पटना।राज्य के प्राथमिक और मध्य विद्यालयों में 31 जनवरी को एक साथ 66,799 स्कूलों में अभिभावक-शिक्षक संगोष्ठी (PTM) का आयोजन किया गया। इस दौरान बच्चों की पढ़ाई, अनुशासन, व्यवहार और डिजिटल आदतों को लेकर अभिभावकों के साथ खुला संवाद हुआ।
कार्यक्रम में सक्रिय भूमिका निभाने वाले अभिभावकों को “अभिभावक ऑफ द मंथ” सम्मान से नवाजा गया, जबकि बेहतर प्रदर्शन करने वाले विद्यार्थियों को “स्टूडेंट ऑफ द मंथ” पुरस्कार देकर प्रोत्साहित किया गया।
मोबाइल और सोशल मीडिया बना चर्चा का केंद्र
इस बार की संगोष्ठी में बच्चों में मोबाइल और सोशल मीडिया की बढ़ती लत पर खास फोकस रहा।
शिक्षकों ने अभिभावकों को बताया कि—
- ज्यादा मोबाइल इस्तेमाल से बच्चों की एकाग्रता घटती है
- पढ़ाई और सामाजिक व्यवहार पर नकारात्मक असर पड़ता है
इसी के साथ संतुलित और सीमित उपयोग के फायदे भी समझाए गए। कई स्कूलों में बच्चों ने नाटक, रोल-प्ले और कहानियों के जरिए इसके दुष्प्रभावों को मंच पर प्रस्तुत किया।
सम्मान से बढ़ा बच्चों और अभिभावकों का मनोबल
इस पहल के तहत ऐसे माता-पिता को सम्मानित किया गया—
- जो बच्चों को नियमित स्कूल भेजते हैं
- घर पर पढ़ाई में सहयोग करते हैं
- शिक्षकों से लगातार संपर्क में रहते हैं
वहीं छात्रों को उपस्थिति, गृहकार्य, स्वच्छता और अनुशासन के आधार पर “स्टूडेंट ऑफ द मंथ” चुना गया।
65% स्कूलों में सफल आयोजन
विभागीय आंकड़ों के अनुसार इस बार राज्य के 65% विद्यालयों में सफलतापूर्वक पीटीएम आयोजित हुई।
जिलों में भागीदारी में बड़ा सुधार
| जिला | दिसंबर 2025 | जनवरी 2026 |
|---|---|---|
| पटना | 31% | 67% |
| मधेपुरा | 26% | 97.1% |
| सहरसा | 27% | 42% |
कक्षा 1 से 5 के बच्चों के अभिभावकों की भागीदारी सबसे अधिक रही।
कक्षा 6 से 8 में पटना, सीवान और जमुई जिले आगे रहे।
हर महीने होगी पीटीएम
प्राथमिक शिक्षा निदेशक विक्रम विरकर ने बताया कि
मई 2025 से हर महीने के अंतिम शनिवार को सभी स्कूलों में पीटीएम आयोजित की जा रही है।
हर माह एक नई थीम रखी जाती है, जिससे बच्चों के समग्र विकास पर निरंतर काम हो सके।
यह पहल साबित कर रही है कि बिहार सरकार अब केवल परीक्षा परिणाम ही नहीं, बल्कि बच्चों के व्यवहार, संस्कार, डिजिटल संतुलन और भविष्य निर्माण पर भी समान रूप से ध्यान दे रही है।


