9 किलोमीटर की दूरी तय करने में लगे 3 घंटे, समस्तीपुर में यात्रियों का हंगामा

समस्तीपुर। जरा सोचिए, अगर महज 9 किलोमीटर की दूरी तय करने में किसी ट्रेन को तीन घंटे से अधिक का समय लग जाए, तो यात्रियों की क्या हालत होगी। कुछ ऐसा ही नजारा गुरुवार को समस्तीपुर-उजियारपुर रेलखंड पर देखने को मिला, जहां नई तकनीक के साइडइफेक्ट के कारण कई ट्रेनें घंटों फंसी रहीं और यात्रियों में भारी आक्रोश देखने को मिला।

एक ही लाइन पर खड़ी रहीं छह ट्रेनें

समस्तीपुर-बरौनी रेलखंड के समस्तीपुर और उजियारपुर स्टेशन के बीच डाउन लाइन पर एक के पीछे एक कुल छह ट्रेनें खड़ी रहीं। इस रेलखंड पर करीब 9 किलोमीटर की दूरी में छह स्थानों पर ऑटोमैटिक सिग्नल लगाए गए हैं। सिग्नल प्रणाली के सक्रिय होने के कारण एक सिग्नल पर ट्रेन रुकते ही पीछे की ट्रेनें भी अलग-अलग सिग्नलों पर रुकती चली गईं।

10 मिनट की दूरी तीन घंटे में हुई पूरी

इसका सबसे बड़ा असर 63308 समस्तीपुर–कटिहार पैसेंजर ट्रेन पर पड़ा। यह ट्रेन दोपहर 12:55 बजे समस्तीपुर जंक्शन से रवाना हुई थी, जिसे महज 10 मिनट में यानी 1:05 बजे उजियारपुर स्टेशन पहुंचना था। लेकिन ट्रेन को यह दूरी तय करने में करीब तीन घंटे लग गए। लंबे इंतजार से यात्रियों में नाराजगी बढ़ती चली गई।

यात्रियों का फूटा गुस्सा

ट्रेन में सवार यात्रियों ने कहा कि यह कोई पहली बार नहीं हुआ है। अप और डाउन दोनों लाइनों में ट्रेनें अक्सर फंस जाती हैं और यात्रियों को घंटों परेशान होना पड़ता है। गुरुवार को गरीब रथ, कटिहार पैसेंजर, नई दिल्ली–बरौनी क्लोन एक्सप्रेस समेत कई गाड़ियां प्रभावित रहीं।

यात्री राम शंकर ने कहा,
“यह रोज की समस्या है। समस्तीपुर मंडल गाड़ी आगे भेज देता है और कहता है कि अब सोनपुर मंडल देखेगा। लेकिन इसका खामियाजा हम यात्रियों को भुगतना पड़ता है। परेशान तो पब्लिक होती है।”

रेल प्रशासन के बयान में विरोधाभास

इस मामले पर समस्तीपुर रेल मंडल के डीआरएम ज्योति प्रकाश मिश्रा ने कहा कि परेशानी डाउन लाइन पर आई है और यह मामला सोनपुर रेल मंडल से जुड़ा है। उन्होंने कहा कि कारणों की जानकारी ली जा रही है। वहीं, सोनपुर रेल मंडल के जनसंपर्क अधिकारी पृथ्वी राज ने बताया कि उन्हें इस संबंध में कोई जानकारी नहीं है।

ऑटोमैटिक सिग्नल बना परेशानी की वजह

समस्तीपुर-उजियारपुर रेलखंड पर हाल ही में ऑटोमैटिक सिग्नल प्रणाली को सक्रिय किया गया है। इस सिस्टम में यदि किसी सिग्नल के आगे ट्रेन खड़ी होती है तो पीछे का सिग्नल स्वतः रेड हो जाता है। इसी कारण इस दोनों स्टेशनों के बीच अलग-अलग सिग्नलों पर एक के पीछे एक कई ट्रेनें खड़ी हो गईं और पूरा रेलखंड जाम की स्थिति में आ गया।

यात्रियों ने की व्यवस्था सुधारने की मांग

लगातार हो रही इस तरह की समस्याओं से नाराज यात्रियों ने रेल प्रशासन से ऑटोमैटिक सिग्नल व्यवस्था की समीक्षा करने और ट्रैफिक प्रबंधन को बेहतर करने की मांग की है, ताकि भविष्य में यात्रियों को इस तरह की परेशानी न झेलनी पड़े।


 

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