पटना में ‘लुटेरा ऑटो’ गैंग का पर्दाफाश: सवारी को बैरिया के बजाय सुनसान रास्ते पर ले जाकर लूटा, सीसीटीवी और ‘पुलिस कोड’ ने फंसाया चालक

पटना। बिहार की राजधानी पटना में सार्वजनिक परिवहन, विशेषकर ऑटो रिक्शा में सफर करने वाले यात्रियों की सुरक्षा पर एक बार फिर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। पटना जंक्शन जैसे भीड़भाड़ वाले केंद्र से सवारी बैठाकर उन्हें गंतव्य के बजाय अपराध की गलियों में ले जाने वाले एक शातिर ऑटो चालक के कारनामे का गर्दनीबाग पुलिस ने भंडाफोड़ किया है। बुधवार की इस वारदात ने न केवल पुलिस की मुस्तैदी को परखा, बल्कि यह भी साबित किया कि तकनीकी निगरानी और वाहनों पर अंकित ‘पुलिस कोड’ अपराधियों के लिए काल साबित हो सकते हैं। अररिया से आए एक बेबस यात्री को बंधक बनाकर लूटने और विरोध करने पर उसे बेरहमी से पीटने वाले ऑटो चालक को पुलिस ने सलाखों के पीछे पहुँचा दिया है। हालांकि, इस घटना का दूसरा मुख्य आरोपी अभी भी फरार है, जिसकी तलाश में पुलिस की टीमें छापेमारी कर रही हैं। यह घटना उन हजारों यात्रियों के लिए एक बड़ी चेतावनी है जो देर शाम या अनजान रास्तों पर ऑटो चालकों पर आंख मूंदकर भरोसा कर लेते हैं।

अररिया से पटना: एक यात्री का डरावना सफर

​इस पूरी वारदात का शिकार अररिया जिले के रहने वाले श्यामदेव मल्ला बने। वे बुधवार को किसी काम से पटना आए थे और पटना जंक्शन पर उतरे थे। उन्हें जंक्शन से बैरिया (बस स्टैंड) जाना था। जंक्शन के बाहर लगी ऑटो की कतार में वे एक ऑटो पर सवार हुए, यह सोचकर कि कुछ ही समय में वे अपने गंतव्य तक पहुँच जाएंगे। लेकिन उन्हें जरा भी आभास नहीं था कि जिस ऑटो में वे बैठ रहे हैं, उसका चालक सवारी ढोने के नाम पर ‘शिकार’ की तलाश में है।

​जैसे ही ऑटो जंक्शन से आगे बढ़ा, चालक ने अपनी नीयत बदल ली। बैरिया जाने के सीधे रास्ते के बजाय, चालक ऑटो को अनीसाबाद की ओर मोड़ ले गया। जब श्यामदेव ने रास्ता भटकने पर सवाल उठाया, तो चालक ने ट्रैफिक या शॉर्टकट का बहाना बनाकर उन्हें गुमराह किया। पीड़ित के अनुसार, चालक उसे काफी देर तक शहर की गलियों में इधर-उधर घुमाता रहा, ताकि वह दिशा भ्रमित हो जाए और मौका पाकर उसे किसी सुनसान इलाके में ले जाया जा सके।

सुनसान गलियों में खूनी खेल: लूटपाट और मारपीट

​काफी देर तक शहर में चक्कर काटने के बाद, ऑटो चालक उसे अनीसाबाद क्षेत्र के एक बेहद सुनसान और निर्जन स्थान पर ले गया। वहां पहुँचते ही चालक का असली चेहरा सामने आ गया। ऑटो में पहले से ही चालक का एक साथी मौजूद था, जो बदमाश की भूमिका में था। उन दोनों ने मिलकर श्यामदेव मल्ला को घेर लिया और उनके पास मौजूद सामान की मांग करने लगे।

​जब श्यामदेव ने अपने मेहनत की कमाई और सामान देने से इनकार किया और विरोध जताया, तो अपराधियों ने क्रूरता की सारी हदें पार कर दीं। चालक और उसके साथी ने मिलकर यात्री की बेरहमी से पिटाई शुरू कर दी। मारपीट के दौरान श्यामदेव को काफी चोटें आईं। अंततः डरे-सहमे यात्री को अपनी जान बचाने के लिए झुकना पड़ा। लुटेरों ने उनसे पीतल के पाइप सहित अन्य कीमती सामान और नकदी छीन ली। वारदात को अंजाम देने के बाद, दोनों बदमाश यात्री को वहीं घायल अवस्था में छोड़कर अपने ऑटो के साथ फरार हो गए।

पुलिस कोड और सीसीटीवी: ऐसे खुला राज

​घायल अवस्था में श्यामदेव मल्ला किसी तरह गर्दनीबाग थाना पहुँचे और पुलिस को आपबीती सुनाई। उनकी शिकायत पर पुलिस तुरंत एक्शन मोड में आई। पटना में ऑटो रिक्शा पर सुरक्षा के दृष्टिकोण से प्रशासन द्वारा एक विशिष्ट ‘पुलिस कोड’ अनिवार्य किया गया है। पीड़ित ने धुंधली यादों के आधार पर उस कोड का कुछ हिस्सा और ऑटो की बनावट के बारे में जानकारी दी।

​थानेदार प्रमोद कुमार के नेतृत्व में पुलिस की एक विशेष टीम ने तुरंत जंक्शन से लेकर अनीसाबाद तक के मार्ग पर लगे सीसीटीवी कैमरों की फुटेज खंगालनी शुरू की। कैमरों में एक संदिग्ध ऑटो दिखाई दिया, जिस पर लिखे पुलिस कोड और हुलिए का मिलान पीड़ित के बयान से हो गया। पुलिस ने डेटाबेस की मदद से उस कोड वाले वाहन के मालिक और चालक का ब्योरा निकाला। तकनीकी अनुसंधान और मुखबिरों की सूचना के आधार पर पुलिस ने उस इलाके की घेराबंदी की जहाँ ऑटो के छिपे होने की संभावना थी। कड़ी मशक्कत के बाद पुलिस ने न केवल उस ‘लुटेरे ऑटो’ को जब्त किया, बल्कि उसके चालक को भी दबोच लिया।

आरोपी की पहचान: फुलवारीशरीफ का ‘इसापुर’ कनेक्शन

​गिरफ्तार किए गए ऑटो चालक की पहचान मो. शाहजाद के रूप में हुई है। वह फुलवारीशरीफ के इसापुर इलाके का रहने वाला है। पूछताछ के दौरान शाहजाद ने अपना जुर्म स्वीकार कर लिया है। उसने बताया कि वह और उसका साथी अक्सर जंक्शन के आसपास ऐसे यात्रियों की तलाश करते थे जो शहर से बाहर के हों और जिन्हें रास्तों की ज्यादा जानकारी न हो।

​शाहजाद की गिरफ्तारी के बाद पुलिस को उसके दूसरे साथी के बारे में भी पुख्ता जानकारी मिल गई है। हालांकि, गिरफ्तारी की भनक लगते ही दूसरा अपराधी भागने में सफल रहा। थानेदार प्रमोद कुमार ने बताया कि दूसरे बदमाश की पहचान कर ली गई है और पुलिस की टीमें उसके संभावित ठिकानों पर लगातार दबिश दे रही हैं। पुलिस यह भी जांच कर रही है कि क्या इस गिरोह ने पहले भी इस तरह की वारदातों को अंजाम दिया है। शाहजाद के पास से लूटे गए कुछ सामान की बरामदगी के प्रयास भी किए जा रहे हैं।

पटना में ऑटो यात्रियों की सुरक्षा: प्रशासन के दावे और हकीकत

​पटना में ऑटो और ई-रिक्शा चालकों द्वारा यात्रियों के साथ दुर्व्यवहार और छिनतई की घटनाएं कोई नई बात नहीं हैं। हालांकि, जिला प्रशासन ने सुरक्षा के लिए ‘पुलिस कोड’ और ‘कॉल नंबर’ अनिवार्य किए हैं, लेकिन कई चालक इन नियमों की धज्जियां उड़ाते हैं। गर्दनीबाग की इस घटना ने यह साबित किया है कि अगर यात्री सतर्क रहे और पुलिस कोड जैसी जानकारी याद रखे, तो अपराधियों को पकड़ना आसान हो जाता है।

​सामाजिक कार्यकर्ताओं का कहना है कि जंक्शन और बस स्टैंड जैसे संवेदनशील इलाकों में पुलिस की गश्ती और अधिक प्रभावी होनी चाहिए। विशेष रूप से रात के समय या सुबह तड़के आने वाली ट्रेन के यात्रियों को निशाना बनाना इन अपराधियों का पेशा बन चुका है। पुलिस को चाहिए कि वे ऑटो चालकों का नियमित ‘वेरिफिकेशन’ (सत्यापन) करें और बिना वैध कोड के चलने वाले वाहनों पर भारी जुर्माना लगाएं। श्यामदेव मल्ला की बहादुरी और पुलिस की तकनीकी समझ के कारण आज एक लुटेरा सलाखों के पीछे है, लेकिन यह सवाल अब भी बरकरार है कि क्या पटना की सड़कों पर आम आदमी बिना डरे सफर कर पाएगा?

सावधानी ही बचाव है: यात्रियों के लिए पुलिस के सुझाव

​इस घटना के बाद पटना पुलिस ने आम नागरिकों और बाहर से आने वाले यात्रियों के लिए कुछ महत्वपूर्ण सुरक्षा सुझाव जारी किए हैं:

  1. पुलिस कोड की जांच: ऑटो में बैठने से पहले पीछे या साइड में लिखे ‘पुलिस कोड’ को जरूर देखें और संभव हो तो उसका फोटो ले लें या किसी परिजन को भेज दें।
  2. सजगता: यदि चालक तय रास्ते से अलग किसी गली या सुनसान रास्ते पर जाने लगे, तो तुरंत विरोध करें और शोर मचाएं।
  3. जीपीएस का उपयोग: स्मार्टफोन में गूगल मैप्स का उपयोग करें ताकि आप देख सकें कि आप सही रास्ते पर जा रहे हैं या नहीं।
  4. रात का सफर: बहुत देर रात को अकेले सफर करने से बचें या केवल प्रीपेड ऑटो स्टैंड से ही वाहन लें।
  5. थाने को सूचना: किसी भी अप्रिय स्थिति में तुरंत 112 नंबर डायल करें या नजदीकी थाने को सूचित करें।

​गर्दनीबाग पुलिस की इस कार्रवाई की सराहना हो रही है, क्योंकि उन्होंने महज कुछ घंटों के भीतर आरोपी को दबोच लिया। मो. शाहजाद की गिरफ्तारी यह संदेश देती है कि अपराधी चाहे कितना भी शातिर क्यों न हो, कानून के लंबे हाथों से बच नहीं सकता। अब पुलिस की अगली चुनौती फरार अपराधी की गिरफ्तारी और शहर के अन्य ऑटो लुटेरों के सिंडिकेट को ध्वस्त करना है।

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