पटना: बिहार की पंचायतें बनेंगी ‘आत्मनिर्भर’, अब खुद वसूल सकेंगी टैक्स; हर गांव में बनेगा ‘मोक्षधाम’, वित्त आयोग की बैठक में बड़ा फैसला

  • बड़ा मंथन: पटना में सप्तम राज्य वित्त आयोग के सामने पंचायती राज विभाग ने रखा अपना विजन; त्रि-स्तरीय पंचायतों को आर्थिक रूप से सशक्त बनाने पर हुआ जोर।
  • आमदनी के स्रोत: अब पंचायतें अपने स्तर पर जुटाएंगी राजस्व (OSR); पानी के लिए 30 रुपये महीना, जन्म-मृत्यु प्रमाण पत्र और सैरातों की बंदोबस्ती से होगी कमाई।
  • नई योजनाएं: ‘7 निश्चय-3’ के तहत पंचायतों में बनेंगे भव्य ‘मोक्षधाम’ और ग्रामीण हाट बाजार; बिजली बिल और रखरखाव के लिए विभाग ने मांगे और पैसे।

द वॉयस ऑफ बिहार (पटना/ब्यूरो)

​बिहार के गांवों की तस्वीर और तकदीर बदलने के लिए एक बड़ी कवायद शुरू हो गई है। सोमवार को पटना (Patna) के होटल चाणक्य में सप्तम राज्य वित्त आयोग (7th State Finance Commission) के अध्यक्ष अशोक कुमार चौधरी (Ashok Kumar Chaudhary) की अध्यक्षता में एक महत्वपूर्ण बैठक हुई। इसमें पंचायती राज विभाग (Panchayati Raj Department) ने पंचायतों को वित्तीय रूप से स्वतंत्र और शक्तिशाली बनाने का खाका पेश किया।

पंचायतों को मिलेगा टैक्स वसूली का अधिकार

​पंचायती राज विभाग के सचिव मनोज कुमार (Secretary Manoj Kumar) ने बताया कि विभाग का लक्ष्य पंचायतों को आर्थिक रूप से ‘आत्मनिर्भर’ बनाना है। इसके लिए नियमावली तैयार की जा रही है ताकि पंचायतें कर (Tax) और शुल्क (Fee) वसूल सकें।

  • कमाई के जरिए: सचिव ने बताया कि ‘हर घर नल का जल’ योजना के तहत उपभोक्ताओं से 30 रुपये प्रतिमाह शुल्क, जन्म-मृत्यु प्रमाण पत्र शुल्क और सैरातों की बंदोबस्ती अब पंचायतों की आय का मुख्य स्रोत बनेंगे।

हर पंचायत में ‘मोक्षधाम’ और हाट बाजार

​सरकार की महत्वाकांक्षी योजना ‘7 निश्चय-3’ (7 Nishchay-3) के तहत गांवों में बड़ी सुविधाओं का विकास किया जाएगा।

  • मोक्षधाम: अब शवदाह के लिए लोगों को भटकना नहीं पड़ेगा। ग्राम पंचायतों में मोक्षधाम (Crematorium) का निर्माण और उनका अनुरक्षण किया जाएगा।
  • बाजार: गांवों में आर्थिक गतिविधियों को बढ़ावा देने के लिए ग्रामीण हाट बाजार (Rural Haat Bazaar) विकसित किए जाएंगे।

बिजली बिल और रखरखाव के लिए मांगा फंड

​सचिव ने आयोग से आग्रह किया कि पंचायतों पर बढ़ रहे बोझ को देखते हुए अधिक राशि आवंटित की जाए।

  • मांग: पंचायत सरकार भवनों के रखरखाव, कार्यालय संचालन, मानव बल और बिजली बिल (पंचायत कार्यालय व पेयजल योजना) के भुगतान के लिए अतिरिक्त बजट का प्रावधान करने की मांग की गई।
  • आईटी: इसके अलावा डिजिटलीकरण और कम्प्यूटराइजेशन के लिए भी राशि मांगी गई है।

बिना पंचायत के विकसित बिहार संभव नहीं

​आयोग के अध्यक्ष अशोक कुमार चौधरी ने विभाग के प्रयासों की सराहना की। उन्होंने कहा, “ग्राम पंचायतों के विकास के बिना ‘विकसित बिहार’ की कल्पना नहीं की जा सकती।” उन्होंने ई-पंचायत बिहार पोर्टल और तकनीकी गवर्नेंस की तारीफ की। बैठक में आयोग की सदस्य कुमुदनी सिन्हा, अनिल कुमार, निदेशक नवीन कुमार सिंह समेत 11 विभागों के अधिकारी मौजूद थे।

पंचायतों का सशक्त होना लोकतंत्र की मजबूती की निशानी है।

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