PoK में नहीं मनेगा पाकिस्तान का आजादी दिवस, विरोध के बीच आज मना रहे ‘काला दिवस’

पाकिस्तान में आज 14 अगस्त को पाकिस्तान का आजादी दिवस मनाया जा रहा है। ऐसे में पाक के कब्जे वाले कश्मीर यानी पीओके में आज पाकिस्तान का स्वतंत्रता दिवस नहीं मनाया जा रहा है। यहां कई राजनीतिक कार्यकर्ताओं और युवा संगठनों द्वारा पाकिस्तान के विरोधस्वरूप आज ब्लैक डे मनाया जा रहा है। आज 14 अगस्त के दिन पाकिस्तान आजाद हुआ था और इस बार पाकिस्तान भी 77वां आजादी दिवस सेलिब्रेट कर रहा है। लेकिन जिस पाकिस्तान ने अवैध रूप से अपने कब्जे में जिस भूभाग को कब्जाया हुआ है, उस पाक अधिकृ​त कश्मीर में आज के दिन को ब्लैक डे के रूप में मनाया जा रहा है। कई राजनीतिक और युवा संगठन के लोग आज के दिन पाक की आजादी दिवस का विरोध जाहिर कर रहे हैं।

दरअसल, पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर (POK) में पाक सरकार के अत्याचारों के विरोध में स्वतंत्रता दिवस को ब्लैक डे के रूप में मनाने का फैसला किया है। समाचार एजेंसी ANI की एक रिपोर्ट के मुताबिक, POK के मुजफ्फराबाद जिले में पुलिस ने सोशल मीडिया पर कथित पाकिस्तान विरोधी पोस्ट के लिए कई लोगों को गिरफ्तार किया और प्रताड़ित किया।

पाक विरोधी गतिविधियों के लिए पुलिस ने POK में लोगों को किया गिरफ्तार

पुलिस POK में गिरफ्तार किए गए लोगों को पाकिस्तान विरोधी पोस्ट हटाने और देश के समर्थन में बयान देने के लिए भी मजबूर किया। POK के निवासियों ने पाकिस्तान सरकार के अत्याचारों के खिलाफ विरोध प्रदर्शन किया है। इसके अलावा दक्षिणी पाकिस्तान के हिंसा प्रभावित प्रांत बलूचिस्तान के लोगों ने भी 14 अगस्त को काला दिवस ​​​​के रूप में मनाने फैसला लिया। इसके अलावा उन्होंने 15 अगस्त को एक महान दिवस के रूप में मनाने का फैसला किया है।

POK सरकार का आदेश यूएन के प्रस्तावों के विपरीत

POK सरकार ने आदेश दिया है कि 14 अगस्त को सभी सरकारी इमारतों पर पाकिस्तान का झंडा फहराया जाए और सलामी दी जाए। लेकिन यह संयुक्त राष्ट्र यानी यूएन के उन प्रस्तावों के बिल्कुल विपरीत है, जो POK को एक विवादित क्षेत्र के रूप में मान्यता देते हैं। आपको बता दें कि POK एकमात्र भारतीय क्षेत्र है, जिस पर 1947 से पाकिस्तान का अवैध रूप से कब्जा है। उधर, भारत सरकार 5 अगस्त 2019 को जम्मू कश्मीर से अनुच्छेद 370 को निरस्त कर विशेष राज्य का दर्जा खत्म कर दिया था। इसके बाद से पाकिस्तान ने POK और बलूचिस्तान के क्षेत्र में अत्याचार बढ़ा दिया। इससे वहां के स्थानीय युवक संगठनों और कार्यकर्ताओं द्वारा पाकिस्तान की सरकार का विरोध किया जाता रहा है और भारत के समर्थन में नारे लगाए जाते रहे हैं।

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