
पटना। बिहार की राजधानी पटना में ब्लैकआउट के दौरान हुई मसाला कारोबारी पिंटू कुमार की हत्या के मामले में पुलिस ने बड़ा खुलासा किया है। इस हाईप्रोफाइल हत्याकांड की जांच में सामने आया है कि पूरी वारदात बेहद सुनियोजित तरीके से अंजाम दी गई थी। हत्या की साजिश बेऊर जेल में बंद एक अपराधी ने रची थी, जबकि वारदात को अंजाम देने के लिए एक नाबालिग को इस्तेमाल किया गया। पुलिस जांच में यह भी खुलासा हुआ कि आरोपी ने हत्या से पहले करीब 15 दिनों तक मजदूर बनकर पिंटू कुमार की रेकी की थी।
यह सनसनीखेज घटना 14 मई की रात पटना के सुल्तानगंज थाना क्षेत्र स्थित मुसल्लहपुर इलाके में हुई थी। उस समय ब्लैकआउट चल रहा था और पूरे इलाके में अंधेरा पसरा हुआ था। इसी दौरान मसाला कारोबारी पिंटू कुमार को बेहद करीब से गोली मार दी गई थी। गोली सिर में लगी थी और हमलावर मौके से फरार हो गए थे। अंधेरा और साइलेंसर लगी पिस्टल के कारण किसी को तुरंत गोली चलने की आवाज तक नहीं सुनाई दी थी।
घटना के बाद इलाके में अफरा-तफरी मच गई थी। गंभीर रूप से घायल पिंटू कुमार को आनन-फानन में इलाज के लिए पीएमसीएच ले जाया गया, लेकिन डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया। हत्या की यह वारदात पुलिस के लिए बड़ी चुनौती बन गई थी क्योंकि ब्लैकआउट की वजह से आसपास के कैमरों में भी स्पष्ट तस्वीरें नहीं मिल सकी थीं। शुरुआती दौर में पुलिस के पास बहुत कम सुराग थे और मामला लगभग ब्लाइंड केस बन गया था।
हालांकि लगातार जांच और तकनीकी साक्ष्यों के आधार पर पटना पुलिस ने इस मामले का खुलासा कर दिया। पुलिस ने हत्या में शामिल नाबालिग आरोपी को हिरासत में लिया है। उसके पास से हत्या में इस्तेमाल की गई साइलेंसर युक्त पिस्टल और कारतूस भी बरामद किए गए हैं। पूछताछ में आरोपी ने कई चौंकाने वाले खुलासे किए हैं।
पुलिस के अनुसार इस हत्या की पूरी साजिश बेऊर जेल में बंद कुख्यात अपराधी विकास उर्फ बका ने रची थी। विकास पहले से कई आपराधिक मामलों में जेल में बंद है। जांच में सामने आया कि उसने जेल से ही पिंटू कुमार की हत्या की योजना बनाई थी। इसके लिए उसने एक नाबालिग को सुपारी दी और उसे एडवांस के तौर पर 10 हजार रुपये भी दिए थे। बाकी रकम हत्या के बाद देने का वादा किया गया था।
पुलिस ने बताया कि विकास ने अपने एक अन्य साथी स्काई उर्फ शिवम के जरिए नाबालिग तक हथियार पहुंचवाया। शिवम पहले से एक अन्य हत्याकांड में फरार चल रहा है। उसी ने साइलेंसर लगी पिस्टल और कारतूस उपलब्ध कराया था। पुलिस अब शिवम की तलाश में लगातार छापेमारी कर रही है।
जांच में सबसे चौंकाने वाला खुलासा यह हुआ कि नाबालिग आरोपी ने हत्या को अंजाम देने से पहले करीब 15 दिनों तक पिंटू कुमार की रेकी की थी। वह मजदूर के वेश में पिंटू की दुकान के सामने काम करता था ताकि उसकी दिनचर्या, आने-जाने का समय और दुकान की गतिविधियों पर नजर रख सके। किसी को उस पर शक न हो, इसलिए उसने खुद को पूरी तरह सामान्य मजदूर की तरह पेश किया।
सिटी एसपी पूर्वी परिचय कुमार ने बताया कि पिंटू कुमार का नाम शराब कारोबार और अन्य अवैध गतिविधियों से भी जुड़ा हुआ था। पुलिस जांच में यह भी सामने आया कि फरवरी में पटना सिटी में हुए चर्चित सोनू हत्याकांड में विकास उर्फ बका और संजय गोप गिरफ्तार हुए थे। दोनों के जेल जाने के बाद इलाके में शराब कारोबार का नियंत्रण पिंटू कुमार संभालने लगा था।
पुलिस के मुताबिक पिंटू कारोबार से होने वाली रकम संजय गोप तक पहुंचा रहा था, लेकिन विकास को हिस्सेदारी नहीं मिल रही थी। इसी बात को लेकर विकास नाराज था। जेल में उससे मिलने आने वाले नाबालिग को उसने पिंटू की हत्या की जिम्मेदारी सौंप दी। पुलिस का मानना है कि आर्थिक विवाद और आपसी गैंग प्रतिद्वंद्विता इस हत्या की मुख्य वजह बनी।
घटना वाले दिन पूरे इलाके में ब्लैकआउट था। सभी दुकानदारों और कारोबारियों ने निर्देश के अनुसार अपनी बिजली बंद कर दी थी और लोग अंधेरे में ब्लैकआउट खत्म होने का इंतजार कर रहे थे। इसी दौरान नाबालिग और उसका एक साथी मौके पर पहुंचे। उन्होंने पहले से तैयार योजना के अनुसार बेहद करीब से पिंटू कुमार के सिर में गोली मारी और तुरंत वहां से फरार हो गए।
साइलेंसर लगी पिस्टल होने की वजह से गोली चलने की आवाज आसपास के लोगों को सुनाई नहीं दी। कुछ देर बाद जब पिंटू घायल अवस्था में कराहने लगा तब लोगों का ध्यान उसकी तरफ गया। इसके बाद उसे अस्पताल पहुंचाया गया, जहां उसकी मौत हो गई।
पुलिस ने इस मामले में तकनीकी निगरानी, स्थानीय इनपुट और संदिग्ध गतिविधियों के आधार पर जांच आगे बढ़ाई। कई सीसीटीवी फुटेज, मोबाइल लोकेशन और आपराधिक नेटवर्क की पड़ताल के बाद पुलिस नाबालिग आरोपी तक पहुंचने में सफल रही। पूछताछ में आरोपी ने पूरी साजिश का खुलासा कर दिया।
इस घटना ने पटना में कानून-व्यवस्था और अपराधियों के जेल से ऑपरेट करने के मुद्दे को फिर चर्चा में ला दिया है। सवाल उठ रहे हैं कि जेल में बंद अपराधी आखिर कैसे बाहर बैठकर हत्याओं की साजिश रच रहे हैं और अपने नेटवर्क को संचालित कर रहे हैं। पुलिस अब इस पूरे गैंग और उसके नेटवर्क की गहराई से जांच कर रही है।
फिलहाल पुलिस फरार आरोपियों की तलाश में लगातार छापेमारी कर रही है। साथ ही यह भी जांच की जा रही है कि इस हत्याकांड में और कौन-कौन लोग शामिल थे। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि पूरे मामले में शामिल किसी भी व्यक्ति को बख्शा नहीं जाएगा और जल्द ही बाकी आरोपियों को भी गिरफ्तार कर लिया जाएगा।


