बिहार में ‘रिजल्ट’ वाली सरकार: मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी का अधिकारियों को दो टूक—’जनता की समस्या पर चाहिए एक्शन, भ्रष्टाचार पर जीरो टॉलरेंस’

पटना। बिहार की सत्ता की कमान संभालते ही मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने अपनी कार्यशैली और प्राथमिकताओं के स्पष्ट संकेत दे दिए हैं। सचिवालय के बंद कमरों से लेकर गलियारों तक अब सिर्फ ‘सुशासन’ की गूँज नहीं, बल्कि ‘परिणाम’ की माँग सुनाई दे रही है। गुरुवार, 16 अप्रैल 2026 को मुख्यमंत्री सचिवालय में आयोजित एक उच्च स्तरीय समीक्षा बैठक के दौरान सम्राट चौधरी ने राज्य के वरिष्ठतम अधिकारियों के साथ विचार-विमर्श किया। इस बैठक का लब्बोलुआब सिर्फ एक वाक्य में सिमटा था—”मुझे रिजल्ट चाहिए।” मुख्यमंत्री ने दो टूक शब्दों में प्रशासनिक अमले को यह संदेश दे दिया है कि योजनाओं की फाइलें अब टेबल पर नहीं रेंगेंगी, बल्कि धरातल पर दौड़ेंगी। बैठक में उपमुख्यमंत्री विजय कुमार चौधरी, उपमुख्यमंत्री बिजेन्द्र प्रसाद यादव और मुख्य सचिव प्रत्यय अमृत समेत शासन के शीर्ष अधिकारी मौजूद थे। सम्राट चौधरी ने न केवल फाइलों का जायजा लिया, बल्कि सचिवालय के विभिन्न अनुभागों का पैदल निरीक्षण कर वहां की कार्य पद्धति को अपनी नजरों से परखा।

एक्शन मोड में मुख्यमंत्री: ‘काम बोलता है’ की नीति पर जोर

​मुख्यमंत्री सचिवालय के 4, देशरत्न मार्ग स्थित कार्यालय में हुई यह बैठक बिहार की नई प्रशासनिक दिशा तय करने वाली मानी जा रही है। सम्राट चौधरी ने अधिकारियों के साथ संवाद के दौरान स्पष्ट किया कि जनता ने उन्हें एक बड़ी उम्मीद के साथ सत्ता सौंपी है और उस उम्मीद पर खरा उतरने के लिए अधिकारियों को अपनी कार्यक्षमता बढ़ानी होगी। उन्होंने कहा कि विकास योजनाओं के कार्यान्वयन की जो मौजूदा गति है, वह पर्याप्त नहीं है। इसे न केवल तेज करना होगा, बल्कि यह भी सुनिश्चित करना होगा कि हर योजना का लाभ अंतिम पायदान पर खड़े व्यक्ति तक पारदर्शी तरीके से पहुँचे।

​मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को कई महत्वपूर्ण टास्क सौंपे हैं, जिनका मुख्य उद्देश्य सरकारी सेवाओं की गति में सुधार लाना है। सम्राट चौधरी का मानना है कि कागजी प्रगति रिपोर्ट से ज्यादा जरूरी जनता का संतुष्टि स्तर है। उन्होंने अधिकारियों से कहा कि वे स्वयं क्षेत्रों का दौरा करें और यह देखें कि जो रिपोर्ट मुख्यालय भेजी जा रही है, उसकी जमीनी हकीकत क्या है। सम्राट चौधरी ने साफ किया कि ‘टालमटोल’ की नीति अब सचिवालय में नहीं चलेगी।

भ्रष्टाचार के खिलाफ युद्ध: थानों की कार्यशैली पर कड़ी नजर

​बैठक का एक बड़ा हिस्सा कानून-व्यवस्था और भ्रष्टाचार पर केंद्रित रहा। सम्राट चौधरी ने भ्रष्टाचार के खिलाफ ‘प्रभावी कार्रवाई’ का निर्देश देते हुए कहा कि किसी भी स्तर पर जनता को सरकारी दफ्तरों में परेशानी नहीं होनी चाहिए। उन्होंने विशेष रूप से पुलिस थानों की कार्यप्रणाली पर नाराजगी जताते हुए निर्देश दिया कि थानों में आने वाले आम जनों की बातें सम्मानपूर्वक सुनी जाएं। उन्होंने कहा कि जनता की शिकायतों पर तत्काल कार्रवाई सुनिश्चित हो, ताकि लोगों के भीतर पुलिस और प्रशासन के प्रति विश्वास बहाल हो सके।

​मुख्यमंत्री ने गृह विभाग के अधिकारियों को निर्देश दिया कि थानों की मॉनिटरिंग के लिए एक सख्त तंत्र विकसित किया जाए। उनका कहना था कि यदि कोई गरीब व्यक्ति अपनी फरियाद लेकर थाने पहुँचता है, तो उसे न्याय की उम्मीद होनी चाहिए, न कि वहां उसे प्रताड़ना मिले। सम्राट चौधरी ने स्पष्ट किया कि भ्रष्टाचार में लिप्त पाए जाने वाले किसी भी अधिकारी या कर्मचारी को बख्शा नहीं जाएगा। “जीरो टॉलरेंस” की नीति अब केवल कागजों पर नहीं, बल्कि व्यवहार में दिखेगी।

सचिवालय का औचक निरीक्षण: व्यवस्थाओं को अपनी नजरों से देखा

​बैठक के बाद मुख्यमंत्री ने एक मिसाल पेश करते हुए सचिवालय के विभिन्न भागों का स्वयं निरीक्षण किया। वे केवल अपने वातानुकूलित कक्ष तक सीमित नहीं रहे, बल्कि गलियारों में घूमकर वहां की व्यवस्थाओं को देखा। उन्होंने सचिवालय के कर्मचारियों से उनके कामकाज के बारे में जानकारी ली और फाइलों के रख-रखाव की स्थिति देखी। निरीक्षण के दौरान उन्होंने कई अधिकारियों को मौके पर ही निर्देश दिए कि दफ्तरों की कार्य पद्धति को आधुनिक और सुगम बनाया जाए।

​सम्राट चौधरी ने सचिवालय की साफ-सफाई और आगंतुकों के लिए बैठने की व्यवस्था का भी अवलोकन किया। उन्होंने अधिकारियों से कहा कि मुख्यमंत्री सचिवालय की व्यवस्था ऐसी होनी चाहिए जो पूरे प्रदेश के सरकारी कार्यालयों के लिए एक मॉडल बन सके। उन्होंने वहां की तकनीकी सुविधाओं और डिजिटल फाइल ट्रैकिंग सिस्टम के बारे में भी विस्तृत जानकारी ली। सम्राट चौधरी ने निर्देश दिया कि सचिवालय में जो भी लोग अपनी समस्या लेकर आते हैं, उनके लिए एक बेहतर फीडबैक सिस्टम होना चाहिए ताकि यह पता चल सके कि उनकी समस्या का समाधान हुआ या नहीं।

शीर्ष नौकरशाही के साथ गहन मंथन: अनुभवी टीम पर भरोसा

​इस महत्वपूर्ण बैठक में बिहार की नौकरशाही के सबसे कद्दावर चेहरे मौजूद थे। मुख्यमंत्री के प्रधान सचिव दीपक कुमार, मुख्य सचिव प्रत्यय अमृत, सचिव अनुपम कुमार और कुमार रवि जैसे अधिकारियों के साथ सम्राट चौधरी ने घंटों तक प्रदेश के विकास से जुड़े विभिन्न पहलुओं पर चर्चा की। इसके अलावा, मुख्यमंत्री के विशेष कार्यपदाधिकारी गोपाल सिंह, गृह विभाग के विशेष कार्य पदाधिकारी संजय कुमार सिंह और सचिव डॉ. चन्द्रशेखर सिंह भी इस विमर्श का हिस्सा रहे।

​मुख्यमंत्री ने अधिकारियों से कहा कि उन्हें राज्य के विकास के लिए नए विचार (Innovative Ideas) चाहिए। उन्होंने स्पष्ट किया कि वे केवल परंपराओं के आधार पर शासन नहीं करना चाहते, बल्कि आधुनिक तकनीकों और त्वरित निर्णय लेने की क्षमता के साथ बिहार को आगे ले जाना चाहते हैं। सम्राट चौधरी ने शिक्षा, स्वास्थ्य और बुनियादी ढांचे से जुड़ी प्रमुख परियोजनाओं की वर्तमान स्थिति पर रिपोर्ट मांगी और उनके समयबद्ध समापन के लिए डेडलाइन तय करने का निर्देश दिया।

5 देशरत्न मार्ग पर समर्थकों का सैलाब: कार्यकर्ताओं को दिया मान

​सचिवालय में प्रशासनिक कार्यों को निपटाने के बाद मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने जन-संवाद के लिए भी समय निकाला। 5, देशरत्न मार्ग पर आयोजित मुलाकात कार्यक्रम में प्रदेश भर से आए विधायक, विधान पार्षद और पार्टी कार्यकर्ता मुख्यमंत्री को बधाई देने पहुँचे। सम्राट चौधरी ने बड़ी ही सहजता के साथ सबका अभिवादन स्वीकार किया। बड़ी संख्या में उपस्थित लोगों ने उन्हें पुष्प गुच्छ, अंगवस्त्र और स्मृति चिह्न भेंट कर उनके मुख्यमंत्री बनने पर हर्ष व्यक्त किया।

​सम्राट चौधरी ने कार्यकर्ताओं से अपील की कि वे सरकार और जनता के बीच एक मजबूत कड़ी बनें। उन्होंने कहा कि जनप्रतिनिधियों की यह जिम्मेदारी है कि वे जनता की समस्याओं को सरकार तक पहुँचाएं और सरकारी योजनाओं के बारे में लोगों को जागरूक करें। उन्होंने शुभकामनाओं के लिए सबका आभार व्यक्त किया और आश्वस्त किया कि वे बिहार की जनता की सेवा के लिए समर्पित रहेंगे। मुख्यमंत्री सचिवालय के बाहर और भीतर जिस तरह की गहमागहमी देखी गई, वह सम्राट चौधरी की बढ़ती लोकप्रियता और उनके प्रति लोगों की भारी उम्मीदों का परिचायक है।

भावी रणनीति: जवाबदेही और परिणाम ही एकमात्र पैमाना

​16 अप्रैल की यह बैठक बिहार की राजनीति और प्रशासन के लिए एक नए अध्याय की शुरुआत है। सम्राट चौधरी ने यह साफ कर दिया है कि वे ‘काम करने वाले मुख्यमंत्री’ के तौर पर अपनी पहचान बनाना चाहते हैं। उन्होंने अधिकारियों को जो टास्क सौंपे हैं, उनकी नियमित समीक्षा मुख्यमंत्री सचिवालय के माध्यम से की जाएगी। भ्रष्टाचार पर प्रहार और थानों में सुधार—ये दो ऐसे मुद्दे हैं जिन पर मुख्यमंत्री का विशेष फोकस है।

​बिहार की जनता अब इस बदलाव को महसूस करने का इंतजार कर रही है। सम्राट चौधरी ने अधिकारियों से “रिजल्ट” मांगकर यह संकेत दे दिया है कि उनके शासन में केवल प्रक्रियाओं का पालन काफी नहीं होगा, बल्कि ठोस परिणाम दिखाने होंगे। योजनाओं की रफ़्तार बढ़ेगी, भ्रष्टाचार पर नकेल कसी जाएगी और आम आदमी की बात सुनी जाएगी—यही सम्राट चौधरी के सुशासन का नया मंत्र है। सचिवालय से निकला यह आदेश अब जिलों और प्रखंडों तक किस रफ़्तार से पहुँचता है, यह देखना महत्वपूर्ण होगा।

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