
पटना से एक बेहद भावुक और परेशान करने वाली खबर सामने आई है। राजधानी के एक व्यापारी की वियतनाम में हार्ट अटैक से मौत हो गई, लेकिन अब उनका शव तकनीकी कारणों से वहीं फंसा हुआ है। इस स्थिति ने परिवार को गहरे संकट में डाल दिया है, जो लगातार सरकार से मदद की अपील कर रहा है।
ऑफिशियल टूर पर गए थे वियतनाम
मृतक की पहचान पटना के विग्रहपुर निवासी व्यापारी बिंदा प्रसाद सिंह के रूप में हुई है। जानकारी के अनुसार, वह 6 मार्च को एक कंपनी के आधिकारिक दौरे पर करीब 90 लोगों के समूह के साथ वियतनाम गए थे।
करीब एक महीने का टूर पूरा करने के बाद जब वे भारत लौटने की तैयारी में थे, तभी एयरपोर्ट पर अचानक उनकी तबीयत बिगड़ गई।
एयरपोर्ट पर आया हार्ट अटैक
परिजनों के मुताबिक, फ्लाइट में बोर्डिंग के दौरान ही उन्हें हार्ट अटैक आया। आनन-फानन में उन्हें इलाज के लिए वियतनाम के हो ची मिन्ह सिटी स्थित अस्पताल में भर्ती कराया गया।
डॉक्टरों ने उनका इलाज शुरू किया, लेकिन तमाम कोशिशों के बावजूद उनकी जान नहीं बचाई जा सकी।
इलाज में लाखों खर्च, फिर भी नहीं बच सके
परिवार का कहना है कि इलाज के दौरान अस्पताल द्वारा मांगी गई हर रकम समय पर भेजी गई। कुल मिलाकर 25 से 30 लाख रुपये तक खर्च किए गए, लेकिन आखिरकार उन्हें बचाया नहीं जा सका।
इस घटना ने पूरे परिवार को सदमे में डाल दिया है।
तकनीकी कारण से फंसा शव
मामले में सबसे बड़ी परेशानी तब सामने आई जब शव को भारत लाने की प्रक्रिया शुरू हुई।
बताया जा रहा है कि जिस फूकॉक (Phu Quoc) द्वीप क्षेत्र में वे गए थे, वहां भारतीयों के लिए वीजा की आवश्यकता नहीं होती। लेकिन जब शव को हो ची मिन्ह सिटी लाया गया, तब पासपोर्ट पर ‘वीजा ऑन अराइवल’ की मुहर नहीं होने के कारण प्रक्रिया अटक गई।
यही तकनीकी खामी अब शव को भारत लाने में सबसे बड़ी बाधा बन गई है।
मदद के लिए भटक रहा परिवार
मृतक के बड़े बेटे राजेश कुमार ने बताया कि उन्होंने हर संभव प्रयास कर लिया है, लेकिन अब तक कोई समाधान नहीं निकल पाया है।
वहीं छोटे बेटे का कहना है कि परिवार के दो परिचित भी मदद के लिए वियतनाम गए, लेकिन वे भी वहां की प्रक्रिया में उलझकर फंस गए हैं।
पत्नी का रो-रोकर बुरा हाल
मृतक की पत्नी मालती देवी का हाल बेहद खराब है। वह लगातार एक ही बात कह रही हैं कि किसी तरह उनके पति का अंतिम दर्शन करा दिया जाए।
परिवार का कहना है कि उन्होंने सभी जरूरी सरकारी प्रक्रियाएं पूरी कर ली हैं, लेकिन अब उन्हें सरकार के हस्तक्षेप की जरूरत है।
केंद्र सरकार से अपील
परिजनों ने केंद्र सरकार और संबंधित मंत्रालयों से गुहार लगाई है कि इस मामले में जल्द हस्तक्षेप किया जाए और बिंदा प्रसाद सिंह के शव को जल्द से जल्द भारत लाया जाए, ताकि उनका अंतिम संस्कार सम्मानपूर्वक किया जा सके।
यह मामला न सिर्फ एक परिवार के दुख को दर्शाता है, बल्कि विदेश में होने वाली तकनीकी और कागजी जटिलताओं की भी हकीकत सामने लाता है।
अब सभी की नजर इस बात पर है कि सरकार कब तक हस्तक्षेप कर इस परिवार को राहत देती है और मृतक को उनके घर तक पहुंचाया जाता है।


