परबत्ता बनी सियासत का हॉटस्पॉट: जेडीयू विधायक संजीव बोले- “टिकट का मोहताज नहीं, परबत्ता का सिपाही हूं”

खगड़िया | 18 सितम्बर 2025: बिहार में अक्टूबर-नवंबर में संभावित विधानसभा चुनाव से पहले सियासी पारा चढ़ने लगा है। खगड़िया जिले की परबत्ता विधानसभा इस बार सबसे चर्चित सीट के रूप में सामने आ रही है। यहां से मौजूदा जेडीयू विधायक डॉ. संजीव कुमार लगातार सक्रिय हैं और अपने ही अंदाज़ में चुनावी मैदान को गरमाने लगे हैं।

“टिकट मिले या न मिले, लड़ाई परबत्ता की होगी”

टिकट कटने की चर्चाओं पर संजीव कुमार ने कहा-

“मेरे लिए टिकट सेकेंडरी है, मैं सेवा के लिए राजनीति में हूं। परबत्ता मेरा है और मैं परबत्ता का हूं। टिकट का मोहताज नहीं हूं। इस बार सारे रिकॉर्ड टूटेंगे।”

अपने ही खेमे पर साधा निशाना

संजीव कुमार ने खुलासा किया कि उनकी ही सरकार के कुछ नेता विकास कार्यों में अड़ंगे डाल रहे हैं।

“कुछ लोग पचा नहीं पा रहे हैं कि परबत्ता में इतना काम कैसे हो रहा है। यही वजह है कि योजनाओं को रोका जाता है।”

मेडिकल कॉलेज को लेकर नाराज़

खगड़िया में प्रस्तावित मेडिकल कॉलेज की लोकेशन पर भी उन्होंने सवाल उठाए। उनका कहना था कि कॉलेज महेशखूंट के पास बनना चाहिए, ताकि पटना से किशनगंज तक ट्रॉमा सेंटर की सुविधा मिले।

“गठबंधन के कुछ नेता मेडिकल कॉलेज को गलियों में घुमा रहे हैं, जबकि यह पब्लिक के हित का मामला है।”

अधिकारियों का साथ, तभी संभव हुआ विकास

संजीव ने दावा किया कि पिछले पांच वर्षों में उन्होंने 300 से अधिक सड़कें बनवाईं। लेकिन यह सब अधिकारियों की मदद से ही संभव हुआ, वरना उनके ही कुछ सहयोगी इसे रोकना चाहते थे।

चुनावी एजेंडा साफ: विकास और परबत्ता का स्वाभिमान

उन्होंने साफ किया कि इस बार चुनाव में उनका मुद्दा होगा—

  • विकास
  • परबत्ता का स्वाभिमान
  • जातिवाद का अंत
  • ईमानदारी

“मैं परबत्ता की मिट्टी से जुड़ा हूं, क्षेत्र के सम्मान और स्वाभिमान के लिए लड़ाई लड़ूंगा।”

विपक्ष की चुप्पी, एनडीए की खामोशी

दिलचस्प यह है कि परबत्ता में अब तक विपक्ष का कोई बड़ा चेहरा मैदान में नहीं उतरा है। विपक्ष की यह चुप्पी सवाल खड़े कर रही है कि क्या उन्होंने यह सीट पहले ही छोड़ दी है या कोई नई रणनीति बना रहे हैं।

वहीं, एनडीए कार्यकर्ता सम्मेलन भी परबत्ता में अचानक रद्द कर दिया गया, जिससे अटकलें तेज हो गईं कि क्या विधायक संजीव कुमार का टिकट कट सकता है? हालांकि इस पर अब तक कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है।


विश्लेषण:परबत्ता सीट पर संजीव कुमार की आक्रामक सक्रियता और विपक्ष की चुप्पी इसे इस बार बेहद दिलचस्प बना रही है। एक ओर संजीव खुद को “टिकट का मोहताज नहीं” बताकर जनता से सीधा कनेक्शन साध रहे हैं, वहीं दूसरी ओर एनडीए के अंदरखाने टिकट पर खींचतान की अटकलें राजनीतिक हलचल और बढ़ा रही हैं।


 

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