नालंदा के रहुई प्रखंड के शिवनंदन नगर में हाई कोर्ट के आदेश पर हुई बुलडोज़र कार्रवाई के बाद सियासी हलचल तेज हो गई है। मंगलवार को पूर्णिया सांसद पप्पू यादव पीड़ित दलित–पिछड़ा परिवारों से मिलने पहुंचे, जहां टूटे घरों और रोते-बिलखते परिजनों के बीच उनका गुस्सा खुलकर फूटा।
पप्पू यादव ने आरोप लगाया कि सरकार गरीब, दलित और अत्यंत पिछड़ा वर्ग के घरों पर बुलडोज़र चलाकर अन्याय कर रही है। उन्होंने कहा कि जिन जमीनों पर सरकार ने खुद सड़क, बिजली और इंदिरा आवास जैसी योजनाएँ दीं, उसी पर अचानक अतिक्रमण बताकर रातों-रात घर तोड़ दिए गए।
उन्होंने सवाल उठाया,
“अगर ज़मीन गलत थी तो सरकार ने उस पर पैसा क्यों लगाया? और अगर सही थी तो फिर सिर्फ गरीबों की झोपड़ी पर ही बुलडोज़र क्यों?”
सांसद ने इसे ‘कानून का राज’ नहीं बल्कि ‘ताक़त का राज’ बताते हुए कहा कि बिना पूरी कानूनी प्रक्रिया के घर गिराना संविधान के मूल सिद्धांतों के खिलाफ है।
SC-ST एक्ट और आरक्षण को कमजोर करने की कोशिशों का भी पप्पू यादव ने विरोध किया। उन्होंने कहा कि कानून का दुरुपयोग दलित नहीं करते, बल्कि गांव के दबंग इसका फायदा उठाते हैं।
पुनर्वास के नाम पर नदी किनारे की विवादित जमीन का प्रस्ताव उन्होंने अव्यावहारिक बताया और सरकार पर दोहरे मानदंड का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि बड़े माफिया गैर-मजरूआ जमीन पर होटल और पक्के मकान बनाकर बैठे हैं, लेकिन कार्रवाई सिर्फ गरीबों की झोपड़ियों पर होती है।
अंत में पप्पू यादव ने मांग की कि सभी उजाड़े गए परिवारों को सम्मानजनक पुनर्वास, एक बीघा जमीन और उचित मुआवजा तुरंत दिया जाए।
उनका अंतिम वाक्य लोगों के बीच गूंजता रहा—
“पहले इंसाफ दीजिए, फिर विकास की बात कीजिए।”


