पटना | पूर्णिया के निर्दलीय सांसद पप्पू यादव के लिए मंगलवार (10 फरवरी 2026) का दिन भारी गहमागहमी वाला रहा। पटना की एमपी-एमएलए कोर्ट ने उन्हें 1995 के मामले में जमानत (Bail) तो दे दी, लेकिन उनकी रिहाई नहीं हो पाई। पुलिस ने दो अन्य मामलों में उनकी रिमांड ले ली है, जिसके चलते उन्हें वापस बेऊर जेल भेज दिया गया।
1. दोपहर 12:30 बजे व्हीलचेयर पर एंट्री
सांसद पप्पू यादव को दोपहर करीब 12:30 बजे बेऊर जेल से कोर्ट लाया गया।
- तस्वीर: पप्पू यादव व्हीलचेयर पर बैठकर कोर्ट रूम पहुंचे। वे पिछले तीन दिनों से जेल में बंद हैं और बीमार बताए जा रहे हैं।
- सुनवाई: दोपहर 2 बजे उनकी जमानत याचिका पर सुनवाई शुरू हुई। कोर्ट ने दलीलें सुनने के बाद 1995 के केस में उन्हें बेल दे दी।
2. पुलिस का ‘मास्टरस्ट्रोक’: गेट पर ही लटक गई रिहाई
जैसे ही पुराने केस में बेल मिली, पुलिस ने तुरंत दो नए मामलों की फाइल खोल दी।
- रिमांड: पुलिस ने कोतवाली और बुद्धा कॉलोनी थाने से जुड़े मामलों में पप्पू यादव की रिमांड मांगी।
- मंजूरी: कोर्ट ने पुलिस की अर्जी मंजूर कर ली। यानी एक केस में बेल मिलने के बावजूद अब इन दो मामलों (Production Warrant) के चलते उन्हें जेल में ही रहना होगा।
3. ‘NEET’ का मुद्दा या 31 साल पुराना जिन्न?
पप्पू यादव की गिरफ्तारी को लेकर सियासत गर्म है।
- आरोप: शुक्रवार को उन्हें 1995 में एक मकान पर अवैध कब्जे के आरोप में गिरफ्तार किया गया था।
- समर्थक बोले: समर्थकों का कहना है कि पप्पू यादव ने NEET छात्रा की मौत और पेपर लीक का मुद्दा जोर-शोर से उठाया था, इसलिए सरकार 31 साल पुराने ‘गड़े मुर्दे’ उखाड़कर उन्हें परेशान कर रही है।
4. सोमवार को वकीलों की हड़ताल से टली थी सुनवाई
पप्पू यादव की बेल पर सोमवार (9 फरवरी) को ही सुनवाई होनी थी। लेकिन उस दिन वकीलों के पेन डाउन (Pen Down) स्ट्राइक के कारण सुनवाई नहीं हो सकी थी। मंगलवार को सुनवाई हुई, लेकिन नतीजा ‘ढाक के तीन पात’ ही रहा—बेल मिली, पर जेल नहीं छूटी।


