
पटना, 18 मई 2026। बिहार के कृषि-औद्योगिक विन्यास को एक नई दिशा देने और ग्रामीण अर्थव्यवस्था के मुख्य आधार स्तंभों में से एक, गन्ना क्षेत्र को सुदृढ़ करने के उद्देश्य से राज्य प्रशासन में एक महत्वपूर्ण नीतिगत बदलाव हुआ है। भारतीय प्रशासनिक सेवा के वरिष्ठ और अनुभवी अधिकारी धर्मेंद्र सिंह ने सोमवार को आधिकारिक रूप से बिहार सरकार के गन्ना उद्योग विभाग के नए सचिव के रूप में अपना पदभार ग्रहण कर लिया। इस प्रशासनिक प्रक्रम के दौरान विकास भवन स्थित विभागीय मुख्यालय में एक गरिमापूर्ण विनिमय सत्र का आयोजन किया गया, जहां गन्ना उद्योग विभाग के निवर्तमान अपर मुख्य सचिव के. सेंथिल कुमार ने नए सचिव का गर्मजोशी से स्वागत किया और उन्हें विभाग की मुख्य संचिकाएं व विलेख सौंपकर कार्यभार का सुचारू आदान-प्रदान संपन्न कराया। पदभार ग्रहण करने की इस विधिक प्रक्रिया के तुरंत बाद नया नेतृत्व पूरी तरह से एक्शन मोड में नजर आया, जिससे यह साफ संकेत मिलते हैं कि आने वाले दिनों में बिहार के चीनी उद्योग और गन्ना उत्पादक किसानों के लिए बड़े नीतिगत निर्णयों का मार्ग प्रशस्त होने जा रहा है।
पदभार संभालते ही उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक, ईखायुक्त ने प्रस्तुत किया अद्यतन रिपोर्ट का विन्यास
कार्यभार संधारित करने के ठीक बाद सचिव धर्मेंद्र सिंह ने विभाग की आंतरिक प्रणालियों और वर्तमान अवस्थिति को समझने के लिए सभी वरीय प्रशासनिक पदाधिकारियों, तकनीकी निदेशकों और वित्तीय सलाहकारों के साथ एक उच्चस्तरीय और व्यापक समीक्षा बैठक की। इस सांगठनिक बैठक का मुख्य उद्देश्य राज्य में वर्तमान समय में संचालित हो रही गन्ना विकास योजनाओं, कृषक कल्याण कार्यक्रमों और चीनी उद्योग से जुड़ी विभिन्न अवसंरचनात्मक परियोजनाओं की वास्तविक धरातलीय प्रगति का बिंदुवार मूल्यांकन करना था।
बैठक के दौरान विभाग के ईखायुक्त अनिल कुमार झा ने एक विस्तृत तकनीकी प्रस्तुतीकरण के माध्यम से नए सचिव को विभाग के संगठनात्मक ढांचे, चालू वित्तीय वर्ष के बजटीय आवंटन और विभिन्न चीनी मिलों के परिचालन विन्यासों से अवगत कराया। ईखायुक्त ने राज्य के विभिन्न प्रमंडलों में गन्ना किसानों के लिए चलाई जा रही कल्याणकारी योजनाओं, लंबित बकायों के भुगतान की स्थिति और बीज प्रतिस्थापन दरों के अद्यतन आंकड़ों को बिंदुवार प्रस्तुत किया, जिसके आधार पर भविष्य की रणनीतिक प्राथमिकताओं को कड़ाई से संरेखित किया जा सके।
बंद पड़ी चीनी मिलों का पुनरुद्धार और पेराई क्षमता का शत-प्रतिशत दोहन मुख्य ध्येय
समीक्षा के क्रम में सचिव धर्मेंद्र सिंह ने विभाग के लिए कई कड़े और दूरगामी रणनीतिक लक्ष्य निर्धारित किए, जिनमें राज्य की बंद पड़ी चीनी मिलों को पुनः परिचालित करने के प्रक्रम को सर्वोच्च प्राथमिकता दी गई है। उन्होंने स्पष्ट किया कि बिहार के औद्योगिक इतिहास में चीनी मिलों का एक गौरवशाली अवदान रहा है और ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार के अवसरों को बढ़ाने के लिए इन बंद पड़ी इकाइयों को दोबारा चालू करना विधिक और आर्थिक रूप से अत्यंत आवश्यक है। इसके लिए विभाग द्वारा एक विशेष कार्ययोजना तैयार की जाएगी, जिसके तहत बंद मिलों की संपत्तियों, तकनीकी विसंगतियों और वित्तीय देनदारियों का व्यावहारिक ऑडिट कराया जाएगा।
इसके समानांतर, आगामी पेराई सत्रों (Crushing Seasons) को लेकर भी कड़े दिशा-निर्देश जारी किए गए हैं। नए सचिव ने अधिकारियों को टास्क सौंपा कि राज्य में वर्तमान में सक्रिय सभी चीनी मिलों को उनकी पूरी स्थापित क्षमता के साथ संचालित करने के लिए एक सुदृढ़ आपूर्ति ग्रिड का निर्माण किया जाए। मिलों को पूरी क्षमता से चलाने के लिए खेतों से मिलों तक गन्ने की निर्बाध और पर्याप्त आपूर्ति सुनिश्चित करना अनिवार्य होगा। इसके लिए मिल प्रबंधन और स्थानीय गन्ना उत्पादक समितियों के बीच एक पारदर्शी और डिजिटल नेटवर्क स्थापित करने पर बल दिया गया है, ताकि पेराई के समय किसी भी प्रकार के गतिरोध या गन्ने की बर्बादी की स्थिति को पूरी तरह से ब्लॉक किया जा सके।
गन्ना खेती का प्रखर क्षेत्र विस्तार और उत्पादकता बढ़ाने के लिए प्रमाणित बीजों का ग्रिड
कृषि प्रक्षेप में सुधार लाने के उद्देश्य से विभाग ने राज्य के भीतर गन्ने की खेती के भौगोलिक दायरे को बढ़ाने यानी क्षेत्र विस्तार (Area Expansion) पर विशेष ध्यान केंद्रित करने का नीतिगत निर्णय लिया है। सचिव ने रेखांकित किया कि पारंपरिक फसलों के मुकाबले गन्ना एक नकदी और अधिक सुरक्षित फसल है, इसलिए किसानों को इसके विन्यास की ओर आकर्षित करने के लिए नए प्रमंडलों में जागरूकता और इनपुट सहायता का विस्तार किया जाना चाहिए।
गन्ना खेती को तकनीकी रूप से उन्नत और अधिक मुनाफे का सौदा बनाने के लिए किसानों को उच्च उत्पादकता और रोग-प्रतिरोधी क्षमता वाले प्रमाणित गन्ना बीजों (Certified Seeds) की समय पर उपलब्धता सुनिश्चित कराना शीर्ष प्राथमिकताओं में शामिल किया गया है। विभाग कृषि विश्वविद्यालयों और अनुसंधान केंद्रों के साथ मिलकर उन्नत बीज प्रणालियों का एक मजबूत ग्रिड विकसित करेगा, जिससे बुआई के मुख्य सीजन के दौरान सुदूर देहातों में रहने वाले छोटे और सीमांत किसानों तक भी इन प्रमाणित बीजों की पहुंच सुगमता से सुनिश्चित की जा सके। उच्च गुणवत्ता वाले बीजों के प्रयोग से प्रति एकड़ उत्पादकता में उल्लेखनीय वृद्धि होगी, जिससे किसानों की शुद्ध आय के सूचकांक में बड़ा सुधार दर्ज किया जा सकेगा।
रिक्त पदों को भरने की प्रक्रिया में आएगी तेजी, ईख प्रसार पदाधिकारियों की होगी बहाली
विभागीय कामकाज को अधिक प्रभावशाली, पारदर्शी और परिणाम-उन्मुख बनाने के लिए नए सचिव ने मानव संसाधन की कमी को दूर करने का एक बड़ा प्रशासनिक विलेख तैयार किया है। बैठक के भीतर यह पाया गया कि फील्ड स्तर पर कई महत्वपूर्ण पद रिक्त होने के कारण योजनाओं की मॉनिटरिंग प्रभावित होती है। इस विसंगति को दूर करने के लिए विभाग के भीतर ईख प्रसार पदाधिकारियों (Sugarcने Extension Officers) सहित अन्य सभी तकनीकी और लिपिकीय रिक्त पदों को भरने की विधिक प्रक्रिया को युद्धस्तर पर तेज करने का आदेश दिया गया है।
धर्मेंद्र सिंह ने कड़ाई से स्पष्ट किया कि जब तक जमीनी स्तर पर पर्याप्त संख्या में अधिकारियों और समन्वयकों की तैनाती नहीं होगी, तब तक सरकारी योजनाओं के बजटीय लाभों को अंतिम व्यक्ति तक पहुंचाना संभव नहीं है। रिक्त पदों पर नई बहालियों और प्रतिनियुक्तियों के पूर्ण होने से ग्रामीण अंचलों में संचालित होने वाले सरकारी शिविरों, बीज वितरण केंद्रों और तकनीकी कार्यशालाओं की बेहतर और कड़क मॉनिटरिंग सुनिश्चित हो सकेगी। इससे प्रणालियों के भीतर छिपे बिचौलियों की कड़ियों को पूरी तरह से ब्लॉक किया जा सकेगा और विभागीय योजनाओं का सफल क्रियान्वयन धरातल पर दिखाई देगा।
उन्नत कृषि यंत्रों की समयबद्ध आपूर्ति और फील्ड स्तर पर कड़ा नियमित सर्विलांस
कृषकों की व्यावहारिक समस्याओं के ऑन-स्पॉट निवारण के लिए सचिव ने अधिकारियों को सख्त हिदायत दी कि गन्ना खेती के पूरे चक्र के दौरान बुआई से लेकर कटाई के सही समय तक किसानों को उन्नत कृषि यंत्रों, आधुनिक कृषि तकनीकों, पारदर्शी सरकारी अनुदानों (सब्सिडी) और अन्य आवश्यक तकनीकी सहायता की उपलब्धता में किसी भी प्रकार का लिपिकीय विलंब विधिक रूप से स्वीकार नहीं किया जाएगा। तकनीकी उपकरणों की खरीद पर मिलने वाले अनुदानों को सीधे प्रत्यक्ष लाभ हस्तांतरण (DBT) के माध्यम से पारदर्शी तरीके से कृषकों के बैंक खातों में प्रेषित करने की प्रणाली को और अधिक सुदृढ़ किया जाएगा।
योजनाओं की सत्यता और धरातलीय हकीकत को परखने के लिए फील्ड स्तर पर लगातार नियमित समीक्षा और सघन मॉनिटरिंग की एक नई व्यवस्था संधारित की जा रही है। जिला और प्रखंड स्तर के कृषि व गन्ना अधिकारियों को अनिवार्य रूप से नियमित अंतराल पर ग्रामीण क्षेत्रों का दौरा करना होगा और सीधे खेतों में जाकर गन्ना उत्पादक किसानों की समस्याओं, सिंचाई की विसंगतियों और मिलों द्वारा दी जाने वाली पर्चियों से जुड़ी शिकायतों का त्वरित विधिक समाधान सुनिश्चित करना होगा। सरकार की इस नई और कड़क प्रशासनिक पहल से राज्य के गन्ना उद्योग को एक नई गति, ऊर्जा और सुदृढ़ आर्थिक धरातल प्राप्त होना तय माना जा रहा है। इस उच्चस्तरीय और नीतिगत बैठक के दौरान विभाग के संयुक्त सचिव, उपनिदेशक, मुख्य लेखा नियंत्रक सहित विभिन्न तकनीकी विंगों के सभी वरीय नीतिगत योजनाकार पूरी कड़ाई और मुस्तैदी के साथ उपस्थित रहे।


