइबर जालसाजों ने बिजली बिल भुगतान के नाम पर जज की पत्नी के बैंक खाते से 55 हजार रुपये पार कर दिए। यह घटना केवल एक वित्तीय ठगी नहीं है, बल्कि यह उस तकनीकी जाल की ओर इशारा करती है जिसमें अनजाने में बच्चे और परिवार के अन्य सदस्य फंस रहे हैं। अपराधियों ने इस बार ‘एपीके फाइल’ (APK File) का सहारा लेकर मोबाइल फोन को हैक किया और पलक झपकते ही गाढ़ी कमाई पर हाथ साफ कर दिया। इस हाई-प्रोफाइल मामले के सामने आने के बाद पटना पुलिस और साइबर सेल में हड़कंप मच गया है। साइबर थाने के डीएसपी नीतीश चंद्र धारिया ने मामले की पुष्टि करते हुए जांच शुरू कर दी है।

ठगी का जाल: बिजली कटने का डर और फर्जी कॉल

​घटना की शुरुआत एक सामान्य फोन कॉल से हुई। साइबर अपराधी ने जज की पत्नी को फोन किया और खुद को बिजली विभाग का अधिकारी बताया। कॉल करने वाले ने बहुत ही पेशेवर अंदाज में बात करते हुए चेतावनी दी कि उनका बिजली बिल लंबे समय से बकाया है। अपराधियों ने मनोवैज्ञानिक दबाव बनाने के लिए यह भी कहा कि यदि अगले कुछ घंटों में बिल का भुगतान नहीं किया गया, तो विभाग तुरंत उनके घर का बिजली कनेक्शन काट देगा।

​आम तौर पर बिजली कटने के डर से लोग घबरा जाते हैं, और इसी घबराहट का फायदा अपराधियों ने उठाया। जब जज की पत्नी ने बिल जमा करने की ऑनलाइन प्रक्रिया पूछी, तो जालसाज ने उन्हें झांसे में लेते हुए कहा कि वह व्हाट्सएप पर एक फाइल भेज रहा है, जिसके जरिए वे सीधे भुगतान कर सकती हैं। अपराधियों ने व्हाट्सएप पर एक एपीके (APK) फाइल भेजी। अनजाने में घर के बच्चों ने उस फाइल को डाउनलोड कर लिया और अपराधी द्वारा बताई गई प्रक्रिया को पूरा करने लगे। जैसे ही वह फाइल मोबाइल में इंस्टॉल हुई, फोन का पूरा कंट्रोल अपराधियों के पास चला गया।

टेक्निकल ट्रैप: कैसे काम करती है एपीके फाइल?

​साइबर विशेषज्ञों के अनुसार, एपीके फाइलें अक्सर एंड्रॉइड फोन के लिए एक खतरनाक हथियार की तरह इस्तेमाल की जाती हैं। यह कोई सामान्य एप नहीं होता जो प्ले स्टोर पर उपलब्ध हो। जैसे ही कोई व्यक्ति इस तरह की फाइल को डाउनलोड कर इंस्टॉल करता है, यह फोन के ऑपरेटिंग सिस्टम में ‘बैकडोर एंट्री’ कर लेती है। इसके बाद अपराधी दूर बैठकर भी मोबाइल की स्क्रीन देख सकते हैं, कॉल सुन सकते हैं और सबसे खतरनाक बात यह कि वे बैंक के ओटीपी (OTP) को भी अपने सिस्टम पर देख सकते हैं।

​जज की पत्नी के मामले में भी यही हुआ। जैसे ही बच्चों ने वह प्रक्रिया पूरी की, अपराधियों ने मोबाइल को रिमोट एक्सेस पर ले लिया और बैंक खाते से जुड़ी जानकारियां हासिल कर लीं। कुछ ही मिनटों में खाते से 55 हजार रुपये निकाल लिए गए। जब मोबाइल पर मैसेज आया, तब परिवार को इस बड़ी ठगी का अहसास हुआ। पुलिस अब उस व्हाट्सएप नंबर और आईपी एड्रेस को ट्रैक करने में जुटी है जिसके जरिए यह फाइल भेजी गई थी।

दूसरा शिकार: एसके पुरी में फर्जी एसईओ बनकर ठगी

​पटना में साइबर अपराधियों का आतंक केवल जज के परिवार तक सीमित नहीं रहा। उसी दिन राजधानी के एसके पुरी थाना क्षेत्र के निवासी शशिकांत के साथ भी लगभग इसी अंदाज में ठगी की गई। यहाँ भी अपराधी ने खुद को बिजली कंपनी का एसडीओ (SDO) बताया। शशिकांत को कॉल कर डराया गया कि उनका बिजली बिल अपडेट नहीं है और कनेक्शन काटने की टीम उनके घर के लिए निकल चुकी है।

​शशिकांत ने जब इस समस्या का समाधान पूछा, तो जालसाज ने उन्हें एक लिंक भेजा या प्रक्रिया में उलझाकर उनके बैंक खाते की गोपनीय जानकारी हासिल कर ली। देखते ही देखते शशिकांत के खाते से 25 हजार रुपये उड़ा लिए गए। शशिकांत ने तुरंत साइबर हेल्पलाइन पर अपनी शिकायत दर्ज कराई है। एक ही दिन में दो अलग-अलग इलाकों में बिजली बिल के नाम पर हुई इन ठगियों ने यह साबित कर दिया है कि साइबर अपराधियों का एक संगठित गिरोह पटना में सक्रिय है जो सरकारी अधिकारियों के नाम का दुरुपयोग कर रहा है।

साइबर पुलिस की कार्रवाई और डीएसपी का बयान

​इन दोनों मामलों की गंभीरता को देखते हुए पटना साइबर थाने में केस दर्ज कर लिया गया है। साइबर थाने के डीएसपी नीतीश चंद्र धारिया ने बताया कि पुलिस टीम तकनीकी साक्ष्यों को इकट्ठा कर रही है। डीएसपी ने कहा कि इस तरह के अपराधों में अक्सर अपराधियों के तार जामताड़ा या नवादा जैसे इलाकों से जुड़े होते हैं, जहाँ से वे फर्जी सिम कार्ड और वर्चुअल आईडी के जरिए लोगों को कॉल करते हैं।

​पुलिस अब उन बैंक खातों को फ्रीज (Freeze) कराने की कोशिश कर रही है, जिनमें ठगी की राशि ट्रांसफर की गई है। नीतीश चंद्र धारिया ने जनता से अपील की है कि वे किसी भी अज्ञात नंबर से आए कॉल पर विश्वास न करें, खासकर तब जब कॉल करने वाला बिजली बिल या बैंक अपडेट के नाम पर डराने की कोशिश करे। पुलिस का कहना है कि बिजली विभाग कभी भी व्हाट्सएप पर एपीके फाइल भेजकर भुगतान करने के लिए नहीं कहता है।

सावधानी ही बचाव: इन बातों का रखें विशेष ध्यान

​साइबर अपराधियों से बचने के लिए नागरिकों को अपनी डिजिटल आदतों में बदलाव करने की जरूरत है। विशेषज्ञों ने कुछ महत्वपूर्ण सुझाव दिए हैं जिन्हें अपनाकर इस तरह की ठगी से बचा जा सकता है:

  • अज्ञात लिंक और फाइलें: कभी भी व्हाट्सएप या किसी अन्य मैसेजिंग एप पर आई अज्ञात फाइलों (विशेषकर .apk एक्सटेंशन वाली) को डाउनलोड न करें।
  • आधिकारिक एप का प्रयोग: बिजली बिल का भुगतान हमेशा विभाग की आधिकारिक वेबसाइट या ‘बिहार बिजली स्मार्ट मीटर’ जैसे प्रामाणिक एप के जरिए ही करें।
  • कर्मचारी की पहचान: यदि कोई खुद को विभाग का अधिकारी बताता है, तो उसकी बातों पर तुरंत यकीन करने के बजाय स्थानीय बिजली कार्यालय में जाकर पुष्टि करें।
  • ओटीपी शेयर न करें: बैंक या बिजली विभाग कभी भी आपसे आपका पासवर्ड या ओटीपी नहीं मांगता है।
  • बच्चों की निगरानी: बच्चों को मोबाइल देते समय यह सुनिश्चित करें कि वे किसी अज्ञात लिंक पर क्लिक न करें, क्योंकि वे अक्सर तकनीकी खतरों को नहीं समझ पाते हैं।

पटना में बढ़ता साइबर क्राइम का ग्राफ

​पटना पिछले कुछ समय से साइबर अपराधियों का पसंदीदा केंद्र बनता जा रहा है। यहाँ की पढ़ी-लिखी आबादी और बढ़ता डिजिटल लेनदेन अपराधियों के लिए आसान निशाना बन गया है। जज की पत्नी से हुई ठगी यह बताती है कि अपराधी अब यह नहीं देखते कि सामने वाला व्यक्ति कितना शक्तिशाली है, वे केवल सुरक्षा की कमियों (Loophole) का फायदा उठाते हैं।

​राजधानी के विभिन्न थानों में हर दिन औसतन 5 से 10 साइबर ठगी की शिकायतें पहुँच रही हैं। हालांकि, पुलिस ने साइबर थाना बनाकर इस पर लगाम लगाने की कोशिश की है, लेकिन अपराधियों के रोज बदलते तरीके पुलिस के लिए भी चुनौती बने हुए हैं। कभी केवाईसी (KYC) अपडेट के नाम पर, तो कभी लकी ड्रा के नाम पर लोगों को ठगा जा रहा है। अब बिजली बिल वाला यह नया ट्रेंड लोगों के लिए सिरदर्द बन गया है।

शिकायत के लिए तुरंत डायल करें 1930

​यदि आपके साथ या आपके किसी परिचित के साथ साइबर ठगी होती है, तो समय बहुत महत्वपूर्ण होता है। ठगी के शुरुआती एक-दो घंटों को ‘गोल्डन ऑवर’ कहा जाता है। इस दौरान यदि आप नेशनल साइबर हेल्पलाइन नंबर 1930 पर कॉल करते हैं या www.cybercrime.gov.in पर शिकायत दर्ज कराते हैं, तो आपके पैसे वापस मिलने की संभावना बढ़ जाती है। शशिकांत ने इसी हेल्पलाइन का सहारा लिया है, जिससे पुलिस को उनके पैसे ट्रैक करने में आसानी होगी।

​जज की पत्नी और शशिकांत के साथ हुई यह घटनाएं हम सभी के लिए एक चेतावनी हैं। डिजिटल इंडिया के दौर में सुविधानों के साथ-साथ खतरों ने भी दस्तक दे दी है। सजगता ही वह एकमात्र हथियार है जिससे हम अपनी गाढ़ी कमाई को इन अदृश्य लुटेरों से बचा सकते हैं। पटना पुलिस का साइबर दस्ता अब अपराधियों की तलाश में छापेमारी कर रहा है और उम्मीद है कि जल्द ही इस रैकेट का पर्दाफाश होगा।

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