HIGHLIGHTS
- बड़ा बदलाव: पैक्स (PACS) अब सिर्फ खाद-बीज तक सीमित नहीं रहेंगे; शहद उत्पादन और बकरी पालन जैसे बिजनेस से जुड़ेंगे।
- प्रशिक्षण: पटना के DNS क्षेत्रीय सहकारिता प्रबंधन संस्थान में 3-दिवसीय विशेष ट्रेनिंग प्रोग्राम शुरू।
- सरकारी कवच: गोदाम, कॉमन सर्विस सेंटर (CSC) और आधुनिक तकनीक से लैस किए जा रहे हैं पैक्स।
- मिशन: गांव के लोगों को गांव में ही काम देना, ताकि रोजगार के लिए बाहर न जाना पड़े।
पटना | 16 मार्च, 2026
बिहार के गांवों की तस्वीर बदलने के लिए सहकारिता विभाग ने एक मास्टर प्लान तैयार किया है। सोमवार को राजधानी पटना में सहकारिता मंत्री डॉ. प्रमोद कुमार ने पैक्सों और एफपीओ (FPO) को ‘उद्यमी’ के रूप में विकसित करने के लिए तीन दिवसीय प्रशिक्षण शिविर का उद्घाटन किया। मंत्री ने साफ कर दिया कि अब पैक्स का मतलब सिर्फ सरकारी अनाज की खरीद नहीं, बल्कि ‘रोजगार की खान’ होगा।
“बिजनेस माइंडसेट” अपनाएं पैक्स: मंत्री का विजन
मंत्री डॉ. प्रमोद कुमार ने सभा को संबोधित करते हुए कहा कि सरकार पैक्सों को वह हर सुविधा दे रही है जो एक कॉर्पोरेट कंपनी को मिलती है।
”पैक्सों में शहद उत्पादन, बकरी पालन और वेजफेड जैसे कामों की असीम संभावनाएं हैं। सहकारिता में इतना रोजगार है कि अगर हम साथ मिलकर काम करें, तो बिहार के युवाओं को पलायन करने की जरूरत नहीं पड़ेगी।” – डॉ. प्रमोद कुमार, सहकारिता मंत्री
लोकतांत्रिक संस्था है पैक्स, किसी की जागीर नहीं: सचिव
सहकारिता विभाग के सचिव धर्मेंद्र सिंह ने एक महत्वपूर्ण बात कही। उन्होंने कहा कि पैक्स एक लोकतांत्रिक संस्था है और इसमें समाज के हर वर्ग की भागीदारी होनी चाहिए। इस प्रशिक्षण का मुख्य उद्देश्य पैक्स प्रतिनिधियों को यह सिखाना है कि वे कैसे एक पेशेवर बिजनेसमैन की तरह अपने पैक्स को मुनाफे में ला सकते हैं और स्थानीय समस्याओं का समाधान ढूंढ सकते हैं।
पैक्स को क्या-क्या मिल रहा है? (सरकारी सपोर्ट सिस्टम)
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सुविधा |
लाभ |
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आधुनिक गोदाम |
अनाज और उत्पादों के सुरक्षित भंडारण की सुविधा। |
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कॉमन सर्विस सेंटर (CSC) |
बैंकिंग, बीमा और अन्य डिजिटल सेवाओं से कमाई का मौका। |
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प्रसंस्करण इकाइयां (Processing) |
उत्पादों की पैकेजिंग और वैल्यू एडिशन के लिए तकनीकी मदद। |
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बाजार लिंक |
उत्पादों को सीधे बड़े बाजारों और ऑनलाइन प्लेटफॉर्म से जोड़ना। |
आत्मनिर्भर गांव का रोडमैप
निबंधक रजनीश कुमार सिंह ने बताया कि विभाग की कार्ययोजना का मुख्य केंद्र ‘आत्मनिर्भर गांव’ है। इसके तहत नाबार्ड (NABARD) और बिहार राज्य सहकारी बैंक के सहयोग से पैक्सों को वित्तीय रूप से मजबूत किया जा रहा है ताकि वे छोटे किसानों की आय बढ़ाने के लिए नए-नए व्यावसायिक अवसर तलाश सकें।


