लखीसराय के कोली गांव में लहलहा रही थी अफीम की फसल; SDM-SDPO ने खुद काटी फसल, इलाके में हड़कंप

HIGHLIGHTS

  • इतिहास में पहली बार: लखीसराय जिले में पहली बार अफीम (Opium) की अवैध खेती का हुआ पर्दाफाश।
  • लाखों का नशा: करीब 2.50 कट्ठा जमीन पर तैयार हो चुकी थी अफीम की फसल, कीमत लाखों में।
  • एक्शन मोड: SDM प्रभाकर कुमार और SDPO शिवम कुमार ने भारी पुलिस बल के साथ खुद मौके पर पहुंचकर फसल को कराया नष्ट।
  • रडार पर भू-स्वामी: कोली गांव के शंकर महतो की जमीन पर हो रही थी खेती; पुलिस ने शुरू की धर-पकड़।

लखीसराय | 15 मार्च, 2026

​लखीसराय जिला, जो अब तक अपनी ऐतिहासिक पहचान और पहाड़ियों के लिए जाना जाता था, आज एक ऐसी खबर से दहल उठा जिसने पुलिस और प्रशासन की नींद उड़ा दी है। जिले के हलसी थाना क्षेत्र के कोली गांव में अफीम की अवैध खेती का एक ऐसा मामला सामने आया है, जिसने सुरक्षा एजेंसियों को ‘हाई अलर्ट’ पर डाल दिया है। यह लखीसराय के इतिहास में अपनी तरह का पहला मामला है जहाँ ‘नशे की फसल’ खेतों में लहलहाती मिली।

प्रशासनिक ‘सर्जिकल स्ट्राइक’: जब अफीम के बीच पहुँचे अधिकारी

​जैसे ही हलसी पुलिस को गुप्त सूचना मिली कि कोली गांव के एक खेत में कुछ ‘अजीब’ और ‘प्रतिबंधित’ फसल उगाई जा रही है, महकमे में अफरा-तफरी मच गई। मामले की गंभीरता को देखते हुए SDM प्रभाकर कुमार और SDPO शिवम कुमार तुरंत दल-बल के साथ गांव पहुँच गए। वहां का नजारा देखकर अधिकारी भी दंग रह गए—करीब 2.50 कट्ठा जमीन पर अफीम की फसल पूरी तरह तैयार खड़ी थी और कटाई के कगार पर थी।

लाखों की फसल हुई ‘खाक’, साक्ष्य के लिए लैब भेजे गए सैंपल

​प्रशासन ने बिना वक्त गंवाए सख्त रुख अपनाया। पुलिस और मजदूरों की मदद से पूरी फसल को मौके पर ही काटकर नष्ट कर दिया गया। SDM प्रभाकर कुमार ने बताया कि बरामद अफीम की कीमत लाखों रुपये है। हालांकि, कानूनी प्रक्रिया और पुख्ता सबूतों के लिए कुछ पौधों को जब्त कर लैब जांच (FSL) के लिए भेजा गया है।

शंकर महतो की जमीन और ‘मास्टरमाइंड’ की तलाश

​SDPO शिवम कुमार ने स्पष्ट किया कि जिस जमीन पर यह अवैध धंधा फल-फूल रहा था, वह गांव के ही शंकर महतो की है। पुलिस अब यह पता लगाने में जुटी है कि क्या जमीन मालिक खुद इसमें शामिल था या उसकी जमीन को किसी बाहरी सिंडिकेट ने किराए पर लेकर यह खेल रचा था। लखीसराय पुलिस अब उस पूरे नेटवर्क को खंगाल रही है जिसने शांतिप्रिय जिले में नशे के इस ‘जहर’ को बोने की जुर्रत की।

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​लखीसराय में अफीम का मिलना सामान्य घटना नहीं है। अफीम की खेती आमतौर पर खास जलवायु और गहरी निगरानी में होती है। अगर यह फसल तैयार होने तक पुलिस को खबर नहीं लगी, तो यह स्थानीय इंटेलिजेंस की एक बड़ी विफलता है। सवाल यह है कि अफीम के बीज कहाँ से आए? और इसका ‘बायो-मार्केट’ कहाँ था? प्रशासन को केवल फसल नष्ट करके नहीं रुकना चाहिए, बल्कि उन ‘सफेदपोशों’ तक पहुँचना चाहिए जो मासूम किसानों को चंद पैसों का लालच देकर उन्हें ‘अंधेरे कारोबार’ का हिस्सा बना रहे हैं।

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