“अभिभावक-शिक्षक संगोष्ठी 31 मई को: गर्मी की छुट्टियों से पहले छात्रों के लिए रचनात्मक दिशा तय करने का अवसर”

पटना, 27 मई 2025: छात्रों की शैक्षणिक प्रगति और विद्यालयी वातावरण को और अधिक सुदृढ़ करने की दिशा में शिक्षा विभाग द्वारा एक अहम पहल की जा रही है। इसी क्रम में 31 मई 2025 (शनिवार) को राज्य के सभी सरकारी विद्यालयों में ‘अभिभावक-शिक्षक संगोष्ठी’ का आयोजन किया जाएगा। इस संगोष्ठी का केंद्रीय विषय “पढ़ेंगे, बढ़ेंगे और सीखेंगे हम” होगा।

गर्मी की छुट्टियों से ठीक पहले हो रही यह संगोष्ठी, शिक्षकों और अभिभावकों के लिए एक स्वर्णिम अवसर होगी, जिसके माध्यम से बच्चों की रचनात्मकता और अध्ययन शैली को अवकाश के दौरान भी सुदृढ़ बनाए रखने पर बल दिया जाएगा।

क्या है संगोष्ठी की खास बातें?

  • छात्रों को दी गई शैक्षणिक सामग्री की समीक्षा: शिक्षक अभिभावकों को पाठ्यपुस्तकों, अभ्यास पुस्तिकाओं, डायरी और टीएलएम किट के उपयोग और रख-रखाव के महत्व से अवगत कराएंगे।
  • अवकाश के लिए अध्ययन योजना: कक्षा 1 अप्रैल से 31 मई तक पढ़ाए गए पाठ्यक्रम की पुनरावृत्ति हेतु अभिभावकों को प्रेरित किया जाएगा कि वे छुट्टियों के दौरान छात्रों को घर में अभ्यास करने के लिए प्रोत्साहित करें।
  • घर को अध्ययन केंद्र बनाना: “हर घर एक पाठशाला” पहल के अंतर्गत छात्रों के लिए पढ़ाई का विशेष कोना विकसित करने की सलाह दी जाएगी, जिसमें रुटीन, पोस्टर व अध्ययन सामग्री शामिल होंगी।
  • ई-शिक्षाकोष से गृहकार्य: गर्मी की छुट्टी के लिए SCERT द्वारा तैयार गृहकार्य अभिभावकों को उपलब्ध कराया जाएगा और इसके क्रियान्वयन पर चर्चा की जाएगी।
  • पाठ्यपुस्तकों के उपयोग में समाहित नैतिक शिक्षा: पुस्तकों के मुखपृष्ठ और पिछले पन्नों पर दिए गए नागरिक बोध व आचरण से जुड़े संदेशों की जानकारी अभिभावकों को दी जाएगी, ताकि बच्चे इनमें निहित मूल्यों को आत्मसात कर सकें।

प्रलेखन और सराहना:
सभी प्रधानाध्यापकों को निर्देश दिया गया है कि संगोष्ठी के दौरान की गतिविधियों को डिजिटली प्रलेखित करें और उच्च गुणवत्ता के फ़ोटो जिला शिक्षा पदाधिकारी को भेजें। कुछ श्रेष्ठ गतिविधियों को शिक्षा विभाग की वेबसाइट, फेसबुक पेज और मासिक पत्रिका में भी स्थान दिया जाएगा।

शिक्षा विभाग की अपेक्षा:
विभाग को विश्वास है कि यह संगोष्ठी न केवल बच्चों की गर्मी की छुट्टियों को ज्ञानवर्धक और रचनात्मक बनाएगी, बल्कि अभिभावकों की सहभागिता से विद्यालयी परिवेश में भी सकारात्मक बदलाव आएगा। साथ ही विद्यालयों में नामांकित हर छात्र तक शैक्षणिक सामग्री पहुँचने को सुनिश्चित किया जाएगा।


 

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